कैंसर के लक्षण, कारण, परीक्षण और इलाज – Cancer Symptoms, Causes, Diagnosis, And Treatment in Hindi

cancer in Hindi

उपक्षेप – Introduction

अगर आप क्रिकेट के दीवाने हैं तो आपको ज़रूर 2011 विश्व कप के वो आखिरी क्षण याद होंगे। महेंद्र सिंह धोनी ने 6 रन लगा के भारत को 28 साल बाद विश्व चैंपियन बनाया था। शायद ही कोई ऐसा होगा जिसे ख़ुशी के कारण नींद आयी होगी उस रात। इसी बीच एक खबर आई थी कि युवराज सिंह जो की विश्व कप के हीरो थे, उन्हें कैंसर है। कई बातें हुई, कई बातें बताई गई और आखिरी में उन्होंने अमेरिका जा कर अपना इलाज कराया। कैंसर को हराने के बाद उन्होंने कुछ वक़्त तक क्रिकेट भी खेला और फिर जून 2019 में क्रिकेट से संन्यास ले लिया। 

कैंसर एक खतरनाक और जानलेवा बीमारी है। इस साल विश्व स्वस्थ संस्था द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर 10 में से 1 इंसान को पूरी ज़िन्दगी में एक बार कैंसर जैसी बीमारी का सामना करना पड़ेगा। वहीं हर 15 में से 1 व्यक्ति की कैंसर के कारण मौत भी हो सकती है। विश्व कैंसर रिपोर्ट 2018 के मुताबिक, भारत में कैंसर के 10 लाख से ज़्यादा नए रोगी थे। इसी रिपोर्ट के अनुसार 2018 में कैंसर के कारण मरने वाले लोगों की संख्या 8 लाख के करीब थी। 

कैंसर अगर शुरुआती चरणों में समझ आ जाए तो इसका इलाज संभव होता है। एक वक़्त के बाद कैंसर का इलाज करना मुश्किल होता है। इसीलिए ये ज़रूरी है कि हमें कैंसर और उससे जुडी चीज़ें जैसे कैंसर के लक्षण, परिक्षण, बचाव, इत्यादि चीज़ों के बारे में पता हो। इस लेख में हमने कैंसर को बारीकी से समझाने की कोशिश करी है। इसे अंत तक ज़रूर पढ़ें। 

कैंसर क्या है – What is Cancer in Hindi

किसी भी बीमारी को जानने से पहले उसे समझना बहुत ज़रूरी होता है। असल में कैंसर कई एक जैसी बिमारियों के संग्रह का नाम है। इन सारी बिमारियों में हमारे शरीर की कुछ कोशिकाएँ बिना रुके विभाजित होना शुरू हो जाती हैं। ये कोशिकाएँ विभाजित होते-होते आस-पास की कोशिकाओं में फैल जाती हैं। इसकी वजह से अन्य कोशिकाओं का और अंतिम रूप से शरीर का सामान्य तरीके से काम करना मुश्किल हो जाता है। 

कैंसर शरीर के किसी भी हिस्से, किसी भी कोशिका में हो सकता है। हमारे शरीर में करोड़ों कोशिकाएँ होती हैं। कोशिका विभाजन एक निरंतर होने वाली प्रक्रिया है। हमारे शरीर में हर वक़्त कोशिका विभाजित होते रहती हैं और इसकी वजह से नई कोशिकाएँ बनती रहती हैं। पुरानी कोशिकाएँ एक वक़्त के बाद अपने आप नष्ट होना शुरू हो जाती हैं। 

यदि पुरानी कोशिकाएँ किसी वजह से नष्ट होना बंद हो जाए या फिर नई कोशिकाएँ ज़रुरत से ज़्यादा बनना शुरू हो जाए तो हमारे शरीर में दिक्कतें होना शुरू हो जाती है। इन अवांछित कोशिकाओं में विभाजन की प्रक्रिया चलती रहती है और ये कोशिकाएँ शरीर के किसी हिस्से में इक्कट्ठा होना शुरू कर देती है। इसकी वजह से शरीर में एक गांठ बन जाता है, जिसे ट्यूमर कहते हैं।  

शरीर में बनने वाली हर गांठ ज़रूरी नहीं की कैंसर के कारण हो। कोई गांठ कैंसर की वजह से है या नहीं उसे पता लगाने के लिए डॉक्टर उस गांठ में से कुछ हिस्सा निकाल कर उसकी जाँच करते हैं। ऐसा करने को बयोप्सी (Biopsy) कहते हैं। जो गांठ कैंसर की वजह से नहीं होता उसे बैनाइन ट्यूमर (Benign Tumor) कहते हैं। कैंसर के कारण बनने वाले गांठ को मैलिग्नैंट ट्यूमर (Malignant Tumor) कहते हैं। लेकिमिया (Leukemia) खून में होने वाले कैंसर को कहते हैं, लेकिमिया में शरीर में ट्यूमर या गांठ नहीं बनता।   

कुछ कैंसर ऐसे होते हैं जिसमे हमारी कोशिकाएँ बहुत जल्दी विभाजित और फैलने लगते हैं। कुछ कैंसर में ये विभाजन और फैलने की प्रक्रिया बहुत धीरे होती है। इस वजह से कुछ तरीके के कैंसर का पता लगाना मुश्किल होता है और कुछ का पता लगाना मुश्किल होता है। कैंसर का इलाज भी उसके प्रकार पर निर्भर करता है। कुछ कैंसर कीमोथेरेपी से ठीक हो जाता है वहीं कुछ कैंसर में सर्जरी का इस्तेमाल करना पड़ता है और कुछ कैंसर दवाई से भी ठीक हो जाते हैं। कई बार कैंसर को ठीक करने के लिए एक से ज़्यादा प्रकार के इलाज का उपयोग करना पड़ता है। 

कैंसर के प्रकार – Types of Cancer in Hindi

हमारा शरीर करोड़ों कोशिकाओं से मिल कर बना है। हमारे शरीर में पुरानी कोशिकाएँ नष्ट होती हैं और नई कोशिकाएँ बनती है। ये एक हर वक़्त पर होते रहने वाला प्रक्रिया है। ये लेख पढ़ते वक़्त भी आपके शरीर में ये चीज़ हो रही होगी। हम ये समझ चुके हैं कि कोशिकाओं के अनियमित विभाजन और नष्ट ना होने की वजह से किसी कैंसर होता है। हमारे शरीर का हर एक अंग कोशिकाओं से मिल कर बना है। कुछ कोशिकाएँ मिल कर उत्तक बनाते हैं, कुछ उत्तक मिल कर अंगों को बनाते हैं और कुछ अंग मिल कर एक अंग प्रणाली का निर्माण करते हैं। अंग प्रणाली पूरे तरीके से तभी काम कर सकती है जब उसको बनाने वाले सारे अंग सही से काम कर रहे हों। सारे अंग तभी सही से काम करेंगे जब सारे उत्तक सही से काम कर रहे हों। सारे उत्तक, सही से काम करने के लिए सारी कोशिकाओं पर निर्भर करते हैं। अगर कोशिकाओं में कुछ भी दिक्कत होती है तो पूरा अंग प्रणाली और अंत में शरीर को नुकसान पहुँच सकता है। कैंसर शरीर के किसी भी कोशिका कोई क्षति पहुँचा सकता है और इसकी वजह से ये किसी भी अंग में हो सकता है।  

कैंसर जिन कोशिकाओं से शुरू होता है उनके हिसाब से हम कैंसर को निम्न प्रकार से जानते हैं। 

  • कार्सिनोमा कैंसर (Carcinoma Cancer): ये हमारे शरीर में मौजूद अंगों के ऊपर लगी त्वचा या ऊतकों में मौजूद कोशिकाओं से शुरू होते हैं। 
  • सरकोमा कैंसर (Sarcoma Cancer): ये कैंसर हमारे शरीर में मौजूद हड्डी, चर्बी, रक्त वाहिकाएं (Blood Vessles), मांसपेशी, और उपास्थि (Cartilage) में मौजूद कोशिकाओं से शुरू होते हैं। 
  • लेकिमिया (Leukemia): श्वेत रक्त कोशिकाओं में होने वाले कैंसर को लेकिमिया कहते हैं। ये कैंसर रक्त को बनाने वाले उत्तकों में शुरू होता है। 
  • लिंफोमा और मायलोमा (Lymphoma and Myeloma): ये कैंसर प्रतिरक्षा तंत्र (Immune System) में मौजूद कोशिकाओं में शुरू होता है।
  • केंद्रीय तंत्रिका तंत्र कैंसर (Central Nervous System Cancer): दिमाग और रीढ़ की हड्डी में मौजूद कोशिकाओं में होने वाले कैंसर को केंद्रीय तंत्रिका तंत्र का कैंसर कहते हैं। 

शरीर के जिस हिस्से में कैंसर होता है, उसके नाम से भी कैंसर का वर्गीकरण किया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर, फेफड़ों में होने वाला कैंसर और स्तन कैंसर। भारत में स्तन कैंसर, ग्रीवा कैंसर (Cervical Cancer), और मुंह के कैंसर के सबसे ज़्यादा मरीज़ हैं। 

कैंसर के चरण – Stages of Cancer in Hindi

शरीर में कैंसर के चरण को पहचानना और समझना एक बहुत ही ज़रूरी प्रक्रिया है। डॉक्टर कैंसर के इलाज की प्रक्रिया, कैंसर के चरण को समझने के बाद ही तय करते हैं। कैंसर के चरण का पता होने से:

  • डॉक्टर इलाज होने के बाद दोबारा कैंसर के होने की संभावना को भी समझ पाते हैं। 
  • डॉक्टर कैंसर से उभरने की संभावना का पहचान पाते हैं। 
  • डॉक्टर कैंसर से निदान पाने की प्रक्रिया को मरीज़ और बाँकी लोगों को समझा पाते हैं। 
  • डॉक्टर ये निर्धारित कर पाते हैं कि उपचार कितने अच्छे तरीके से काम करेगा। 
  • हर कैंसर रोगी के उपचार की जानकारी अस्पताल एक डेटाबेस में इक्कठा करते हैं। किसी भी नए मरीज़ के शरीर में कैंसर के चरण का पता चलने के साथ ही डॉक्टर उस रोगी के कैंसर की तुलना इस डाटा से करते हैं। ऐसा डॉक्टर इसलिए करते हैं ताकि कोई ऐसा पुराना मरीज़ मिल सके जिससे उस नए मरीज़ का कैंसर मिलता-जुलता हो। अगर ऐसा कोई मरीज़ मिल जाता है तो उसे दिए गए उपचार को ही नए मरीज़ पर इस्तेमाल कर के देखा जाता है।  

कैंसर के कारण शरीर में बनने वाले ट्यूमर को पांच अलग चरणों में विभाजित किया गया है। ये पांच चरण कुछ इस प्रकार है:

  • चरण 0: इस चरण में कैंसर नहीं होता लेकिन शरीर में कुछ ऐसी असमान्य कोशिकाएँ बन जाती है जिनके वजह से कैंसर का खतरा होता है। 
  • चरण 1: इस चरण में कैंसर शरीर में कैंसर हो चुका होता है। लेकिन ये बहुत ही छोटा होता है और शरीर के किसी एक हिस्से में ही होता है। इसे प्रारंभिक चरण का कैंसर भी कहा जाता है। 
  • चरण 2 और चरण 3: इन चरणों में कैंसर का आकर शरीर में बढ़ चुका होता है। साथ ही कैंसर ने आस-पास की कोशिकाओं को भी नुकसान पहुँचा दिया होता है। 
  • चरण 4: इस चरण में कैंसर सबसे खतरनाक हो जाता है। इस चरण में कैंसर दूसरी कोशिकाओं और शरीर के दूसरे अंगों को भी नुकसान पहुँचा चुका होता है। 

रक्त कैंसर, लिंफोमा और दिमाग के कैंसर की चरण प्रणाली बाँकी कैंसर से अलग होती है। लेकिन इन चरणों से भी बीमारी की जानकारी, जगह और नुकसान का ही पता लगाया जाता है। 

कैंसर के चरण का पता शारीरिक परिक्षण और कुछ टेस्ट के द्वारा लगाया जाता है। इसके द्वारा ये आंकलन भी लगाया जाता है कि कैंसर शरीर के कितने हिस्से तक फैल चुका है। कैंसर के चरण का पता खून की जांच के द्वारा, एक्स-रे के द्वारा, एमआरआई के द्वारा, सीटी स्कैन के द्वारा और अल्ट्रासाउंड के द्वारा पता लगाया जा सकता है।

कैंसर के लक्षण – Symptoms of Cancer in Hindi

हर बीमारी की शुरुआत कुछ असामान्य लक्षणों से होती है। हमारे शरीर में होने वाले कुछ बहुत छोटे बदलाव, कभी-कभी किसी बहुत ही बड़ी बीमारी का संकेत होते हैं। इन बदलावों को हम ज़्यादातर समय नज़रअंदाज़ कर देते हैं। ये गलती कभी-कभी शरीर को बहुत नुकसान पहुँचा देती है। समझदारी इसी में है कि अगर आपको कोई छोटी तकलीफ भी ज़्यादा वक़्त तक रहे तो आप तुरंत डॉक्टर की सलाह लें। अब हम कैंसर के कुछ लक्षणों को समझते हैं।

  • असामान्य पीरियड्स और पेल्विक का दर्द: ज़्यादातर महिलाओं को पीरियड्स नियमित रूप से नहीं आता है और इसकी वजह से दर्द का होना स्वाभाविक होता है। लेकिन अगर ये चीज़ काफी वक़्त तक हो तो ये सर्वाइकल, गर्भाशय, या अंडाशय के कैंसर का लक्षण हो सकता है।    
  • पेट से जुड़ी दिक्कतें: कब्ज़ या दस्त का बार-बार होना, मल में खून का आना, बार-बार पेशाब का आना, या पेशाब के दौरान खून निकलना जैसे लक्षण कभी-कभी किसी गंभीर बीमारी का संकेत होते हैं। ये सारी दिक्कतें पेट के कैंसर, मूत्राशय के कैंसर, या प्रोस्टेट ग्रंथि (Prostate Gland) के कैंसर के कारण भी हो सकते हैं। अनियमित रूप से पेट में दर्द या फिर खाने के बाद पेट में सूजन जैसा महसूस होना भी कैंसर के लक्षण हो सकते हैं। ऐसी दिक्कतें होने पर डॉक्टर से तुरंत संपर्क कर लेना चाहिए।  
  • स्तन में बदलाव: स्तन में अचानक से गाँठ का बनना, स्तन के रंग में परिवर्तन आ जाना, या फिर स्तन के आस-पास कोई भी भरी बदलाव का आना, स्तन के कैंसर के लक्षण होते हैं। स्तन का कैंसर ज़्यादातर महिलाओं को होता है मगर कभी-कभी ये पुरुषों में भी देखा जाता है। 
  • लंबे समय तक खाँसी या सिर दर्द: दो हफ्ते से ज़्यादा खाँसी फेफड़ों के कैंसर का लक्षण होता है और दो हफ्ते से ज़्यादा सिर दर्द दिमाग के कैंसर का लक्षण होता है।
  • खाना निगलने में तकलीफ होना: अगर खाना गले में बार-बार फंस जाए या फिर खाना निगलने में दिक्कत होने लगे तो ये भी गले, फेफड़े या पेट के कैंसर का लक्षण हो सकता है। 
  • मुँह से जुड़ी दिक्कतें: मुँह में दर्द या फिर घाव का बार-बार होना, मुँह के कैंसर का लक्षण होता है। अगर कोई इंसान बहुत ज़्यादा सिगरेट या शराब का सेवन करता हो और ये दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा हो तो उसे तुरंत डॉक्टर को दिखा लेना चाहिए। 
  • अत्यधिक घाव, बुखार या संक्रमण का होना: बिना किसी वजह के शरीर में घाव का होना, बार-बार बुखार आना या फिर संक्रमण का बार-बार होना भी कई तरीके के कैंसर का लक्षण हो सकता है। 
  • शरीर में दर्द और थकान: ऐसा दर्द जो बार-बार होता रहे और सामान्य दवाइयों से ठीक ना हो, कैंसर का लक्षण हो सकता है और इसकी तुरंत जांच करा लेनी चाहिए। अत्यधिक थकान का होना लेकिमिया और लिंफोमा का लक्षण होता है। 

इन सब के अलावा कैंसर के कई और लक्षण भी हो सकते हैं। शरीर में गांठ का अचानक से बन जाना भी कैंसर का एक बहुत बड़ा लक्षण होता है। कोई भी दिक्कत ज़्यादा वक़्त तक नज़र आने पर डॉक्टर से तुरंत संपर्क ज़रूर करें। 

कैंसर के कारण – Causes of Cancer in Hindi

जब हमारे शरीर में मौजूद कोशिकाएँ किसी भी वजह से अनियमित रूप से बढ़ने की क्षमता हाँसिल कर लेती है तो इसकी वजह से शरीर में कैंसर की शुरुआत हो जाती है। इसकी वजह से आस-पास की कोशिकाओं को भरी नुकसान पहुँचता है। इस भाग में हम कैंसर के कारणों को समझने की कोशिश करेंगे। मूलरूप से कैंसर के चार ही कारण होते हैं। 

  • आनुवंशिक (Genetic) कारण: हमारे शरीर में मौजूद जीन में एक छोटा सा बदलाव भी कैंसर को जन्म दे सकता है। ये बदलाव हमारे खान-पान के तरीकों से और विशेष वातावरण के संपर्क में आने से होते हैं। 

कुछ ऐसे कैंसर भी होते हैं जो जीन के द्वारा माता-पिता से बच्चों में आ जाते हैं जैसे, लिंच सिंड्रोम (Lynch Syndrome)

  • व्यवहारिक कारण: जीन में बदलाव हमारे कुछ विशेष व्यवहार से भी हो सकता है। तम्बाकू और सिगरेट के सेवन से फेफड़ों और मुँह का कैंसर होता है। सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणों के सम्पर्क में आने से त्वचा का कैंसर हो जाता है, लाल मांस खाने से और शराब का सेवन करने के कारण भी कई तरीके के कैंसर का खतरा होता है, और मोटापे की वजह से भी कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।  
  • वातावरण कारण: कुछ विशेष वातावरण के संपर्क में आने से भी कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणों के संपर्क में आने से, कुछ विशेष रासायनिक पदार्थों के संपर्क में आने से, हार्मोनल ड्रग्स के सेवन से, और रेडियो-एक्टिव पदार्थ के संपर्क में आने के कारण भी कैंसर हो जाता है। 
  • वायरल और बैक्टीरियल कारण: जब हमारा शरीर कुछ विशेष वायरस और बैक्टीरिया के संपर्क में आता है तो कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। 

कैंसर से बचाव – Prevention of Cancer in Hindi

अगर हम सही समय पर सही कदम लें तो हम कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी से खुद को बचा सकते हैं। लेकिन इसके लिए हमें कैंसर से बचाव के तरीकों के बारे में पता होना चाहिए। इस खंड में हम कैंसर से खुद को कैसे बचा सकते हैं, इसके बारे में बात करने जा रहे हैं। 

अगर हम अपनी सेहत का ध्यान रखते हैं तो हम खुद को कई बिमारियों से बचा लेते हैं। इसलिए किसी भी बीमारी से खुद को बचाने के लिए खुद की सेहत का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है। 

  • हम खुद को सिगरेट, तम्बाकू और शराब से जितना दूर रखें उतना अच्छा होगा। ये सारी चीज़ें कैंसर का कारण तो होती ही हैं साथ ही में अपने साथ कई बिमारियों को भी ले कर आती हैं। कैंसर से बचने के लिए इन जानलेवा चीज़ों को हमें मन करते रहना होगा। 
  • कोशिश करें की सूरज की अल्ट्रावायलेट किरणों से दूरी बना कर रखें। इसके संपर्क में ज़्यादा देर तक आने से त्वचा का कैंसर हो जाता है। खुद के त्वचा को सूरज के इन हानिकारक किरणों से बचा कर हम अपने शरीर को कैंसर से भी बचा सकते हैं। 
  • खुद को कैंसर से बचाने के लिए हमें खुद को स्वस्थ रखना चाहिए। खुद को स्वस्थ रखने के लिए हमें विशेष रूप से अपने खान-पान पर ध्यान रखना चाहिए। अच्छा खान-पान हमें कैंसर और भी कई बिमारियों से बचा सकता है। जिन खाने की चीज़ों से कैंसर होने का खतरा होता है, उससे खुद को आज से ही दूर कर लें तो अच्छा है। 
  • मोटापे से कैंसर होने का खतरा बहुत ज़्यादा बढ़ जाता है। मोटापा सिर्फ कैंसर जैसी ही बीमारी का कारण नहीं होता बल्कि ज़्यादातर बिमारियाँ मोटापे के कारण ही होती हैं। ज़रूरी है की खुद के वजन का ध्यान रखें और शारीरिक रूप से सक्रिय भी रहें। 
  • असुरक्षित यौन-क्रिया से भी कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए ज़रूरी है कि सुरक्षित यौन-क्रिया का पालन करें ताकि आप खुद को कैंसर से बचा सकें। 
  • कैंसर बहुत से वायरस और बैक्टीरिया के कारण भी हो सकता है। कुछ ऐसे वायरस और बैक्टीरिया होते हैं जिनका टीका आसानी से उपलब्ध होता है। समय-समय पर टीका लगवाएं ताकि कैंसर से बचा जा सके। 
  • कैंसर के आनुवंशिक बीमारी है। अगर आपके परिवार में किसी को कैंसर है या था तो आपको कैंसर होने की संभावना ज़्यादा है। इसलिए समय-समय पर कैंसर की जाँच कराते रहें और कैंसर से जुड़े किसी भी लक्षण के दिखने पर डॉक्टर को संपर्क ज़रूर करें। 

कैंसर का परीक्षण – Diagnosis of Cancer in Hindi

अगर कैंसर शुरूआती चरण में पता चल जाए तो उसका इलाज करना आसान होता है। जैसे-जैसे कैंसर शरीर में बढ़ता जाता है, वैसे-वैसे ही उसका इलाज करना मुश्किल होता जाता है। कैंसर के लक्षण दिखने पर ज़रूरी है कि आप अपने डॉक्टर से सलाह लें। अगर कैंसर हो भी जाता है तो घबराना नहीं है। विज्ञान आज इतना आगे पहुँच चूका है कि कैंसर को पीछे छोड़ना कोई मुश्किल काम नहीं है। कैंसर का पता लगाने के लिए डॉक्टर निम्न में से किसी एक या एक से ज़्यादा तरीकों का उपयोग कर सकते हैं। 

  • शारीरिक जाँच: अगर शरीर में गांठ नज़र आ रहा हो तो डॉक्टर शारीरिक जाँच का उपयोग करते हैं। ऐसा करते वक़्त डॉक्टर गांठ को दबा कर देखते हैं। जाँच के वक़्त कैंसर के बाँकी लक्षणों को भी देखा जाता है। शरीर के किसी हिस्से के रंग में बदलाव या फिर किसी अंग में वृद्धि की जाँच की जाती है। अगर ऐसा कुछ नज़र आता है तो हो सकता है वो कैंसर की वजह से हो। 
  • प्रयोगशाला परीक्षण: डॉक्टर खून और मूत्र की जाँच करके भी कैंसर का पता लगा सकते हैं। लेकिमिया खून में होने वाला कैंसर होता है। लेकिमिया की वजह से खून में श्वेत रक्त कोशिकाओं की संख्या बढ़ जाती है। एक सरल खून जाँच से भी श्वेत रक्त कोशिकाओं की संख्या का पता लग जाता है। अगर खून में श्वेत रक्त कोशिकाओं की संख्या ज़्यादा है तो लेकिमिया होने का खतरा बढ़ जाता है।
  • इमेजिंग परीक्षण: शरीर के अंदर किसी हिस्से में बने हुए गांठ का पता शारीरिक जाँच से नहीं लगाया जा सकता है। ऐसे में सीटी स्कैन, हड्डियों का स्कैन, एमआरआई, पीईटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसा करके ना सिर्फ कैंसर बल्कि शरीर में बाँकी किसी दिक्कत का भी पता लगाया जा सकता है। 
  • बायोप्सी: कैंसर की पुष्टि करने के लिए बायोप्सी सबसे सटीक तरीका होता है। इसमें शरीर के अंदर से सैंपल को निकला जाता है। इस सैंपल की प्रयोगशाला में जाँच होती है। बायोप्सी का प्रयोग कैंसर के प्रकार और उसकी जगह को देख कर ही किया जाता है। 

शरीर के सैंपल की जाँच के दौरान डॉक्टर कोशिकाओं को देखते हैं। सामान्य कोशिकाएँ समान आकार की की नज़र आती हैं। जबकि कैंसर ग्रसित कोशिकाओं का आकार अलग-अलग होता है। 

कैंसर का इलाज – Treatment of Cancer in Hindi

कैंसर का इलाज कैंसर को खत्म करने के लिए, कैंसर के आकार को काम करने के लिए, या फिर कैंसर ग्रसित कोशिकाओं की वृद्धि को रोकने के लिए किया जाता है। कैंसर के इलाज के लिए कई तरीकों का उपयोग किया जाता है। कई बार एक से ज़्यादा तरीकों का उपयोग भी कैंसर के इलाज के दौरान किया जा सकता है। 

कैंसर के शुरूआती इलाज़ का मकसद कैंसर कोशिकाओं को शरीर से निकालना होता है। ऐसा करने के लिए ज़्यादातर समय सर्जरी के उपयोग किया जाता है। अगर सर्जरी के बाद कैंसर दोबारा हो जाता है तो तो कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने की कोशिश की जाती है। इसके लिए कीमोथेरेपी, रेडिएशन थेरेपी या फिर हॉर्मोन थेरेपी का उपयोग किया जाता है। 

कई बार कैंसर तो शरीर से खत्म हो जाता है लेकिन इलाज का ख़राब असर शरीर पर हो जाता है। कैंसर खत्म होने के बाद भी उसके कुछ लक्षण शरीर में रह जाते हैं। इन को खत्म करने के लिए सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडिएशन थेरेपी या फिर हॉर्मोन थेरेपी का उपयोग दोबारा किया जाता है। दवाई से भी इस असर को और लक्षणों को खत्म किया जा सकता है। 

इन सबके अलावा बोन मेरो ट्रांसप्लांट, इम्यूनोथेरेपी, ड्रग थेरेपी, इत्यादि प्रक्रिया का उपयोग करके भी कैंसर को खत्म करा जा सकता है। 

कैंसर का इलाज कैंसर के चरण, प्रकार और कैंसर होने वाली जगह पर निर्भर करता है। 

कैंसर के जोखिम कारक और जटिलताएं – Risks And Complications of Cancer in Hindi

कुछ ऐसे कारक होते हैं जिनकी वजह से कैंसर का खतरा शरीर में बढ़ जाता है। ऐसे ही कुछ कारक हैं:

  • उम्र: कैंसर का प्रभाव शरीर पर दिखने में कई बार बहुत समय लग जाता है। ज़्यादा लोगों को कैंसर 65 की उम्र के बाद होता है। मगर ज़रूरी नहीं है कि कैंसर का प्रभाव एक उम्र के बाद ही दिखना शुरू हो। कैंसर शरीर में किसी भी उम्र में दिख सकता है। 
  • आदत: आपकी आदतों की वजह से भी कई बार कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। सिगरेट के सेवन से, शराब के सेवन से, सूरज की किरणों से अत्याधिक संपर्क, मोटापा, और असुरक्षित यौन संबंध से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। 
  • पारिवारिक इतिहास: कई बार अगर परिवार में किसी को कैंसर रहा हो तो उसकी वजह से भी कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। अगर आपके परिवार में किसी को कैंसर था या है तो कैंसर का नियमित रूप से जाँच कराते रहना चाहिए। 
  • वातावरण: आप जिस वातावरण में रहते हैं वो भी एक बहुत बड़ा कारण हो सकता है। अगर आप ज़्यादा समय तक खतरनाक रसायन के संपर्क में आते हैं, या किसी ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आते हैं जो सिगरेट का सेवन करता हो तो कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। 

कैंसर और उसके इलाज के कारण कई जटिलताओं का सामना भी करना पड़ सकता है। कैंसर के कारण शरीर में दर्द होता ही है। कैंसर के इलाज के बाद भी कभी-कभी शरीर में दर्द होता है। इस दर्द को दवाई से ठीक किया जा सकता है। शरीर में थकान कैंसर के कारण और कैंसर के इलाज के कारण हो जाता है। कैंसर के इलाज के बाद की थकान अस्थायी होती है और कुछ वक़्त बाद ये खत्म हो जाती है। कैंसर की वजह से और कैंसर के इलाज की वजह से भी सांस लेने में दिक्कत महसूस होना एक आम लक्षण है और इसे भी दवाई ले कर ठीक किया जा सकता है। कई बार दस्त या कब्ज़ भी कैंसर के कारण और उसके इलाज के कारण हो जाता है। वजन का बढ़ना, शरीर में रासायनिक बदलाव का होना, इत्यादि दिक्कतों से शरीर को जूझना पड़ सकता है। 

निष्कर्ष – Conclusion

कैंसर एक बेहद ही खतरनाक और जानलेवा बीमारी है। अच्छी बात ये है कि कैंसर का इलाज संभव है। लेकिन कैंसर के इलाज के लिए ज़रूरी ये है कि शुरूआती चरण में कैंसर का पता लग जाए। अगर ऐसा हो जाता है तो इलाज आसान हो जाता है। अगर कैंसर का पता देरी से चलता है तो इसका इलाज मुश्किल हो जाता है। साथ ही साथ इलाज के हो जाने के बाद कैंसर का दोबारा लौटने की संभावना भी होती है। कैंसर किसी भी उम्र के इंसान को हो सकता है। इसके लक्षण काफी आम होते हैं। इसी वजह से लोग कैंसर को समझ नहीं पाते। समझदारी इसी में है कि कैंसर का एक भी लक्षण नज़र आने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। डॉक्टर कुछ टेस्ट करके ये आसानी से समझ जाते हैं कि दिखने वाले लक्षण कैंसर के हैं या किसी और बीमारी के।  कुछ ऐसी चीज़ें हैं जिनसे बच कर हम खुद को कैंसर से बचा सकते हैं। उनमे से एक है सिगरेट का सेवन करना। आज के वक़्त में जहाँ प्रदुषण इतना ज़्यादा है, सिगरेट हमारे फेफड़ों को काफी नुकसान पहुँचा सकता है। इसलिए सिगरेट से खुद को जितना हो सके उतना दूर रखें। 

हमने इस लेख के द्वारा आपको कैंसर से जुड़ी हर एक जानकारी देने की कोशिश करी है। कैंसर क्या है, कैसे होता है, क्यों होता है, कैंसर का इलाज सबके बारे में हमने विस्तार से बात करी है। हमें आशा है कि आपको ये लेख पढ़ कर ज़रूरी जानकारी मिल गई होगी। हमारी आपसे यही अनुरोध है कि इसे अपने परिवार के लोगों और मित्रों के साथ साझा ज़रूर करें। कैंसर भारत में एक बहुत ही आम बीमारी है। इससे हम तभी लड़ सकते हैं, जब हम इसके लिए तैयार हो। 

संदर्भ – References

Photo of Dr. Pritpal Singh
Dr. Pritpal Singh is amongst the best doctors in Kolkata who is specialized in Nutrition. Dr. Pritpal Singh practices at Addlife Caring Minds Clinic in Sarat Bose Road, Kolkata. A highly trained & specialist doctor who has completed MBBS, and has experience over 6 years as a practicing doctor in Nutrition.

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