गठिया के प्रकार, कारण, लक्षण और उपचार – Arthritis Types, Causes, Symptoms, And Treatment in Hindi

Arthritis in Hindi

विषय सूचि

उपक्षेप – Introduction

रफ्तार भारी ज़िन्दगी में ब्रेक लगाने वाली बीमारी को गठिया कहते हैं। यानी जोड़ों का दर्द जो बढ़ती उम्र के साथ शरीर पर हावी होने लगता है। अक्सर लोग इस बीमारी का सही से पता नहीं लगा पाते और नीम हकीम खतरे जान का सहारा लेते है। जिससे रोगी जाने अंजाने कुछ ऐसी दवाईयों का सेवन करते हैं जैसे चूर्ण दर्द निवारण गोलियां इत्यादि। वक्त के साथ ये रोग घातक रूप ले सकता है। इसलिए सबसे पहले इस बीमारी से निपटने के लिए जागरूकता की ज़रूरत है। आइए जानते है आखिर गठिया रोग है क्या?

गठिया क्या है – What is Arthritis in Hindi?

गठिया बुजुर्गों में होने वाली बीमारी है जो दिन प दिन बढ़ती ही जा रही है। एक अंतरराष्ट्रीय सर्वे के मुताबिक भारत की कुल आबादी में कम से कम 18 करोड़  लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं। इस बीमारी का सबसे प्रचलित रूप “ऑस्टियो आर्थराइटिस” है। जो भारत में हर साल 1.5 करोड़ लोगों को प्रभावित करता है।

बदलती लाइफ स्टाइल में ये बीमारी युवाओं को भी अपनी चपेट में ले रही है। इस रोग की शुरुआत विटामिन डी की कमी के कारण होती है, जिसमें मरीज़ के जोड़ों में दर्द की शिकायत होती हैं।

मेटाबॉलिज्म विकृति से होता है। इसमें ब्लड में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ जाती है। ये मात्रा व्यक्ति के सोते समय या देर  तक एक ही आसन में बैठने से यूरिक एसिड जोड़ों में जम जाते हैं, जो तकलीफ देते हैं, और धीरे धीरे ये शरीर में गठिया का रूप ले लेते हैं। लापरवाही के कारण कभी कभी घुटना, कूल्हा इंप्लांट करने की भी जरूरत पड़ सकती है। इसलिए जोड़ों के दर्द को नजर अंदाज नहीं करना चाहिए। किसी भी तरह की जोड़ों में तकलीफ होने पर हड्डी रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।

गठिया के प्रकार – Types of Arthritis in Hindi

गठिया बीमारी जोड़ों में सूजन और दर्द से ही जुड़ी है। आइए जानते हैं इसके विभिन्न प्रकारों के बारे में।

इन्फ्लैमरेट्री (सूजन) गठिया

यह गठिया दर्द सूजन और शरीर में अकड़न पैदा करता है, जो रोगी के लिए असहनीय दर्द होता है। इन्फ्लैमरेट्री गठिया 3 प्रकार के होते हैं।

  • रूमेटोइड गठिया (आर ए): रूमेटोइड गठिया शरीर में प्रतिरक्षा प्रणाली उपस्थिति (ऊतक जोड़ों को एक साथ जोड़ती है।) जो जोड़ों को प्रभावित करती है। इसमें शरीर में अकड़न, जोड़ों का दर्द, नींद ना आना, हाथों और पैरों में झनझनाहट सुन्न करना और जोड़ों की विकृतियों को बढ़ाती है।
  • रिएक्टिव गठिया: प्रतिक्रियाशील गठिया शरीर के किसी भी हिस्से में संक्रमण प्रभाव की वजह से होता है। इंफेक्शन कि वजह से जोड़ों पर  सूजन बढ़ जाती है। इस प्रकार का गठिया ज़्यादातर गुप्तांगों और जननंगो में होता है।
  • सोरियाटिक गठिया: सोरियाटिक गठिया एक जोड़ों का विकार है जो हमेशा सोरोयासिक स्किन इंफेक्शन की वजह से होता है। जिसके कारण शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली स्वास्थ ऊतक पर  हमला करती है जिससे जोड़ों में सूजन बढ़ जाती है।

डीजनरेटिव या मकैनिकल गठिया

जब कोई एक्सिडेंट हड्डियों के चोट का कारण बनते हैं तो इसे अपक्षियया यांत्रिक गठिया कहते हैं। ये हड्डियों को पतला और कमजोर बनाता है। जिससे संयोजी ऊतक आसमान हो जाते हैं और जोड़ों में सूजन और दर्द की वजह से हड्डियां आपस में रगड़ने लगती है।

आस्टियो आर्थराइटिस

आस्टियो आर्थराइटिस सामान्य तौर पर जोड़ों में होने वाली बीमारी है जिससे नसों अस्थिरज्जू, उपास्थी और जोड़ों की अंतर्निहित हड्डियों पर गलत असर डालती है। जिससे जोड़ों में सूजन और अकड़न हो जाती है। आस्टियो आर्थराइटिस से प्रभावित होने वाले ज्वाइंट वो होते है जिसका प्रयोग शरीर ज़्यादातर करता है जैसे घुटना, कमर, रीढ़, अंगुंठा और हाथ पैर की उंगलियां।

नरम ऊतक मस्कुलोस्केलेटल (पेशीय) दर्द

 ये भी एक तरह का गठिया है। जिसमें दर्द जोड़ों या हड्डियों के बजाए ऊतकों में होता है। यह दर्द शरीर का कोई भी हिस्सा लगातार इस्तेमाल करने या चोट के कारण हो सकता है।

सेप्टिक गठिया

सेप्टिक गठिया आमतौर पर कमर और घुटनों को प्रभावित करता है। यह सर्जरी या चोट से उबरने वाले फंगल या बैक्टीरिया इंफेक्शन का नतीजा है। सूक्ष्मजीव ब्लड में इंफेक्शन फैलाते है जो जोड़ों में संचारित हो जाता है जिससे सूजन होती है। यह गठिया सर्दियों के मौसम या बुखार की वजह से होता है।

मेटाबॉलिक गठिया

मेटाबॉलिक गठिया होने की वजह से शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा इकट्ठा हो जाती है। इस रोग में शरीर में यूरिक एसिड की ज़्यादा तादात जोड़ों में सुई जैसी संरचनाओं का रूप ले लेती है जो शरीर में बहुत असहनीय दर्द  पैदा करती है। यह गठिया ज़्यादातर हाथों या पैरों के जोड़ों में होता है।

किशोर गठिया (जे ए)

बचपन में होने वाली गठिया को किशोर गठिया कहा जाता है। यह बीमारी 16 साल से कम उम्र वाले बच्चों में होती है। ये हड्डियों को क्षरण  (नष्ट करने) ऊतकों और मांसपेशियों को जकड़ने, जोड़ों के एक सीध में ना होने और वृद्धि के पैटर्न बदलने की वजह से उत्पन्न होती है।

स्पोंडिलो ऑर्थोपैथी

स्पोंडिलो ऑर्थोपैथी रीढ़ में होने वाली गठिया की बीमारी है। इस रोग से पीड़ित व्यक्ति को रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से में ऐठन और दर्द महसूस होता है। यह गठिया जोड़ों पर स्थित टेंडन और लिगामेंट्स पर अटैक करता है। स्पोंडिलो ऑर्थोपैथी रोग के गंभीर केस में हड्डियां पिघलने लगती है जो रीढ़ विकार, कूल्हे और कंधे  को नुकसान पहुंचा सकता है।

वातरक्त या गाउट गठिया

गाउट गठिया शरीर में तरल पदार्थ और ऊतकों में यूरिक एसिड क्रिस्टल की ज़्यादा मात्रा के निर्माण का नतीजा है। यह रोग तब होता है जब शरीर यूरिक एसिड की ज़्यादा मात्रा पैदा करने लगता है इसका उत्सर्जन कम होता है। यह गठिया जोड़ों में असहनीय दर्द, सूजन पैदा करता है।

गठिया के कारण – Causes of Arthritis in Hindi

गठिया रोग,  रोगी के प्रकार पर निर्भर करता है।

ज़्यादातर मामलों में इस परेशानी की वजह उपास्थि, एक ऊतक जो हड्डियों को एक दूसरे से जोड़े रखता है। यह हमारे कंकाल तंत्र का एक अहम हिस्सा है क्योंकि यह मांसपेशियों के फिसलने में मदद करता है, जिससे शारीरिक गतिविधियों में मदद मिलती है। उपास्थि की कमी होने की वजह कई तरह को गठिया हो सकती है।

गठिया होने के भिन्न भिन्न कारण होते है :

  • चोट लगना भी गठिया होने की वजह बन सकता है।
  • वांशनुगत ऑस्टीयो आर्थराइटिस से भी गठिया हो सकता है।
  • इंफेक्शन, सर्जरी, स्मोकिंग और एक्स्ट्रा फिजिकल एक्टिविटी भी गठिया होने के कारण हो सकते हैं।
  • प्रतिरक्षा प्रणाली की असामान्य कार्यप्रणाली की वजह से रूमेटोइड गठिया हो सकता है।
  • एबरेंमेटाबोलिज़्म भी गठिया की वजह बन सकता है।

 गठिया के लक्षण – Symptoms of Arthritis in Hindi

गठिया में जोड़ों में दर्द, सूजन और जकड़न का होना यह रोगी के सामान्य लक्षण होते हैं। अक्सर यह धीरे धीरे बढ़ने लगते हैं। हर व्यक्ति के लक्षण एक दूसरे से अलग हो सकते हैं,और वक़्त के साथ बदल भी सकते हैं। लेकिन कुछ मामलों में ये बढ़त जल्दी देखने को मिल सकती है। कमजोरी की वजह से फ्लेयर्स का अनुभव भी हो सकता है जो गठिया के गंभीर लक्षणों में से एक है।

जोड़ों को प्रभावित करने वाले लक्षण –

गठिया की बीमारी आमतौर पर जोड़ों को प्रभावित करती है जिससे शरीर में मौजूद हाथों और  पैरों के छोटे जोड़ जल्दी इसकी गिरफ्त में आ जाते हैं।

दर्द

गठिया में होने वाला दर्द चुभन के साथ होता है। यह अक्सर सुबह के वक़्त ज़्यादा महसूस होता है

जकड़न

गठिया से पीड़ित व्यक्ति जोड़ों में जकड़न महसूस करता है। इसका असर अगर हाथों पर पड़ जाए तो उंगलियां पूरी तरह से नहीं मुड़ती और मुठ्ठी नहीं बन सकती है। 

ऑस्टियो आर्थराइटिस

 गठिया में होने वाला दर्द 30 मिनट के अंदर ख़तम हो जाता है। लेकिन गठिया से होने वाली जकड़न ज़्यादा समय तक बनी रहती है।

सूजन लाल हो जाना

गठिया रोग से प्रभावित जोड़ों की सतह लाल हो जाती है। जिसकी वजह से जोड़ सूज कर गरम हो जाते हैं और स्पर्श करने पर नरम लगते हैं। कुछ रोगियों में प्रभावित जोड़ों के इर्द गिर्द की स्किन के नीचे गठिया ग्रंथि या कड़ी सूजन बढ़ने लगती है।

अतिरिक्त लक्षण

गठिया में जोड़ों की परेशानी के साथ जो लक्षणों का अनुभव होता है उनमें

थकान, कम एनर्जी, बुखार, पसीना, भूख ना लगना, गिरता वजन। इसके अलावा आंखों का सूख जाना, सीने में दर्द की शिकायत जैसे लक्षण होते हैं।

गठिया रोग से बचाव – Prevention of Arthritis in Hindi

गठिया से बचने के कई उपाय है जिसको अपनाने से व्यक्ति इस घातक बीमारी से दूर रह सकता है।

  • रोजाना 8 घंटे की नींद लेना।
  •  एक ही पोजिशन में देर तक खड़े होने या बैठने से परहेज़ करना चाहिए।
  • प्रभावित जोड़ों पर तनाव की स्थिति में बैठने से बचें ।
  • फल और सब्जियों का सेवन करें जिसमें विटामिन और मिनरल्स की प्रचूर मात्रा हो। विशेषता जिसमें विटामिन ई भी मौजूद हो।
  • उस स्थिति में बैठने या गति करने से बचें जिससे प्रभावित जोड़ पर तनाव आ सकता हो।
  • ओमेगा -3 फैटी एसिड खाद्य पदार्थों को आहार में शामिल करें जैसे  – अलसी, सोयाबीन, कद्दू के बीज और अखरोट। उसके साथ कैनोला और सोयाबीन के तेल का भी इस्तेमाल करें।
  •  गठिया रोग मे परहेज के साथ वजन को कंट्रोल करना भी बहुत ज़रूरी है।

गठिया का इलाज – Treatment of Arthritis in Hindi

गठिया जैसी घातक बीमारी पर काबू पाने के लिए बाजार में कई दवाईयों के विकल्प मौजूद हैं जिसका इस्तेमाल कर इस रोग से छुटकारा पाया जा सकता है।

इन्हें दो तरह की दवाईयों में बांटा गया है –

  • रोग संशोधन एंटी गठिया रोग दवा और जैविक उपचार।
  • रोग संशोधन  गठिया – रोधी दवा।

गठिया रोगी को शरुआती इलाज के लिए (डीएमएआरडी)  गोलियों का मिश्रण दिया जाता है। इस दवा का इस्तेमाल खासकर गठिया के लक्षणों को कम करने के लिए लिए किया जाता है।

 जब प्रतिरक्षा प्रणाली जोड़ों पर अटैक करती है तो  (डीएमएआरडी) निकाल रहे रसायनों के इफेक्ट को रोकती है जो आसपास की हड्डियों, शिराओं, स्नायु बंधन और उपस्थि को नुकसान पहुंचा सकती है।

इसके अलावा कई तरह की डीएमएआरडी है जिसका इसतेमाल किया जा सकता है जैसे – मेथोट्रेक्सेट, लेफ्लूनोमाईड, हाइड्रॉक्सिक्लोरोक्विन्न, सलफसलाजाइन्न, मेंथोट्रेकसेट गठिया के लिए दी जाने वाली पहली दवा है, जो डीएमएआरडी और कॉर्टिकॉस्टरोइड के एक छोटे नियम के साथ किसी भी तरह के दर्द के लिए दी जाती है।

दवा कभी कभी ब्लड काउंट और जिगर पर भी असर डाल सकती है, इसलिए नियमित ब्लड टेस्ट करवाना ज़रूरी है।  मेथोट्रेक्सेट लंग्स को इफेक्ट कर सकता है, इसलिए जब भी कोई रोगी मेथोट्रेक्सेट की डोज लेना शुरू करे तो उसको चेस्ट एक्स-रे करना चाहिए।

सामान्य रूप से, मेथोट्रेक्सेट फेफड़े को प्रभावित कर सकता है, मेथोट्रेक्सेट के सेवन से पहले छाती का एक्स-रे और ब्रीथिग टेस्ट ज़रूर कराना चाहिए। जिससे ये पता चल सके कि दवाई के सेवन से सांस लेने में तकलीफ या सूखी खासी तो नहीं आ रही है।

एक डी एम ए आर डी को असर करने में कुछ महीने लग सकते हैं। दवा नियमित रूप से लेना ज़रूरी है। शुरुआत में दो या तीन तरह की डीएमएआरडी लेनी पड़ सकती है।

जैविक इलाज

जैविक गठिया रोग इलाज का नया रूप है। इसमें एटानेरसेप्ट, इन्फ्लिक्सीमाब, अडालीमुमाब, सेर्टोलिजुमाब, गोलिमुमाब, रितुक्सीमाब, अबाटासेप्ट, टोसिलीज़ुमाब शामिल है।

यह मेथोट्रेक्सेट या किसी अन्य डीएमएआरडी के साथ लिया जाता है और  उसका इस्तेमाल तभी किया जाता है जब ये दवाई अकेले प्रभावी ना हों।

जैविक दवाइयां इंजेक्शन से दी जाती हैं, और वो शरीर में प्रतिरक्षा प्रणाली को एक्टिव कर उसे ज्वाइंट पर अटैक करने वाले ब्लड में खास तरह के रसायनों को रोकने में मदद करता है।

जैविक इलाज के साइडइफेक्ट:

  • इंजेक्शन की जगह की स्किन इफेक्ट होना
  • इंफेक्शन, बीमार रहना, हाई फिवर, सिर दर्द
  • कभी कभी ज़्यादा खतरा भी हो सकता है, जिसमें टीबी के रोग जैसे संक्रमण शामिल हैं।

दर्द से राहत

गठिया रोग की बढ़ती अवधि को कंट्रोल  करने के लिए दवाईयों के अलावा खास तरह की भी दवाइयां लेनी पड़ सकती है।

दर्द का निवारक

गठिया रोग में दर्द से राहत पाने के लिए पेरासिटामोल या साथ में पेरासिटामोल और कोडीन (सह-कोडामोल) दवाओं का इस्तेमाल करने की सलाह दी जा सकती है। ये दवाएं जोड़ों की अंदरूनी सूजन का इलाज करने में मदद नहीं करती हैं लेकिन दर्द से निजात दिला सकती है।

इन दवाईयों को लेने की सलाह तब दी जाती है, जब मरीज़ के लक्षण गंभीर और घातक हो जाएं।

  • गैर-स्टेरॉयडल उत्तेजक – रोधी दवाइयां (एनएसआईडी)
  • दर्द निवारण दवा के अलावा डॉक्टर एक गैर-स्टेरॉयडल उत्तेजक – रोधी दवाई  उत्तेजक-रोधी दवाई (एनएसआईडी) भी लिख सकते हैं।
  • कोर्टिकोस्टराइड

कोर्टिकोस्टराइड बहुत पावरफुल दवाएं है जो दर्द, जकड़न और सूजन को कम करने में मददगार साबित हो सकती हैं। इसका इस्तेमाल कई रूप में किया जा सकता है

कॉर्टिकोस्टेरॉइड का इस्तेमाल सिर्फ इसी तरह किया जाता है क्योंकि लंबे समय तक कॉर्टिकोस्टेरॉइड के इस्तेमाल से गलत असर हो सकता है, जैसे वजन बढ़ना, हड्डियों में पतलापन, घाव हो जाना, मांसपेशियों में कमजोरी, त्वचा का पतला होना इत्यादि।

फिजियोथैरेपि

फिजियोथैरेपिस्ट मांसपेशियों की ताकत में सुधार लाने के लिए और जोड़ों को लचीला बनाने में मददगार हो सकते हैं। फिज़ियोथेरेपी हॉट या आइस पैक, या ट्रांसक्यूटनेस इलेक्ट्रिक शॉक (TENS) का इस्तेमाल कर दर्द से राहत दिला सकते है। TENS मशीन जोड़ों के दर्द पर इलेट्रिक वाइब्रेशन देता है, जो तंत्रिका को सुन्न करती है और गठिया के दर्द को कम करने में मदगार हो सकती है।

ऑक्यूपेशनल थेरेपी

ओयूकपेशनल थेरेपिस्ट की सलाह से घर और ऑफिस दोनों ही जगह पर जोड़ों की देखभाल करने में मदद मिलती है।

पोडायट्रिस्ट

अगर पैरों में दर्द है, तो पोडायट्रिस्ट सहायता कर सकता है। इसमें जोड़ों या जूतों के सोल को सपोर्ट दिया जा सकता है, जो दर्द में राहत दिला सकता है।

सर्जरी

जोड़ों के दर्द हाथ और पैरों की परेशानी को ठीक करने के लिए कई तरह की सर्जरी की जाती है।

  • कार्पल टनल रिलीज़
  • टेढ़ेपन का इलाज करने के लिए उंगलियों का शिरा ढीला करना।
  • उंगली के जोड़ों को फैलाने वाले ऊतक को हटाना।
  • आर्थ्रोस्कोपी
  • आर्थ्रोस्कोपी सूजन वाले ऊतक को हटाने की एक प्रक्रिया है।
  • ऑपरेशन के दौरान, लेजर लाइट और कैमरे के साथ एक पतली नली त्वचा में कट के जरिए डाला जाता है ताकि इफेक्टेड ज्वाइंट को देखा जा सके।

जोड़ रिप्लेसमेंट

गठिया के मरीज़ के कूल्हे, घुटने या कंधे के जोड़ का एक भाग या पूरा जोड़ बदलने के लिए सर्जरी की जरूरत होती है। ये जोड़ रिप्लेसमेंट या आर्थ्रोप्लास्टी के नाम से भी जाना जाता है। नए जोड़ों का 10-20 साल का जीवनकाल होता है। वो बिल्कुल सही नहीं होते हैं ये भी संभावना है कि खराब जोड़ों को नए जोड़ में बदलने के बावजूद वो पहले जैसा काम ना करें।

गठिया का घरेलू उपचार – Home Remedies for Arthritis in Hindi

बाज़ार में गठिया के लिए कई दवाइयां उपलब्ध हैं, लेकिन फिजिकल एक्टिविटी और घरेलू उपायों से भी इसका उपचार किया जा सकता है। आइए जानते हैं कुछ घरेलू उपचार के बारे में-

पानी

यूरिक एसिड की मात्रा शरीर में संतुलित करने के लिए ज्यादा से ज्यादा पानी पिए।

लहसुन

कच्चे लहसुन की 3-4 कलियां खाली पेट लेने से फायदा मिलता है। इसके अलावा इसमें सेंधा नमक, जीरा, हींग, पीपल, काली मिर्च और सोंठ सभी की दो-दो ग्राम मात्रा लेकर अच्छे से पीस लें और इस पेस्ट को अरंडी के तेल में भून लें और बॉटल में भर लें, दर्द वाले स्थान पर मालिश करें आराम मिलेगा।

अदरक

रोजाना खाने के साथ कच्चा अदरक खाएं, इसके अलावा अदरक का तेल भी दर्द वाली जगह पर लगाना फायदेमंद होता है।

तेलों से करें मसाज

सरसों के तेल में लहसुन डालकर उबालें फिर लगाएं तो फायदा होगा। लहसुन का तेल गर्म करके इसमें प्याज का रस डालें और जोड़ों पर मलें। इसके बाद इसे प्लास्टिक के कवर से ढककर गर्म तौलिया लपेटें।  सोने से पहले ये उपचार करें, फायदा होगा।

एलोविरा

एलोविरा जेल दर्द वाली जगह पर लगाएं। फायदा होगा।

हल्दी

हल्दी दूध पिएं, इसके अलावा हल्दी और अदरक का काढ़ा गठिया के लिए रामबाण है। हल्दी और अदरक दोनों में ही एंटी-इन्फ्लेमेट्री गुण होते हैं। इसके लिए दो कप पानी लेकर इसमें आधा चम्मच अदरक और आधा चम्मच हल्दी डालकर उबालें। स्वाद कसैला न लगे इसके लिए शहद मिला लें।

यूकेलिप्टस का तेल

यूकेलिप्टस के तेल से सोने से पहले मसाज करें। ये गठिया के ल‌िए बेहद फायदेमंद है।

बथुए का रस

ताजा बथुआ का रस निकालकर खाली पेट पीने से फायदा होता है। तीन महीने तक इसके सेवन से फायदा होगा।

भाप लें

गठिया में भाप से सेंक ले सकते हैं। इसके लिए बाल्टी में गर्म पानी डालकर भाप लें।

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निष्कर्ष – Conclusion

गठिया के रोगियों को कुछ बाते गांठ बांध लेनी चाहिए। यह बीमारी जल्द से जल्द इलाज मांगती है। समय रहते इलाज होने पर मर्ज बिगड़ता नहीं है। खुद से इलाज ना करें क्योंकि पेन किलर लेने से बीमारी घातक रूप ले सकती है। विशेषज्ञों से सलाह मशवरा करें। फिजियोथैरेपी का पालन सही से करें। इसमें फिजियोथैरेपिस्ट की गाइडेंस ज़रूरी है। अपनी एक मेडिकल रिकॉर्ड की फाइल तैयार करें।

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