डेंगू के लक्षण, कारण, प्रकार, निदान और उपचार – Dengue Symptoms, Causes, Types, Diagnosis and Treatment in Hindi

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विषय सूचि

उपक्षेप – Introduction

डेंगू बुखार जिसका नाम सुनकर आज भी लोगों का दिल दहल जाता है, और ऐसा हो भी क्यूं न, डेंगू ने पिछले कुछ सालों से पूरी दुनिया में अपना आतंक मचा रखा है। ना जाने कितने लोग को ये एक मच्छर मौत के घाट उतार चुका है। पूरी दुनिया के 128 देशों में डेंगू के मच्छर ने अपना तांडव  मचा रखा है। डेंगू से अब तक कोई भी देश इतनी जद्दो जहद के बावजूद अब भी  पूरी तरह से इससे निजात नहीं पा सके है। इससे होने वाले बुखार को ‘हड्डी तोड़’ बुखार भी कहा जाता है क्योंकि पीड़ित व्यक्ति को इस बुखार में बहुत दर्द होता है, जैसे उनकी हड्डियां टूट रही हों।

शुरुआत में यह बुखार नॉर्मल बुखार जैसा ही लगता है, जिसके वजह से बुखार और डेंगू के लक्षणों में फर्क समझ नहीं आता है। इस बुखार के इलाज में थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है। इसलिए हम इस आर्टिकल के जरिए आपके साथ डेंगू से जुड़े कुछ तथ्यों को साझा कर रहे हैं। ये ऐसा दौर है जहां डेंगू ने पूरी तरह से अपना पैर पसार लिया है इसलिए इस ख़तरनाक मच्छर से डरने या घबराने के बजाय इससे मुकाबला करने की ज़रूरत है। जानिए, डेंगू बुखार के लक्षण और इससे बचाव के तरीकों के बारे में जिसकी जानकारी आपके लिए बहुत जरूरी है।

डेंगू क्या है? – What is Dengue Fever in Hindi

डेंगू एक वायरस की वजह से होता है जो मच्छरों के जरिए फैलता है। सन् 1779 में डेंगू बुखार का सबसे पहले पता लगाया गया था। डेंगू में बहुत तेज बुखार होता है। इसे हड्डी तोड़ बुखार (Breakbone fever) भी कहा जाता है क्योंकि इसमें रोगी हड्डी में टूटने जैसा दर्द महसूस होता है। 

डेंगू के वायरस चार प्रकार के होते हैं। डेंगू का बुखार चार प्रकार के वायरस में से किसी एक प्रकार के वायरस की वजह से हो सकता है। डेंगू के वायरस को फैलने के लिए किसी माध्यम की ज़रूरत होती है और ये माध्यम मच्छर होते हैं। अगर किसी व्यक्ति को एक बार डेंगू हो जाए तो ठीक होने के बाद शरीर में उस वायरस के लिए एक खास एन्टी बॉडी बन जाती है जिसकी वजह से शरीर में उस वायरस के प्रति रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है।

डेंगू बुखार के प्रकार – Types of Dengue Fever in Hindi

सामान्य डेंगू बुखार – Normal dengue fever

इसमें तेज़ बुखार के साथ असहनीय बदन में दर्द, सिर में दर्द खास तौर पर आंखों के पीछे और शरीर पर दाने हो जाते है। यह जल्द ठीक हो जाता है। एक डेंगू बुखार ऐसा भी होता है जिसमें लक्षण नज़र नहीं आते हैं। ऐसे मरीज का टेस्ट करने पर डेंगू पॉजिटिव आता है। लेकिन वह खुद-ब-खुद बिना किसी इलाज के ठीक हो जाता है। इसके लक्षणों में –

  • अचानक तेज बुखार।
  • सिर में आगे की और तेज दर्द।
  • आंखों के पीछे दर्द और आंखों के हिलने  से दर्द में और तेजी।
  • मांसपेशियों (बदन) व जोडों में दर्द।
  • स्‍वाद का पता न चलना व भूख न लगना।
  • छाती और ऊपरी अंगो पर खसरे जैसे दानें
  • चक्‍कर आना।
  • जी घबराना उल्‍टी आना।
  • शरीर पर खून के चकते एवं खून की सफेद कोशिकाओं की कमी।
  • बच्‍चों में डेंगू बुखार के लक्षण बडों की तुलना में हल्‍के होते हैं।

क्लासिकल डेंगू बुखार – Clasical dengue fever

यह डेंगू फीवर एक नॉर्मल वायरल फीवर है। इसमें तेज बुखार, बदन में दर्द, तेज सिर में दर्द, शरीर पर दाने जैसे लक्षण दिखते हैं। यह डेंगू 5-7 दिन के नॉर्मल इलाज से ठीक हो जाता है।

डेंगू हेमरेजिक बुखार – Hemragic dengue fever

यह थोड़ा खतरनाक साबित हो सकता है। इसमें प्लेटलेट और व्हाइट ब्लड सेल्स की तादात जल्दी जल्दी कम होने लगती है। नाक और मसूढ़ों से खून आना शुरू हो जाता है, शौच या उल्टी में खून आना या स्किन पर गहरे नीले-काले रंग के चकते जैसे लक्षण भी हो सकते हैं। इसके अलावा –

  • शरीर की स्किन पीली और ठन्‍डी पड जाना।
  • नाक, मुंह और मसूडों से खून बहना।
  • प्‍लेटलेट सेल की तादात 1,00,000 या इससें कम हो जाना।
  • फेंफडों और पेट में पानी इकट्ठा हो जाना।
  • त्वचा में घाव पड जाना।
  • बैचेनी रहना व लगातार कराहना।
  • प्‍यास ज्‍यादा लगना, गला सूख जाना।
  • खून वाली या बिना खून वाली उल्‍टी आना।
  • सांस लेने में तकलीफ होना।

डेंगू शॉक सिंड्रोम – Shock Syndrome Dengue Fever

इसमें मरीज धीरे-धीरे होश खोने लगता है, उसका ब्लड प्रेशर (बीपी) और नब्ज (पल्स रेट) एकदम कम हो जाती है और तेज बुखार के बावजूद स्किन ठंडी लगती है।

  • नब्‍ज का कमजोर होना और तेजी से चलना।
  • ब्लड प्रेशर का कम हो जाना और त्‍वचा का ठंडा पड जाना।
  • मरीज को बहुत ज़्यादा बेचैनी महसूस होना।
  • पेट में तेज और लगातार दर्द।
  • ऊपर की तीन स्थितियों के मुताबिक मरीज का यथोचित इलाज शुरू करें।
  • मरीज के खून की सीरोलोजिकल और वायलोजिकल जांच सिर्फ मर्ज को बताती  है और इनका होना या ना होना मरीज के इलाज में कोई असर नहीं डालता क्‍योंकि डेंगू एक तरह का वायरल बुखार है, इसके लिये कोई खास दवा या वैक्‍सीन उपलब्‍ध नहीं है।

डेंगू के कारण – Causes of Dengue in Hindi

डेंगू बुखार यह एक फ्लू जैसी बीमारी है, जो डेंगू वायरस की वजह से होती है। यह तब होता है,जब वायरस वाला एडीज मच्छर किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटता है। यह रोग मुख्य रूप से दुनिया के उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाया जाता है।

डेंगू चार वायरसों के कारण होता है, जो इस प्रकार हैं –

  • डीईएनवी-1
  • डीईएनवी-2
  • डीईएनवी-3
  • डीईएनवी-4

जब यह पहले से इनफेक्टेड व्यक्ति को काटता है तो वायरस मच्छर के शरीर में प्रवेश कर जाता है। और बीमारी तब फैलती है जब वह मच्छर किसी हेल्दी व्यक्ति को काटता है, और वायरस व्यक्ति के ब्लड सर्कुलेशन के जरिये फैलता है।

एक बार जब कोई व्यक्ति डेंगू बुखार से उबर जाता है, तो वह खास वायरस से प्रतिरक्षित होता है, लेकिन दूसरे तीन प्रकार के वायरस से नहीं। अगर आप दूसरी, तीसरी या चौथी बार इनफेक्टेड होते हैं तो गंभीर डेंगू बुखार, जिसे डेंगू रक्त स्रावी बुखार के रूप में भी जाना जाता है, के विकसित होने की संभावना बढ़ जाती है।

डेंगू के लक्षण – Symptoms of Dengue in Hindi

आमतौर पर डेंगू बुखार के लक्षणों में एक साधारण बुखार होता है और किशोरों और बच्चों में इसकी आसानी से पहचान नहीं की जा सकती। डेंगू में 104 फारेनहाइट डिग्री का बुखार होता है, जिसके साथ इनमें से कम से कम दो लक्षण होते हैं :

  • सिर दर्द
  • मांसपेशियों, हड्डियों और जोड़ों में दर्द
  • जी मिचलाना
  • उल्टी लगना
  • आंखों के पीछे दर्द
  • ग्रंथियों में सूजन
  • त्वचा पर लाल चकत्ते होना

तीन प्रकार के बुखार होते हैं, जिनसे व्यक्ति को खतरा होता है, जो इस प्रकार हैं –

हल्का डेंगू बुखार, डेंगू रक्तस्रावी बुखार और डेंगू शॉक सिंड्रोम।

  • हल्का डेंगू बुखार – इसके लक्षण मच्छर के दंश के एक हफ्ते बाद देखने को मिलते हैं और इसमें गंभीर या घातक जटिलताएं शामिल हैं।
  • डेंगू रक्तस्रावी बुखार – लक्षण हल्के होते हैं, लेकिन धीरे-धीरे कुछ दिनों में गंभीर हो सकते हैं।
  • डेंगू शॉक सिंड्रोम – यह डेंगू का एक गंभीर रूप है और यहां तक कि यह मौत का कारण भी बन सकता है।

डेंगू बुखार की जांच – Dengue Fever Test in Hindi

डेंगू एक बेहद ही ख़तरनाक बीमारी है जो मच्छरों के काटने से होती है। मच्छरों के काटने से डेंगू वायरस हमारे शरीर में रक्त में प्रवाहित हो जाते हैं और ये हमारे शरीर को प्रभावित करने लग जाते हैं। यह मच्छर निडर होता है और ज्यादातर दिन के समय ही काटता है। डेंगू एक विषाणु से होने वाली बीमारी है जो एडीज़ एजिप्टी नामक संक्रमित मादा मच्छर के काटने से फैलती है। डेंगू एक तरह का वायरल बुखार है।

डेंगू बुखार का पता लगाने के लिए मुख्य तौर पर दो प्रकार के टेस्ट किए जाते हैं :

NS1: डेंगू के लक्षण सामने आने पर 5 दिनों के भीतर इस टेस्ट को करवाना सही माना जाता है। यह परीक्षण डेंगू के शुरुआती दिनों में अच्छे से परिणाम देने में सक्षम होता है, लेकिन जैसे-जैसे डेंगू के लक्षण बढ़ते जाते हैं, वैसे-वैसे इसकी जांच की प्रामाणिकता कम होने लगती है। चिकित्सकों के अनुसार इसकी जांच लक्षण दिखने के 5 दिनों के अंदर करवा लेनी चाहिए। इसमें विलंब होने पर इस जांच के परिणाम गलत भी आ सकते हैं। इससे रोगी पर भी प्रभाव पड़ सकता हैं क्योंकि उनके उपचार में देर या लापरवाही बरतना बिलकुल भी सही नहीं है। इसलिए जितना हो सके ये जांच जल्दी करवा लेनी चाहिए।

एलाइज़ा:  डेंगू के लिए की जाने वाली यह सबसे भरोसेमंद जांच है, जिसमें डेंगू का परिणाम शत प्रतिशत तक सही आता है। इसकी जांच पर चिकित्सकों का भरोसा भी ज़्यादा होता है। एलाइज़ा टेस्ट भी दो प्रकार के होते हैं, पहला आईजीएम और दूसरा आईजीजी।

आईजीएम टेस्ट डेंगू के लक्षण आने से 3-5 दिन के अंदर-अंदर करवाना ज़रूरी है। वहीं, दूसरा टेस्ट आईजीजी भी 5 से 10 दिन के अंदर करवाना अनिवार्य है। इसके परिणामों की सटीकता इसके जांच के समय पर आधारित होती है। मतलब समय रहते जांच करवाने पर डेंगू की पुष्टि प्रमाणिकता ज़्यादा होती है और इलाज भी बेहतर होता है। 

डेंगू के ज़्यादातर में डॉक्टर एनएस1 (NS1 test) टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं। इसकी अहम वजह है कि  प्रमुख यह टेस्ट शुरुआती 5 दिनों में ही करवाया जाता है, जबकि एलाइजा टेस्ट में ज़्यादा समय लगता है।

इसके अलावा कई चिकित्सक लक्षण को देखकर डेंगू की पहचान कर लेते हैं और साथ ही रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए दवाई दे देते हैं, जो भी डेंगू के इलाज़ का एक कारगर उपचार है।

डेंगू का इलाज – Treatment For Dengue in Hindi

डेंगू बुखार का कोई स्पेशल ट्रीटमेंट नहीं होता है, क्योंकि डेंगू एक वायरस है। इसमें हर समय देखभाल और साफ सफाई से मदद मिल सकती है, जो कि इस बात पर निर्भर करता है कि बीमारी कितनी गंभीर है। डेंगू बुखार के कुछ बुनियादी इलाज निम्नलिखित हैं :

औषधि Medicines : टायलेनोल या पैरासिटामोल जैसी दर्द निवारक दवाएं आमतौर पर रोगियों को दी जाती हैं। गंभीर डिहाइड्रेशन के केस में कभी-कभी आईवी ड्रिप्स दी जाती हैं।

हाइड्रेटेड रहें Hydred: यह खास है, क्योंकि हमारे शरीर के ज़्यादातर तरल पदार्थों का उल्टी और तेज बुखार के दौरान खत्म हो जाता है। तरल पदार्थों के लगातार सेवन से यह सुनिश्चित हो जाता है कि शरीर आसानी से डि – हाइड्रेट नहीं होगा।

स्वच्छता Cleaning: साफ सफाई का ज़्यादा खयाल रखना चाहिए, तब तो और भी ज्यादा जब आप सेहतमंद नहीं होते हैं। मरीज अगर रोज़ाना  नहीं नहा सकता तो स्पंज से स्नान का दूसरा तरीका चुन सकता है। नहाने के लिए इस्तेमाल  किए जा रहे पानी में डेटॉल जैसे कीटाणु नाशक तरल की कुछ बूंदें मिलाएं। यह भी सलाह दी जाती है कि अस्पताल में मरीज को देखने से पहले और बाद में डेटॉल जैसे किसी हैंड सैनिटाइजर से अपने हाथ साफ करें। कपड़ों के जर्म्स से छुटकारा पाने के लिए रोगी के कपड़े धोने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले पानी को डेटॉल से कीटाणुरहित करें।

डेंगू के घरेलू उपचार – Home Remedies for Dengue in Hindi

आप इन उपायों  के जरिए डेंगू का घरेलू उपचार कर सकते हैंः-

गिलोय Giloy: गिलोय डेंगू बुखार के लिए एक बहुत ही अहम और असरदार  जड़ी बूटी है। यह प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाए रखने और शरीर में इंफेक्शन के खिलाफ  रक्षा में मदद करते हैं। गिलोय के तने को उबाल कर इसका काढ़ा बना कर पिएँ। 2-3 ग्राम गिलोय पीस लें और इसमें 5-6 तुलसी की पत्तियाँ मिला कर एक गिलास पानी में उबाल कर काढ़ा बना लें और मरीज को पिलाएँ।

नीम Neem: नीम के पत्तों का रस पीने से प्लेटलेट्स (Platelets) और सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या में वृद्धि होती है। यह प्रतिरक्षा प्रणाली में भी सुधार करते है।

पपीता Papaya: पपीते के पत्ते डेंगू बुखार में बहुत लाभदायक होते हैं। पपीते में पोषक तत्वों और कार्बनिक यौगिकों का मिश्रण प्लेटलेट्स (Platelets) की संख्या में वृद्धि करता है।

तुलसी Tulsi: तुलसी के पत्ते डेंगू बुखार में बहुत फायदेमंद साबित होते हैं। यह शरीर से विषाक्त तत्वों को बाहर निकालते हैं और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाते हैं। 5-7 तुलसी के पत्तों को पानी में उबालकर काढ़ा बनाएं और इसमें एक चुटकी काली मिर्च मिलाकर पिएँ।

मेथी Methika: मेथी के पत्ते बुखार को कम करते हैं तथा शरीर में दर्द होने पर भी आराम पहुँचाते है। यह डेंगू बुखार के लक्षणों को शान्त करने के लिए सबसे अच्छा घरेलू उपचार है।

संतरे Orange: संतरे के रस में मौजूद एंटीओक्सीडेंट्स (Antioxidants) और विटामिन सी, डेंगू बुखार के लक्षणों के इलाज और वायरस को नष्ट करने के लिए बेहतर माना जाता है। यह प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है।

जौ Barley: जौ घास ब्लड सेल के उत्पादन को सही करके शरीर प्लेटलेट्स  (Platelets) की संख्या में वृद्धि करने की क्षमता होती है। डेंगू बुखार के समय खून में प्लेटलेट्स (Platelets) की संख्या बहुत कम हो जाती है, इसलिए इसका सेवन बहुत लाभदायक होता है। जौ घास से बना काढ़ा पिएँ या इसे सीधे ही खा सकते है।

नारियल Coconut Water:

डेंगू के बुखार में राहत पाने के लिए खूब नारियल पानी पिएँ। इसमें मौजूद जरूरी पोषक तत्व जैसे मिनरल्स और इलेक्ट्रोलाइट्स (electrolytes) शरीर को मजबूत बनाते हैं।

डेंगू Pumpkin: पके हुए कद्दू को पीस कर उसमें एक चम्मच शहद डालकर पिएँ।

चुकंदर Sugar Beets: चुकंदर के रस में अच्छी मात्रा में एंटीओक्सीडेंट्स (Antioxidants) होते हैं जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। दो से तीन चम्मच चुकंदर के रस को एक ग्लास गाजर के रस में मिलाकर पिएँ तो खून में प्लेटलेट्स (Platelets) तेजी से बढ़ते हैं।

एलोवेरा Aloe Vera: 2-3 चम्मच एलोवेरा का रस पानी में मिलाकर रोज पानी में मिलाकर पिएं। इससे बहुत सारी बीमारियों से बचा जा सकता है।

विटामिन सी Vitamin C : खाने में जितना हो सके विटामिन सी से युक्त पदार्थों का सेवन करें। विटामिन-सी आपको स्वस्थ रखने के साथ ही शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है। इसके अलावा यह किसी भी प्रकार के संक्रमण को फैलने से भी रोकता है।

 हल्दी का प्रयोग Turmaric : किसी भी रूप में खान-पान में हल्की का सेवन करें। सामान्यत: सब्जी या दाल में हल्दी का प्रयोग तो होता ही है, इसके अलावा आप चाहें तो हल्दी वाले दूध का सेवन कर सकते हैं।इसमें मौजूद एंटीबायोटिक तत्व आपके प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत कर बीमारियों से आपकी रक्षा करते हैं।

शहद Honey : शहद का इस्तेमाल करने से भी डेंगू से बचाव किया जा सकता है। इसके लिए तुलसी को पानी में उबालकर, इसमें शहद डालकर पिया जा सकता है। इसके अलावा आप काढ़ा या चाय में तुलसी का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसमें मौजूद एंटी बैक्टीरियल गुण बीमारियों से बचाव में मददगार है।

अनार Pomegranate : डेंगू बुखार में शरीर में होने वाली रक्त की कमी और कमजोरी को दूर करने के लिए, अनार का सेवन फायदेमंद होता है। इसमें मौजूद विटामिन ई, सी, ए और फोलिक एसिड और एंटी ऑक्सीडेंट बेहद लाभप्रद साबित होते हैं। यह लाल रक्त कणों के निर्माण में भी महत्वूर्ण भूमिका निभाता है, जो खून की कमी को पूरा करने में सहायक है।

बकरी का दूध Goat Milk : जी हां, डेंगू बुखार होने पर बकरी के दूध का सेवन बेहद फायदेमंद होता है। इसके लिए बकरी का कच्चा दूध दिन में दो से तीन बार थोड़ी मात्रा में पीने लाभ होता है। इसके अलावा यह खून की कमी को दूर कर, प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करता है और शरीर व जोड़ों के दर्द में लाभकारी होता है।

 सूप Soup : नॉर्मल डाइट के अलावा सूप का भी इस्तेमाल जरूर करें। यह आपके स्वाद को बरकरार रखेगा और भूख न लगने की शि‍कायत दूर करेगा। इसके अलावा दलिया का प्रयोग करना भी बेहतर होगा, यह आपको उर्जा और आपका स्टेमिना देने के साथ ही पाचन को दुरूस्त करेगा।

हर्बल टी Herbal tea : हर्बल टी का इस्तेमाल करने से शरीर के हानिकारक तत्व बाहर निकल जाते हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी वृद्धि होती है। दिन में दो से तीन बार हर्बल टी का प्रयोग जरूर करें।

इसके अलावा मच्छरों से जितना हो सके बचाव करना डेंगू से बचने का प्रमुख उपाय है। मच्छरों से बचने के लिए हर संभव सावधानी बरतें और पानी का जमाव न होने दें, क्योंकि इसमें मच्छरों के पनपने की संभावना अधिक होती है। डेंगू के लक्षण सामने आने पर या किसी भी प्रकार की अन्य समस्या होने पर दवा लेने से पूर्व डॉक्टरी परामर्श अवश्य लें।

डेंगू में आहार – Diet for Dengue in Hindi

डेंगू में खान-पान और जीवनशैली ऐसी होना चाहिएः-

  • डेंगू में मरीज का मुहँ और गला सूख जाता है। इसलिए रोगी को ताजा सूप, जूस और नारियल पानी का सेवन करना चाहिए।
  • नींबू पानी बनाकर पिएँ। नींबू का रस शरीर से गंदगी को पेशाब के द्वारा निकाल कर शरीर को स्वस्थ बनाता है।
  • हर्बल टी से बुखार में आराम मिलता है। इसमें अदरक और इलायची डालकर बनाएँ।
  • डेंगू के लक्षण आने पर ताजी सब्जियों का जूस पिएँ। इसमें गाजर, खीरा और अन्य पत्तेदार सब्जियाँ बहुत अच्छी होती हैं। ये सब्जियाँ आवश्यक विटामिन और खनिजों से परिपूर्ण है जो रोगी के प्रतिरक्षा शक्ति बढ़ाने में मदद करते हैं।
  • दलिया का सेवन करें। इसमें मौजूद उच्च फाइबर और पोषक तत्व रोगों से लड़ने के लिए पर्याप्त शक्ति देते हैं।
  • डेंगू होने पर पेट की समस्या हो जाती है। इसलिए तेलयुक्त और मसालेदार भोजन का सेवन बिल्कुल ना करें।
  • डेंगू के रोगी को प्रोटीन की बहुत आवश्यकता होती है। इसलिए रोगी को दूध और डेयरी उत्पाद (Dairy product) का सेवन जरूर करना चाहिए।
  • अधिक से अधिक पानी पिएँ।

डेंगू के दौरान परहेज – Avoid These Foods For Dengue Disease in Hindi

डेंगू में खान-पान और जीवनशैली ऐसी होना चाहिएः-

  • डेंगू में मरीज का मुहँ और गला सूख जाता है। इसलिए रोगी को ताजा सूप, जूस और नारियल पानी का सेवन करना चाहिए।
  • नींबू पानी बनाकर पिएँ। नींबू का रस शरीर से गंदगी को पेशाब के द्वारा निकाल कर शरीर को स्वस्थ बनाता है।
  • हर्बल टी से बुखार में आराम मिलता है। इसमें अदरक और इलायची डालकर बनाएँ।
  • डेंगू के लक्षण आने पर ताजी सब्जियों का जूस पिएँ। इसमें गाजर, खीरा और अन्य पत्तेदार सब्जियाँ बहुत अच्छी होती हैं। ये सब्जियाँ आवश्यक विटामिन और खनिजों से परिपूर्ण है जो रोगी के प्रतिरक्षा शक्ति बढ़ाने में मदद करते हैं।
  • दलिया का सेवन करें। इसमें मौजूद उच्च फाइबर और पोषक तत्व रोगों से लड़ने के लिए पर्याप्त शक्ति देते हैं।
  • डेंगू बुखार होने पर पेट की समस्या हो जाती है। इसलिए तेल युक्त और मसालेदार भोजन का सेवन बिल्कुल ना करें।
  • डेंगू के रोगी को प्रोटीन की बहुत जरूरत होती है। इसलिए रोगी को दूध और डेयरी उत्पाद (Dairy product) का सेवन जरूर करना चाहिए।
  • ज़्यादा से ज़्यादा पानी पिएँ।

डेंगू से बचाव – Prevention for Dengue in Hindi

डेंगू बुखार से बचाव के लिए आप खुद ही कुछ कदम उठा सकते हैं। जो हम आपको इस लेख में बता रहे हैं−

त्वचा को ढककर रखें: हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि अभी डेंगू के लिए कोई असर खास दवा मौजूद नहीं है। ऐसे में डेंगू से बचाव ही सबसे उत्तम  और कारगर तरीका  है। इसके लिए आप अपनी स्किन को ढककर रखें। इससे मच्छर के काटने की संभावना काफी कम हो जाती है। आप कोशिश करें कि पूरी बाजू की शर्ट व टीशर्ट व लंबी पैंट पहनें। इसके अलावा, डेंगू के मच्छर सुबह व शाम को ज़्यादा सतर्क और सक्रिय होते हैं, इसलिए जहां तक हो सके, इस समय बाहर जाने से बचें।

क्रीम का करें इस्तेमाल: हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, ऐसी क्रीम का इस्तेमाल करें, जो मच्छरों का आपसे दूर रखें। आप हर दिन इस क्रीम का इस्तेमाल करें। अगर आपकी स्किन सेंसेटिव है तो ऐसे में मच्छर को भगाने के लिए मॉस्किटो पैच या रोल−ऑन आदि का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

व्यक्तिगत स्वच्छता का रखें ख्याल: आपको कोई भी वायरस संक्रमित ना कर पाए, इसके लिए जरूरी है कि आप व्यक्तिगत स्वच्छता का ख्याल रखें। कीटाणुओं को खुद से दूर रखने के लिए हाईजीन व साफ−सफाई का पूरी तरह ख्याल रखें।

पानी का प्रबंधन: ठहरे हुए पानी में अक्सर डेंगू के मच्छर पनपते हैं, इसलिए पानी का सही तरह से प्रबंधन करना बेहद जरूरी है। घर में मौजूद खाली बाल्टियों को पलट दें ताकि उनमें पानी इकट्ठा ना हो सके। पानी के भंडारण के लिए उपयोग की जाने वाली बाल्टियाँ और ड्रमों को ढक कर रखें। इसके अलावा सुनिश्चित करें कि आपके प्लांटर में ओवर वाटरिंग ना हो। टूटे हुए सेप्टिक टैंकों की मरम्मत करें और यदि कोई टूटा हुआ हो तो तार की जाली के साथ वेंट पाइप को कवर करें। यदि आपके पास घर पर कूलर है, तो सुनिश्चित करें कि आप इसे नियमित रूप से साफ करते हैं। डस्टबिन को साफ रखेंय मच्छरों से बचने के लिए किसी भी गंदगी को इकट्ठा न होने दें।

कपूर: कपूर को घर में जरूर जलाएं, यह मच्छरों को दूर रखने में मदद करेगा। साथ ही मच्छरदानी के नीचे सोएं।

निष्कर्ष – Conclusion

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुमानत के मुताबिक  500,000 लोगों को हर साल डेंगू की वजह से अस्पताल में भर्ती होने की ज़रूरत पड़ती है। दुनिया के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में डेंगू के सबसे ज्यादा केस सामने आते हैं, जिनमें से भारतीय उपमहाद्वीप, दक्षिण-पूर्व एशिया, मेक्सिको, अफ्रीका, मध्य और दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों में तो बड़ी आबादी इस बुखार से प्रभावित होती है। राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एनवीबीडीसीपी) निदेशालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक भारत में 13 अक्टूबर 2019 तक डेंगू बुखार के 67,000 केस  सामने आ चुके थे।

आधी अधूरी जानकारी की वजह से हर साल हजारों लोग डेंगू बुखार की चपेट में आ जाते हैं, जिसके मद्देनजर  स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और भारत सरकार ने 16 मई को राष्ट्रीय डेंगू दिवस के रूप में मनाने का फैसला लिया, जिससे कि डेंगू से होने वाली मौतों से बचा जा सकें।

इस बीमारी को जमे हुए पानी में पैदा होने वाले मच्छर से फैलने वाले डेंगू बुखार कहा जाता है। इससे बचने के लिए कुछ सावधानियां रखना बेहद जरूरी है। डेंगू से बचाव के लिए जितना हो सके सावधानी रखें। इसके अलावा अगर आप डेंगू बुखार की चपेट में आ गए हैं, तो जितना हो सके आराम करने पर ध्यान दें और शरीर में पानी की कमी न होने दें। समय समय पर पानी लगातार पीते रहें।

इसके अलावा डेंगू के लक्षण सामने आने पर, या इस तरह की परेशानी  होने पर अपने डॉक्टर से सलाह मशविरा जरूर लेना चाहिए। दवाइयों का सेवन भी दो डॉक्टर के परामर्श के मुताबिक ही करें।

संदर्भ – References

Photo of Dr. Naresh Dang
Dr. Naresh Dang is an MD in Internal Medicine. He has special interest in the field of Diabetes, and has over two decades of professional experience in his chosen field of specialty. Dr. Dang is an expert in the managememnt of Diabetes, Hypertension and Lipids. He also provides consultation for Life Style Management.

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