अवसाद (डिप्रेशन) के करण, लक्षण, परीक्षण, और इलाज – Depression Causes, Symptoms, Daignosis, And Treatment in Hindi

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विषय सूची

उपक्षेप – Introduction

डिप्रेशन या अवसाद एक ऐसी स्तिथि है जो किसी को भी हो सकती है। बीते कुछ दिनों में इसे लेकर बहुत बहस हुई है, बहुत तर्क दिए गए हैं। सही मायनों में अवसाद के ऊपर जितना ज़्यादा लिखा जाए या बोला जाए काम होगा। बहुत सी कारणों की वजह से लोग डिप्रेशन जैसी गंभीर स्तिथि को समझ नहीं पाते। इसी वजह से कहीं ना कहीं आज भी समाज में डिप्रेशन की बात लोगों को असहज कर देती है। चूँकि डिप्रेशन को लेकर ज़्यादा बातें नहीं होती इसी वजह से डिप्रेशन जैसी स्तिथि में रहना वाला शख्स भी कभी-कभी समझ नहीं पाता। कई दफ़ा लोग डिप्रेशन या इस से ग्रसित इंसान का मज़ाक उड़ाना शुरू कर देते हैं। जैसा की हमने शुरू में कहा कि इस स्थिति कोई भी इंसान जा सकता है। डिप्रेशन से जूझ रहे शख्स के मन के अंदर की बात को समझना बहुत मुश्किल होता है। हमारी आपको सलाह यही होगी कि किसी भी शख्स या किसी भी बिमारी का मज़ाक ना बनाएं ना ही किसी को बनाने दें।

इस लेख के द्वारा हम आपसे डिप्रेशन के बारे में बात करेंगे और आप भी अपने आस पास के लोगों से इसके बारे में बात करिए। डिप्रेशन से लड़ रहा इंसान बहुत बार इसी सोच में रह जाता है कि उसके पास कोई बात करने के लिए नहीं है। लोगों के मुश्किल वक़्त में उनका साथ दीजिए, उनसे बात कीजिये, क्योंकि बात करने से ही तो बात बनती है।

अवसाद क्या है – What is Depression in Hindi

सही मायनों में डिप्रेशन का अर्थ एक खुली किताब कि तरह है। एक ऐसी किताब जिसमे से आप अपने मन मुताबिक पन्ने निकाल सकते हैं या जोड़ सकते हैं। कुछ लोग इसे चिकित्सीय बिमारी (medical illness) बताते हैं, कुछ लोग इसे मनोविज्ञान से जोड़ते हैं और कुछ इसे मानसिक विकलांगता भी कहते हैं। ये सारे लोग सही है।

अमेरिकी मनोरोग संस्था के मुताबिक, डिप्रेशन एक आम लेकिन बहुत ही गंभीर चिकित्सीय बिमारी है। ये बिमारी इंसान की महसूस करने, सोचने और कार्य करने की स्तिथि को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है। डिप्रेशन से घिरा शख्स ज़्यादातर वक़्त उदास रहता है। डिप्रेशन इंसान को एक ऐसे स्तिथि में ला देती है, जहाँ उसे किसी भी चीज़ में दिलचस्पी नहीं रहती। डिप्रेशन इंसान को भावनात्मक और शारीरिक तौर पर तोड़ देती है और घर और बाहर काम करने की शक्ति को भी नष्ट कर देती है।[1]

मनोविज्ञान के अनुसार, डिप्रेशन एक भावनात्मक स्तिथि या मनोदशा है, जिसमे इंसान आत्म-मूल्य की कमी, आपराधिक मानसिकता तथा जीवन में आनंद अनुभव करने की क्षमता में गिरावट महसूस करने लगता है। डिप्रेशन से लड़ रहे इंसान के अंदर कई लक्षण साफ़-साफ़ मौजूद होते हैं, जैसे उदास रहना, निराश रहना, नकारात्मक सोच रखना, आत्म-सम्मान की कमी, आत्म-निंदा करना, थकावट, भूक का काम या ना लगना, नींद ना आना, इत्यादि।[2]

अमेरिकी विकलांग अधिनियम का मानना है कि डिप्रेशन एक मानसिक विकलांगता है। यह एक मनोदशा विकार है जो की इंसान को रोज़-मर्रा के काम करने से रोक देती है। डिप्रेशन से गुज़र रहे इंसान को कभी-कभी किसी भी काम को करने में रूचि नहीं होती।[3]

इन सभी परिभाषाओं को पढ़ कर आपको डिप्रेशन और उस से जुड़ी कुछ चीज़ों के बारे में अच्छे से समझ आ गया होगा। एक चीज़ जो इन सारी परिभाषाओं में एक जैसी है, वो है – नकारात्मक होना। डिप्रेशन से गुज़र रहा शख्स कभी-कभी बहुत ही नकारात्मक हो जाता है। वो खुद को और खुद के महत्त्व को आंक नहीं पता। उसे खुद के ऊपर संदेह होने लगता है या अपने आस-पास के लोगों को संदेह की नज़रों से देखने लगता है।

डिप्रेशन इंसान को अंदर से खोखला कर सकती है, उसे खुद से सवाल करने के लिए मज़बूर कर सकती है और उसको अंदर ही अंदर झकझोर कर रख सकती है। इंसान के मन में एक भूचाल सा आ जाता है और इसे शांत करने के लिए वो गलत कदम भी उठा सकता है। इंसान सरे शोर बर्दाश्त कर लेता है लेकिन अपने मन के अंदर चल रहे शोर को समझना और बर्दाश्त करना बहुत मुश्किल होता है।

अगर आप या आपके जान-पहचान में कोई इंसान डिप्रेशन से ग्रसित हैं तो आपको घबराने की बिलकुल भी ज़रुरत नहीं है। अमेरिकी मनोरोग संस्था ये भी कहता है कि डिप्रेशन का इलाज़ संभव है। इस लेख में आगे हम आपको डिप्रेशन के विभिन्न इलाज़ के बारे में भी बताने वाले हैं, इसीलिए कृपया करके इसे अंत तक पढ़ें। आगे हम डिप्रेशन के प्रकार के बारे में बात करने जा रहे हैं।

डिप्रेशन के प्रकार – Types of Depression in Hindi

अगर आपका मन ज़्यादातर वक़्त उदास रहता है, आपका किसी भी काम में दिल नहीं लगता, या आपको रात में नींद ना आ रही हो तो ज़रूरी नहीं की आप डिप्रेशन के शिकार हैं। हाँ, ये सब लक्षण डिप्रेशन के ज़रूर हैं मगर हफ्ते में या महीने में एक-दो दिन बुरा हर किसी का जाता है। आज कल की गोली से भी तेज़ रफ़्तार की ज़िन्दगी में चिचिड़ापन, बात-बात पर गुस्सा आना, भूख ना लगना – आम बात है। ऐसा हर किसी के साथ होता है। अगर आपके साथ भी ऐसा होता है तो दिक्कत की कोई बात नहीं है। दिक्कत की बात तब होगी जब आपको ऐसी चीज़ें दो हफ्ते से ज़्यादा महसूस हो।

हम आपको एक बार फिर बताना चाहेंगे कि डिप्रेशन एक आम बिमारी है और इसका इलाज संभव है। आपको अगर कभी भी ऐसा लगता है कि आप डिप्रेशन के शिकार है या होने वाले हैं तो किसी अच्छे थेरेपिस्ट से सलाह ज़रूर लें।

आइये डिप्रेशन के नौ तरीके और इसके प्रभाव के बारे में समझें:

मेजर डिप्रेशन (Major Depression)

मेजर डिप्रेशन को मेजर डिप्रेसिव डिसऑर्डर (major depressive disorder) भी कहते हैं। कई रिपोर्ट ये बताते हैं कि दुनिया में बहुत से ऐसे लोग हैं, जिन्हे अपने जीवन में कम से कम एक बार मेजर डिप्रेशन से हो कर गुज़ारना पड़ा है।

मेजर डिप्रेशन से ग्रसित इंसान के अंदर इसके लक्षण पूरे दिन नज़र आते हैं। मेजर डिप्रेशन में इंसान के आस-पास की चीज़ों का उसकी स्तिथि पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता। इंसान के पास सब कुछ होते हुए भी वो इस बिमारी का शिकार हो सकता है। धन-दौलत, ऐशो आराम, दुनिया की सारी खुशियाँ भी किसी इंसान को मेजर डिप्रेशन में जाने से नहीं रोक सकती।

ऐसा भी हो सकता है कि किसी इंसान के पास कोई वजह ना हो मेजर डिप्रेशन की। लेकिन इसका मतलब ये कतई नहीं हो सकता कि उसे ये बीमारी नहीं है।

इसके लक्षण हफ़्तों तक या महीनों तक किसी इंसान को परेशान कर सकते हैं। कभी-कभी मेजर डिप्रेशन लोगों को पूरी ज़िन्दगी के लिए भी हो सकता है। मेजर डिप्रेशन का बहुत गहरा प्रभाव इंसान के काम तथा उसके संबंधों पर पड़ता है।

परसिस्टेंट डिप्रेशन (Persistent Depression)

ये डिप्रेशन का वो रूप है जो किसी इंसान को दो या दो से अधिक सालों तक परेशान करता है। हालाँकि ये मेजर डिप्रेशन जितना खतरनाक नहीं होता लेकिन फिर भी इंसान के काम करने की इच्छा और संबंधों पर नकारात्मक प्रभाव ज़रूर छोड़ता है।

परसिस्टेंट डिप्रेशन से गुज़र रहे इंसान के अंदर इसके लक्षण कभी-कभी ख़त्म हो जाते हैं और फिर कुछ वक़्त बाद वापिस आ जाते हैं। 

लम्बी बीमारी होने की वजह से कई बार इंसान इसे अपने जीवन का एक हिस्सा भी मान लेते हैं।

बाइपोलर डिसऑर्डर (Bipolar Disorder)

इस बीमारी में इंसान कई दिनों या महीनों तक कभी बहुत ज़्यादा खुश और कभी बहुत ज़्यादा उदास और दुखी रहता है। बाइपोलर डिसऑर्डर के लिए कई दवाईयाँ ली जा सकती है।

डिप्रेसिव सायकोसिस (Depressive Psychosis)

मेजर डिप्रेशन से जूझ रहा इंसान कभी-कभी वास्तविकता से बहुत दूर चला जाता है। उसे ऐसी चीज़ें दिखाई, सुनाई, या महसूस होने लगती है, जो होती भी नहीं है। ऐसे स्तिथि में इंसान डिप्रेसिव सायकोसिस बिमारी का शिकार हो जाता है। इस बिमारी के कुछ शारीरिक लक्षण भी होते हैं, जैसे कि चुपचाप बैठने में दिक्कत होना और शारीरिक गति में रुकावट होना।

प्रसवकालीन डिप्रेशन (Perinatal Depression)

इस प्रकार का डिप्रेशन गर्भवती महिलाओं में देखा जाता है। गर्भवस्था (Pregnancy) के दौरान या प्रसव के चार हफ़्तों के अंदर, इस बिमारी के लक्षण आमतौर पर नज़र आते हैं।गर्भवस्था के दौरान, शरीर के हार्मोन में कई तरीके के बदलाव होते हैं। ये बदलाव मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव छोड़ देते हैं और इसकी वजह से मूड स्विंग्स होना लाज़मी है।

प्रीमेंस्ट्रुअल डिस्फोरिक डिसऑर्डर (Premenstrual Dysphoric Disorder) 

प्रीमेंस्ट्रुअल डिस्फोरिक डिसऑर्डर पीएमएस (प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम) का एक गंभीर रूप है। पीरियड्स के दौरान नींद ना आना, बहुत ज़्यादा थकान रहना, पीएमएस के लक्षण हैं। ये सारे लक्षण पीरियड्स शुरू होने के 5 दिन के भीतर खत्म हो जाते हैं। प्रीमेंस्ट्रुअल डिस्फोरिक डिसऑर्डर में ये सारे शारीरिक कष्ट के साथ-साथ इंसान को डिप्रेशन को भी झेलना होता है। इस दौरान आत्महत्या करने का ख्याल भी मन में आ सकता है।

सीज़नल डिप्रेशन (Seasonal Depression)

यह डिप्रेशन का वो प्रकार है, जो किसी मौसम के कारण लोगों में देखा जाता है। आम तौर पर इसका प्रभाव ठण्ड के मौसम में देखा जाता है। जैसे-जैसे मौसम आगे बढ़ता है, इसके प्रभाव और भयानक हो जाते हैं। सीज़नल डिप्रेशन के कारण लोगों को आत्महत्या करने का ख्याल भी आता है। मौसम में बदलाव के कारण हमारे शरीर में भी कुछ बदलाव होने शुरू हो जाते हैं, इस वजह से सीज़नल डिप्रेशन कभी-कभी इंसान को घेर लेती है।

सीटुएशनल डिप्रेशन (Situational Depression)

कभी-कभी कुछ विशिष्ट घटना मन में ऐसा प्रभाव छोड़ देते हैं, जिसकी वजह से इंसान डिप्रेशन रुपी जाल में फँस जाता है। ये विशिष्ट घटना कुछ इस प्रकार के हो सकते हैं:

  • किसी करीबी इंसान का देहांत होना
  • किसी गंभीर या जानलेवा बीमारी का होना
  • तलाक होना   
  • किसी अपमानजनक रिश्ते में होना

ऐसी या इसके जैसी किसी और घटना में इंसान का उदास होना और लोगों से दूरी बना लेना एक आम बात है। लेकिन इन घटनाओं की वजह से ज़िन्दगी पर एक बुरा और नकारात्मक प्रभाव पड़ना सीटुएशनल डिप्रेशन कहलाता है। इसका लक्षण, ऐसी घटनाओं के 3 महीने के अंदर इंसान में देखा जाता है।

अटीपिकल डिप्रेशन (Atypical Depression)

यह एक ऐसे तरीके का डिप्रेशन है, जिसमे किसी सकारात्मक घटना की वजह से इसका प्रभाव कुछ वक़्त के लिए ख़त्म हो जाता है। इस तरीके का डिप्रेशन किसी इंसान के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। इसकी वजह ये है कि डिप्रेशन में होते हुए भी इंसान को इसका पता नहीं चलता। इसके लक्षण भी ऊपर लिखे डिप्रेशन से मिलते-जुलते होते हैं।

डिप्रेशन का निदान – Diagnosis of Depression in Hindi

डिप्रेशन से जुड़े किसी भी लक्षण के होने पर आपको डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए। डॉक्टर टेस्ट, शारीरिक परिक्षण और मरीज़ से बात करके डिप्रेशन के प्रकार को समझने कि कोशिश करते हैं। यहाँ ये भी समझा जाता है कि मरीज़ एक से ज़्यादा प्रकार के डिप्रेशन से ग्रसित है या नहीं। मरीज़ से उसके दिनचर्या, दैनिक मूड, आदतों और व्यवहार के बारे में विस्तार से पूछा जाता है।

डिप्रेशन का निदान करना एक बहुत ही मुश्किल प्रक्रिया है। डिप्रेशन से जूझ रहे व्यक्ति कभी-कभी बहुत चिड़चिड़े हो जाते हैं या फिर उत्तेजित

हो जाते हैं। लोगों के खाने की आदतों में भारी बदलाव आ जाता है, लोग बहुत उदास रहने लगते हैं, या कभी ऐसा भी होता है कि किसी को बाहरी रूप से लक्षण ना के बराबर हो मगर उसका मन पूरा अशांत हो। 

डॉक्टर किसी भी मरीज़ से बात करके ये समझने कि कोशिश करते हैं कि उन्हें किस प्रकार कि तकलीफ से हो कर गुज़रना पड़ रहा है। डॉक्टर मरीज़ से निम्न लक्षणों के बारे में पूछते हैं:

  • आपका मूड कैसा रहता है? क्या आप पूरे दिन या फिर दिन में कभी भी उदास रहते हैं
  • आप उन चीज़ों को आनंद ले पा रहे हैं, जो आपको पहले पसंद थी
  • आपका वजन पिछले एक महीने में 5% से ज़्यादा बढ़ा या घटा है
  • आप पूरे दिन में कितने घंटे सोते हैं
  • आपको दिन के किसी भी वक़्त अचानक से बेचैनी जैसी महसूस होती है
  • आप पूरे दिन या दिन के किसी भी हिस्से में थकान महसूस होती है
  • खुद को निराश या बेकार महसूस करते हो?
  • आपको ध्यान लगाने में या फिर कोई फैसला लेने में दिक्कत का सामना करना पड़ता हैं
  • आपको बार-बार आत्महत्या या खुद को नुकसान पहुँचाने का ख्याल आता है

डिप्रेशन के कुछ शारीरिक संकेत भी होते हैं, जैसे:

  • लोगों से नज़रे ना मिला पाना
  • व्यवस्तित होना
  • चीज़ों को भूलना
  • शारीरिक गतिविधि कम या ना के बराबर होना

इन चीज़ों के अलावा डॉक्टर मरीज़ के द्वारा लेने वाली दवाइयों की भी जाँच करते हैं। डॉक्टर ये भी देखते हैं कि मरीज़ शराब का सेवन करते हैं या नहीं।

अवसाद के लक्षण – Symptoms of Depression in Hindi

अभी तक हम डिप्रेशन के प्रकार और इसके निदान का तरीका समझ चुके हैं। अब हम डिप्रेशन के लक्षण के बारे में जानेंगे। डिप्रेशन के कुछ लक्षण जैसे थकान का होना हर आयु वर्ग और लिंग में देखे जा सकते हैं। मगर कुछ ऐसे लक्षण होते हैं जो सिर्फ आयु वर्ग या लिंग विशिष्ट होते हैं।

पुरुषों में अवसाद के अलग-अलग लक्षण:

एक शोध के मुताबिक, अमेरिका में करीब 9% पुरुष डिप्रेशन के शिकार हैं और 30.6% पुरुषों ने जीवन में एक बार डिप्रेशन का सामना किया है।

अवसाद के लक्षणों को समझने में पुरुष महिलाओं से कम निपुण होते हैं। ज़्यादातर पुरुष खुद की इच्छा को, पसंद को लोगों से और खुद से छिपाते हैं। ये चीज़ें कभी-कभी सीधे तौर पर अवसाद को जन्म देती हैं। डिप्रेशन के कुछ आम लक्षण के अलावा कुछ ऐसे लक्षण भी होते हैं जो ज़्यादातर पुरुषों में देखे जाते हैं। ऐसे ही कुछ 3 लक्षण इस प्रकार हैं:[7]

  • कभी-कभी डिप्रेशन पुरुषों में अवसाद शारीरिक लक्षणों के रूप में दिखाई देता है। जैसे पीठ में दर्द, लगातार सिरदर्द, नींद की समस्या, यौन रोग या पाचन संबंधी विकार। ये सारे लक्षण, आम आम उपचार के द्वारा ठीक नहीं हो पाते हैं।
  • गुस्से का ज़्यादा होना भी डिप्रेशन का एक लक्षण है। पुरुषों में ज़्यादा चिड़चिड़ापन, आलोचना सेहन ना कर पाना, छोटी-छोटी बात पर बहुत गुस्सा करना, और अपमानजनक हो जाना, गुस्सा ऐसी भयानक चीज़ों को जन्म देता है।
  • अवसाद से पीड़ित पुरुष, जोखिम से भरे खेल में खुद को शामिल करते हैं। असुरक्षित तरीके से गाड़ी चलाना, असुरक्षित यौन संबंध बनाना, शराब पीना, नशीले पदार्थों का उपयोग करना, जुआ खेलना भी अवसाद के लक्षणों में शामिल है।

महिलाओं में अवसाद के अलग-अलग लक्षण:

पुरुषों की तुलना में महिलाओं का डिप्रेशन से प्रभावित होने की संभावना लगभग दोगुनी होती हैं। औरतों को अपने जीवन में कई तरीके की जिम्मेदारी का सामना करना पड़ता है। उन्हें कई किरदारों को निभाना पड़ता है। महिलाएँ शारीरिक और हार्मोनल बदलाव से हो कर भी गुज़रती हैं। इन सभी चीज़ों के बीच में डिप्रेशन का होना आज आम बात हो गया है।

डिप्रेशन के प्रकार समझते वक़्त हमने प्रसवकालीन डिप्रेशन और प्रीमेंस्ट्रुअल डिस्फोरिक डिसऑर्डर के बारे में समझा था। ये ऐसे दो डिप्रेशन के प्रकार हैं जो सिर्फ महिलाओं को ही होता है। प्रसवकालीन डिप्रेशन जहाँ गर्भावस्था के दौरान या उसके बाद होता है, वहीँ प्रीमेंस्ट्रुअल डिस्फोरिक डिसऑर्डर पीरियड्स के दौरान देखा जा सकता हैं। प्रीमेंस्ट्रुअल डिस्फोरिक डिसऑर्डर इतना खतरनाक है कि इसके दौरान आत्महत्या जैसा ख्याल मन में लगातार आता रहता है।

बच्चों को डिप्रेशन जैसी गंभीर बीमारी होना भी आज संभव है। बच्चे कई सारे भावनात्मक बदलाव से हो कर रोज़ गुज़रते हैं। कई बार ये बदलाव उन्हें समझ में नहीं आते।

बच्चों में अवसाद के अलग-अलग लक्षण:

बच्चों में डिप्रेशन के लक्षण आम लक्षण के जैसे ही होते हैं। मगर इन लक्षणों का प्रभाव उन पर किसी वयस्क से ज़्यादा होते हैं। कुछ लक्षण जो बच्चों में डिप्रेशन के वक़्त देखे जाते हैं, वो हैं:

  • बहुत ज़्यादा गुस्सा आना
  • उदास रहना
  • लोगों से बातें ना करना
  • सोने और खाने पैटर्न में बदलाव
  • बहुत ज़्यादा रोना
  • आत्महत्या की बातें करना या सोचना

अगर आप अपने बच्चों में ऐसे लक्षण देखें तो तुरंत उनसे बात करें और उनकी दिक्कतों को समझें।

बुजुर्गों में अवसाद के अलग-अलग लक्षण

बुजुर्गों में डिप्रेशन का होना सामान्य बात तो हैं मगर साधारण बात नहीं है। बुजुर्गों में डिप्रेशन के लक्षण एक जैसे नहीं होते। कई बुजुर्गों का डिप्रेशन का इलाज भी सही से नहीं हो पता। बुजुर्गों में डिप्रेशन वयस्क से बहुत ही अलग होता है। ज़्यादातर वक़्त ये कुछ और बिमारी की वजह से या दवाइयों की वजह से होता है।

बुजुर्गों में देखे जाने वाले कुछ आम डिप्रेशन के लक्षण इस प्रकार हैं:

  • नींद का ना आना
  • शारीरिक तकलीफ का बढ़ना
  • दवाइयों का असर कम हो जाना
  • आत्महत्या का सोचना
  • शराब और ड्रग्स का उपयोग करना

अवसाद के विभिन्न कारण – Causes of Depression in Hindi

जैसा कि हमने आपको शुरू में बताया कि डिप्रेशन एक आम बीमारी है और इसका इलाज संभव है। आगे हम ये समझेंगे कि असल में डिप्रेशन होता क्यों है?

डिप्रेशन होने के कई कारण होते हैं। आइये ऐसे ही कुछ कारणों को समझें:

  • किसी एक वक़्त पर शारीरिक, यौन या भावनात्मक शोषण जीवन में बाद में जा कर डिप्रेशन या अवसाद को जन्म दे सकते हैं।
  • कुछ ऐसी दवाइयाँ होती हैं जो कि डिप्रेशन के खतरे को बढ़ा देती हैं।
  • परिवार में या किसी दोस्त से लड़ाई-झगड़ा होने पर भी इंसान डिप्रेशन में जा सकता है।
  • किसी करीबी इंसान कि मृत्यु, डिप्रेशन का बहुत बड़ा कारण होती है।
  • अगर परिवार में किसी डिप्रेशन था या है तो भी डिप्रेशन का होना आम बात है।
  • कुछ निजी दिक्कतों की वजह से भी डिप्रेशन इंसान को घेर लेती है।
  • शराब या ड्रग्स लेने से भी डिप्रेशन का खतरा बढ़ जाता है।
  • हार्मोनल बदलाव भी डिप्रेशन का एक बहुत बड़ा कारण होता है।
  • कभी कभी एक जानलेवा बीमारी भी डिप्रेशन को जन्म दे देती है।
  • पैसों की तंगी, बेरोज़गारी, तलाक का होना, और भी ऐसी कई चीज़ें जो किसी इंसान की ज़िन्दगी का हिस्सा हो, अगर वो ना रहे तो भी डिप्रेशन जैसी बीमारी हो सकती है।
  • सोशल मीडिया भी डिप्रेशन को किसी शख्स के अंदर पहुँचाने में एक बखूबी भूमिका निभाता है। सोशल मीडिया पर फैलने वाली नकारत्मक चीज़ों से आज कोई नहीं छिपा है। चाहे बच्चा हो, पुरुष हो, औरत हो या बुजुर्ग हो हर कोई इसके लपेटे में आ ही जाता है। जहाँ लाइक्स और कमैंट्स से किसी को तौला जाता हो, वहाँ अगर कहीं भी इसकी कमी हुई तो दिक्कत आना लाज़मी है। सोशल मीडिया पर ट्रॉल्लिंग से कई बार लोग डिप्रेशन का शिकार हुए हैं और होते रहते हैं।

डिप्रेशन के जोखिम कारक – Risk Factors of Depression in Hindi

डिप्रेशन जहाँ एक बहुत ही आम बीमारी हैं वहीँ ये एक बहुत ही खतरनाक बीमारी भी है। ज़्यादातर बीमारियाँ ऐसी होती हैं जिनका पता लगना आसान होता है, जिनको ठीक करना आसान होता है। डिप्रेशन का पता लगाना मुश्किल तो होता ही है साथ ही साथ अगर किसी को एक बार डिप्रेशन हो गया तो दोबारा नहीं होगा इसकी गारंटी बिलकुल भी नहीं है।

आइये डिप्रेशन के कुछ जोखिम कारकों को समझाते हैं।

  • डिप्रेशन एक अनुवांशिकी (genetical) बिमारी है। इसका मतलब यही है कि अगर आपके परिवार में कभी किसी को डिप्रेशन कि शिकायत रही है तो आपको डिप्रेशन के होने की संभावना बढ़ जाती है।
  • किसी की मौत या किसी को खोना हमेशा भयानक होता है। जिसने जिसको खोया उसका दर्द शायद ही कोई समझ पता है। ये एक बहुत बड़ी वजह हैं किसी के डिप्रेशन में जाने की। लोग खुद को किसी लायक नहीं समझने लगते हैं और फिर ये चीज़ आत्महत्या करने पर लोगों को मज़बूर कर देती है।
  • लड़ाई-झगड़ा भी डिप्रेशन के रस्ते पर ला कर छोड़ने में सक्षम होता है। जब आप किसी करीबी इंसान से लड़ लेते हैं तो इसका दर्द आपको कुछ गलत कदम उठाने के लिए मज़बूर कर ही सकता है। कई बार लोग इस चक्कर में गलत कदम उठा भी लेते हैं।
  • ज़िन्दगी में किसी वक़्त पर शारीरिक, यौन या भावनात्मक शोषण किसी भी वक़्त इंसान के अंदर भूचाल लाने में काफी होते हैं। कई बार कई डिप्रेशन से जूझ रहे लोगों ने शारीरिक, यौन या भावनात्मक शोषण को डिप्रेशन का एक बहुत बड़ा करक माना है।
  • ज़िन्दगी का दूसरा नाम होता है उतार-चढ़ाव, बिना इसके ज़िन्दगी की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। मगर हर कोई ये उतर-चढ़ाव को संभाल नहीं पता। जब कोई इन चीज़ों को संभल नहीं पता तो गिर जाता है और डिप्रेशन रुपी चोट उसे लग जाती है।

अवसाद के इलाज के तरीके – Depression Treatment in Hindi

डिप्रेशन जैसी बीमारी के साथ कोई नहीं रहना चाहता। जब डिप्रेशन का इलाज संभव हो तो किसी को इसके साथ रहना भी नहीं चाहिए। एक बार अगर कोई डिप्रेशन मुक्त हो गया तो उसके जीवन में सुधर होने की उम्मीद बढ़ जाती है। डिप्रेशन का इलाज निम्न तरीकों से हो सकता हैं:

● डिप्रेशन के कारणों में से कुछ ऐसे कारण होते हैं, जिन्हे दवाई से ठीक किया जा सकता है। अगर किसी को बहुत चिंता सताते रहती है तो उसे इसके लिए दवाई दी जा सकती है। अवसादविरोधी दवाइयों से डिप्रेशन को सीधे तरीके से ठीक किया जा सकता है। मनोरोग प्रतिरोधी दवाइयाँ भी डिप्रेशन से लड़ने में मदद करती हैं। ये सारी दवाइयाँ किसी डॉक्टर के कहने पर ही लेनी चाहिए।

● मनोचिकित्सा के द्वारा भी डिप्रेशन से लड़ा जा सकता है। अगर आपको या आपके किसी जान-पहचान वाले इंसान को डिप्रेशन हैं तो आपको किसी अच्छे मनोचिकित्सक से बात करनी चाहिए।

● सीजनल अफ्फेक्टिवे डिसऑर्डर जैसे डिप्रेशन में लाइट थेरेपी काम आती है। इसमें इंसान को सफ़ेद रौशनी में रखा जाता है। ये करने से रोगी का मूड सुधर जाता है और डिप्रेशन के लक्षण भी कम हो जाते हैं।

● व्यायाम करने से हमारे शरीर में एंडोर्फिन हॉर्मोन का उत्पादन बढ़ जाता है। एंडोर्फिन हमारे मूड को अच्छा करने में मदद करता है।

● शराब, सिगरेट और ड्रग्स लेने से डिप्रेशन का होना बहुत बढ़ जाता है। अगर किसी को डिप्रेशन है और वो इन चीज़ों का सेवन करते हैं तो उन्हें इसे तुरंत छोड़ देना चाहिए। इन चीज़ों का शरीर पर और भी गलत प्रभाव पड़ता है।

● बहुत बार लोग किसी इंसान को या किसी काम को ‘ना’ नहीं बोल पाते। इस चक्कर में वो खुद को तनाव में डाल देते हैं। एक-दो बार अगर ऐसा हो तो कोई बात नहीं। मगर अगर ये चीज़ बार बार हो तो इसका नकारात्मक प्रभाव हमारे दिमाग पर पड़ता है। जिसकी वजह से डिप्रेशन होना एक बहुत ही आम बात है। अपने ज़िन्दगी में सीमा बनाना शुरू करिये और इसके अंदर ज़्यादा लोगों को आने मत दीजिये।

● सबसे बड़ी चीज़ हैं खुद का ख्याल रखना। आपको पता होता हैं कि आपको किस चीज़ से तकलीफ होगी और कौन सी चीज़ आपको ख़ुशी देगी। ज़्यादातर वो ही काम करिये जिसमे आपका मन हो और जिसमे आप खुश रह सकें।

निष्कर्ष – Conclusion

डिप्रेशन एक बहुत बड़ी बीमारी है और बहुत आम बीमारी भी है। इसका इलाज संभव है। अगर आपको या आपके किसी भी जानने वाले को डिप्रेशन से जुड़ी कोई भी दिक्कत हो तो तुरंत किसी डॉक्टर की सलाह लें।उपरोक्त लेख में हमने आपको डिप्रेशन से जुड़ी सारी जानकारी देने की कोशिश करी है। आखिरी में हमने आपको ये भी बताया है कि डिप्रेशन का इलाज कैसे किया जाता है।

डिप्रेशन के कुछ शुरुआती लक्षण होते हैं। ज़रूरी है कि आप इनको समझे और तुरंत ही इन पर काम करें। आप अपने सबसे बड़े शुभचिंतक बनने की कोशिश करें। खुद से बात करें, खुद को समझने की कोशिश करें। अगर आप खुद को समझ जाएंगे तो बहार की कोई भी चीज़ आपको परेशान या विचलित नहीं कर पाएगी।

जानिए डिप्रेशन के कारण, लक्षण, निदान, और इलाज के बारे में डॉक्टर प्रमोद शंकर सोनी के एक एक्सक्लूसिव वार्तालाप में zotezo के साथ

और पढ़ें: सूर्य नमस्कार के नियम, फायदे, और करने का तरीका

संदर्भ – References

1. American Psychiatric Association on Depression [1]

2. Help Guide on Depression in Men [2]

3. Christina Gregory on Depression in Women [3]

Pramod Shanker Soni
Dr. Pramod Shankar Soni is a renowned homeopathic doctor and author. He completed his studies at The British Institute of Homeopathy, London. Apart from Homeopathy, he has also done Professional Counseling from Harvard Medical School, U.S. He has also received considerable appreciation for work in the fields of mental health and homeopathy. Not only this, Doctor Soni has also been awarded the title of "Mental Health Ambassador". He has also written 2 best-selling books on Mental Health, "Thank you depression" and "Relief from depression".

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