हार्ट अटैक (दिल का दौरा) के प्रकार, लक्षण, कारण, परीक्षण, बचाव और इलाज – Heart Attack Types, Symptoms, Causes, Diagnosis, And Treatment in Hindi

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उपक्षेप – Introduction

भारत में आज सबसे ज़्यादा मौत दिल से जुड़ी बिमारियों के कारण होती है। 2015 में लान्सेंट द्वारा किये गए एक अध्ययन में ये बात सामने आई कि दिल से जुड़ी बिमारियों से भारत में उस साल 21 लाख लोगों की मौत हुई थी। ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज द्वारा 2016 में की गई एक अध्ययन के अनुसार, उस साल पूरी दुनिया में दिल से जुड़ी बिमारियों के कारण 1.73 करोड़ मौतें हुईं। इन 1.73 करोड़ में से 17 लाख लोग भारत से थे। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में आज दिल से जुड़ी बिमारियों के कारण होने वाली मौतों की संख्या 1.7 करोड़ है जिसमे से 30 लाख लोगों की मौत सिर्फ दिल का दौरा पड़ने से हो रही है। यह आंकड़ा साल दर साल बढ़ते जा रहा है।

लान्सेंट द्वारा की गई एक और अध्ययन के अनुसार ग्रामीण भारत में आज दिल से जुड़ी बिमारियों के मरीज़ शहरी इलाकों से ज़्यादा है। चूँकि ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधा आज भी शहरों के मुताबिक कमजोर है इसलिए दिल से जुड़ी बिमारियों के कारण होने वाली मौतों की संख्या भी वहाँ ज़्यादा है।इसी अध्ययन में ये भी पाया गया कि भारत में 55 साल की उम्र से कम करीब 40% लोगों को दिल के दौरे की शिकायत रहती है। इसी समूह के 50% लोगों को दिल का दौरा या जटिलताओं का सामना भी करना पड़ता है।

इस लेख के द्वारा हमने हार्ट अटैक के प्रकार, लक्षण, कारण, परीक्षण, बचाव और इलाज के बारे में आपको जानकारी देने की कोशिश की है। हार्ट अटैक या दिल का दौरा धीरे-धीरे भारत में आम बीमारी में तब्दील होती जा रही है। इसी वजह से आपको इसकी जानकारी होनी ज़रूरी है।

हार्ट अटैक क्या है – What is Heart Attack in Hindi

सबसे पहले हम ये समझते हैं कि आखिर में हार्ट अटैक या दिल का दौरा क्या होता है? जब किसी इंसान के दिल में पहुँचने वाले खून के प्रवाह में किसी तरह की रुकावट आ जाती है और दिल को ज़रुरत के हिसाब से ऑक्सीजन नहीं मिल पाता, तो ऐसी स्थिति में इंसान को दिल का दौरा पड़ जाता है। इस रुकावट के कारण दिल में मौजूद मांसपेशियों को सही रूप से काम करने में दिक्कत होने लगती है। दिल तक खून पहुँचाने वाली धमनी (Artery) के अंदर की दीवारों पर चर्बी, कोलेस्ट्रॉल और अन्य पदार्थ कई बार जमा हो जाते हैं। कुछ वक़्त बाद ये चीज़ें धमनी के अंदर एक मोटी परत बना लेते हैं और इसी वजह से धमनी को दिल तक खून पहुँचाने में दिक्कत होने लगती है। कई बार इन परत धमनी के अंदर ही टूट जाते हैं, इसकी वजह से भी खून के आवा-जाही पर फ़र्क़ पड़ जाता है, साथ-ही-साथ दिल में मौजूद मांसपेशियों को भी नुकसान पहुँचता है। दिल में खून की कमी होने के कारण दिल में मौजूद उत्तकों को भारी नुकसान पहुँचता है। इसकी वजह से कुछ उत्तक पूर्ण रूप से खत्म भी हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में अगर इंसान दिल के दौरे से बच भी जाए फिर भी दिल के मांसपेशियाँ हमेशा के लिए क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। हार्ट अटैक को मायोकार्डियल इन्फार्क्शन (Myocardial Infarction) भी कहते हैं।

कुछ लोगों को दिल का दौरा पड़ने पर कुछ संकेत नज़र आते हैं। जबकि कुछ लोगों के शरीर में हार्ट अटैक के दौरान कोई भी संकेत नज़र नहीं आते। कुछ ऐसे संकेत जिनसे हार्ट अटैक को समझा जा सकता है, वो हैं:

  • सीने में दर्द
  • शरीर के ऊपरी भाग में दर्द
  • बहुत ज़्यादा पसीना आना
  • घबराहट होना
  • थकान का महसूस होना
  • सांस लेने में दिक्कत होना

दिल का दौरा पड़ना एक बेहद ही खतरनाक स्थिति है। दिल का दौरा पड़ने पर अगर इंसान को सही चिकित्सा उपचार सही वक़्त पर मिल जाए तो खतरा काम हो जाता है। अगर सही उपचार सही वक़्त पर नहीं मिला तो दिल का दौरा पड़ने से लोगों की जान भी चली जाती है।

भारत के ग्रामीण इलाकों में दिल का दौरा पड़ने से इतनी मौत इसी वजह से होती है। ज़्यादातर वक़्त लोग किसी को दिल का दौरा पड़ा है, ये समझ नहीं पाते। अगर किसी को ये समझ भी आ जाता है तो या तो सही उपचार नहीं मिलता या फिर सही उपचार मिलने में बहुत वक़्त लग जाता है।

हार्ट अटैक के प्रकार – Types of Heart Attack in Hindi

हमारे शरीर में मौजूद दिल, शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है। दिल बिना रुके अपना काम करता रहता है और चूँकि दिल काम करता रहता है इसलिए हम भी काम करते रहते हैं। अगर दिल को हल्की सी भी क्षति पहुँच जाए तो हमारे शरीर के लिए वो बेहद ही खतरनाक साबित हो सकता है। इसी वजह से हार्ट अटैक या दिल का दौरा पढ़ना इतनी खतरनाक बीमारी है।

इस अनुभाग में हम हार्ट अटैक के प्रकार को समझने की कोशिश करेंगे। दिल तक खून को पहुँचाने वाली धमनी एक विशेष तरीके की धमनी होती है और इसे कोरोनरी धमनी भी कहते हैं। दिल का दौरा कोरोनरी धमनी में होने वाली निम्न कुछ दिक्कतों के कारण पड़ता है। इन्हे कोरोनरी आर्टरी डिजीज (Coronary Artery डिजीज) भी कहते हैं।

  • स्टेमी (STEMI) – इस तरीके का हार्ट अटैक बहुत ही खतरनाक होता है और रोगी को तुरंत इलाज की ज़रुरत पड़ती है। ये अटैक कोरोनरी धमनी के पूरे तरीके से जाम हो जाने के कारण पड़ता है। इस वजह से खून दिल के एक बहुत बड़े हिस्से तक नहीं पहुँच पाता जिसकी वजह से दिल में मौजूद मांसपेशियों को नुकसान होना शुरू हो जाता है। इसके कारण दिल काम करना बंद कर देता है। 
  • एनस्टेमी (NSTEMI) – इस तरीके के हार्ट अटैक की स्थिति तब पैदा होती है जब कोरोनरी धमनी आंशिक रूप से जाम हो जाती है जिसकी वजह से खून के बहाव पर फ़र्क़ पड़ जाता है। हालाँकि एनस्टेमी हार्ट अटैक स्टेमी हार्ट अटैक जितना खतरनाक नहीं होता लेकिन एनस्टेमी हार्ट अटैक से भी दिल को काफी नुकसान पहुँच सकता है। 
  • कोरोनरी आर्टरी स्पाज्म (Coronary Artery Spasm) – इसे ख़ामोशी भरा हार्ट अटैक भी कहा जा सकता है। इस तरीके का हार्ट अटैक तब आता है, जब दिल से जुड़ी धमनी किसी वजह से सिकुड़ जाए जिसकी वजह से खून का बहाव या तो रुक जाता है या कम हो जाता है। इस हार्ट अटैक के लक्षण बाकि दो तरीके के हार्ट अटैक जितने खतरनाक नहीं होते। इसकी वजह से दिल को कोई स्थाई क्षति भी नहीं पहुँचती। कभी-कभी लोग इस तरीके के हार्ट अटैक को समझ नहीं पाते और इसे हल्के में ले लेते हैं। लेकिन एक बार किसी को कोरोनरी आर्टरी स्पाज्म जैसा हार्ट अटैक आ गया तो बाँकी हार्ट अटैक आने का खतरा बढ़ जाता है।

हार्ट अटैक के लक्षण – Symptoms of Heart Attack in Hindi

हार्ट अटैक को समझने के लिए उसके लक्षण को समझना ज़रूरी है। कुछ आम लक्षण जो दिल का दौरा पड़ने पर किसी इंसान को महसूस हो सकते हैं, वो कुछ इस प्रकार है :

  • छाती या हाथ में दबाव, खिंचाव, या दर्द का महसूस होना। ये अनुभूति धीरे-धीरे शरीर के दूसरे हिस्सों में भी फ़ैल जाती है। 
  • घबराहट महसूस होना, बदहजमी, पेट में जलन, या फिर पेट में दर्द का महसूस होना
  • सांस लेने में कठिनाई महसूस होना
  • ज़्यादा पसीना आना
  • अचानक से थकान जैसा महसूस होना
  • अचानक से चक्कर आना

हर किसी को दिल का दौरा पड़ने पर एक जैसे लक्षण महसूस नहीं होते। कभी-कभी लोगों में लक्षणों की गंभीरता भी कम ज़्यादा हो जाती है। जैसे कुछ लोगों को कम दर्द महसूस होता है वहीं कुछ लोगों को बहुत ज़्यादा दर्द महसूस होता है। कभी-कभी लोगों के शरीर में दिल का दौरा पड़ने के दौरान कोई भी लक्षण नज़र नहीं आते। वहीं कुछ लोगों को दिल का दौरा पड़ने की शुरुआत ही धड़कनों के रुकने से होती है। हार्ट अटैक से जुड़े जितने ज़्यादा लक्षण शरीर में दिख जाए हार्ट अटैक से उतना ज़्यादा खतरा शरीर को होता है।

कभी-कभी कुछ लोगों को अचानक से दिल का दौरा पड़ जाता है। लेकिन ज़्यदातर लोगों को हार्ट अटैक के लक्षण शरीर में कुछ घंटे, दिन या हफ़्तों पहले दिखने शुरू हो जाते हैं। हार्ट अटैक के शुरूआती लक्षणों के तौर पर इंसान को सीने में दर्द या सीने में दबाव महसूस होता है। हार्ट अटैक के लक्षण के तौर पर सीने में महसूस होने वाले दबाव को एनजाइना (Angina) कहते हैं। सीने में दर्द या दबाव किसी शारीरिक गतिविधि के कारण शुरू हो सकती है और ये आराम करने से ठीक हो जाती है। दिल में खून का बहाव अगर अस्थाई रूप से रुक जाता है तो इसकी वजह से लोगों को एनजाइना की शिकायत होती है।

महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण पुरुषों से थोड़े अलग होते हैं। महिलाओं को सीने में दर्द की तीव्रता पुरुषों से कम होती है। महिलाओं को शुरुआती लक्षण के तौर पर सीने में दबाव या खिचाव ज़्यादा महसूस होता है। महिलाओं को बिना सीने में दर्द हुए भी हार्ट अटैक आने का खतरा रहता है। हार्ट अटैक के महिलाओं में दिखने वाले लक्षण कुछ इस प्रकार हैं :

  • गर्दन, जबड़े, कंधे, ऊपरी पीठ या पेट में असहजता का महसूस होना 
  • सांस लेने में कठिनाई महसूस होना
  • एक या दोनों हाथ में दर्द महसूस होना
  • जी मचलना या उल्टी जैसा महसूस होना
  • ज़्यादा पसीना आना
  • अचानक से चक्कर आना
  • अचानक से थकान जैसा महसूस होना
  • बदहजमी महसूस होना

हार्ट अटैक के कारण – Causes of Heart Attack in Hindi

हमारे दिल को हर वक़्त ऑक्सीजन युक्त रक्त की ज़रुरत रहती है। इस ज़रुरत को पूरा करने का काम कोरोनरी धमनी का होता है। अगर इस धमनी में कोरोनरी आर्टरी डिजीज हो जाए तो ये आकार में सिकुड़ जाती है। इसकी वजह से खून के बहाव पर फ़र्क़ पड़ता है और धीरे-धीरे खून का बहाव खत्म हो जाता है। खून के खत्म होने के कारण दिल का दौरा पड़ता है।

चर्बी, कैल्शियम, प्रोटीन और कुछ कोशिकाएँ मिल कर कोरोनरी धमनियों के अंदर एक परत बना देते हैं। ये परत बाहर से सख्त और अंदर से मुलायम होती है। जब ये परत ठोस हो जाती है तो ये अपने आप टूटना शुरू कर देती है। जिस भी हिस्से पर ये टूटते हैं, उस हिस्से पर प्लेटलेट्स पहुँच कर खून जाम कर देते हैं। अगर ये कोरोनरी धमनी के ठीक अंदर होता है तो ये धमनी अपना काम ठीक से नहीं कर पाती। इसकी वजह से दिल में मौजूद मांसपेशियों को ऑक्सीजन युक्त रक्त नहीं मिल पाता। ऑक्सीजन युक्त रक्त के अनुपस्थिति में ये मांसपेशियाँ नष्ट होना शुरू हो जाती है। इसकी वजह से दिल को और अंत में शरीर को स्थायी रूप से नुकसान पहुँचता है।

कभी-कभी स्पाज्म नामक बीमारी भी हार्ट अटैक का कारण बन जाती है। कोरोनरी स्पाज्म से खुद को बचाने के लिए धमनियाँ खुद ही दिल के अंदर मौजूद मांसपेशियों तक खून पहुँचाना बंद कर देती है। ये तब भी हो सकता है जब इंसान आराम कर रहा हो या जब उसे कोरोनरी आर्टरी से जुड़ी कोई खतरनाक बीमारी भी ना हो।

हमारे शरीर में मौजूद सारी कोरोनरी आर्टरी, दिल के किसी ना किसी हिस्से तक खून ज़रूर पहुँचाती है। किसी भी धमनी में होने वाली दिक्कत का असर दिल में मौजूद मांसपेशियों पर कितना पड़ेगा ये दो बातों पर निर्भर करता है। पहला कि जो धमनी पूरे तरीके से जाम हो चुकी है, वो दिल के कितने हिस्से तक खून पहुँचाती है और दूसरा कि एक नुकसान पहुँचने के कितने देर के अंदर इंसान को इलाज मुहैया कराया जाता है।

हमारे शरीर में मौजूद सारी कोरोनरी आर्टरी, दिल के किसी ना किसी हिस्से तक खून ज़रूर पहुँचाती है। किसी भी धमनी में होने वाली दिक्कत का असर दिल में मौजूद मांसपेशियों पर कितना पड़ेगा ये दो बातों पर निर्भर करता है। पहला कि जो धमनी पूरे तरीके से जाम हो चुकी है, वो दिल के कितने हिस्से तक खून पहुँचाती है और दूसरा कि एक नुकसान पहुँचने के कितने देर के अंदर इंसान को इलाज मुहैया कराया जाता है।

दिल के अंदर मौजूद मांसपेशियाँ, हार्ट अटैक के बाद खुद ही स्वस्थ होना शुरू कर देती हैं। इस प्रक्रिया में करीब 8 हफ़्तों का समय लगता है। लेकिन नयी कोशिकाएँ पहले की तरह काम करने में सक्षम नहीं होती। इसी वजह से हार्ट अटैक के बाद दिल पहले की तरह काम करने में असमर्थ होता है।

दिल का दौरा पड़ने पर परीक्षण – Diagnosis of Heart Attack in Hindi

अगर आपको हार्ट अटैक से जुड़ी कोई भी लक्षण दिखते हैं तो डॉक्टर को ज़रूर दिखाएँ। डॉक्टर आपके लक्षण को देख कर ये समझेंगे कि आपको हार्ट अटैक का खतरा है या नहीं। 

आपातकालीन स्थिति में डॉक्टर ब्लड प्रेशर, नाड़ी और तापमान को नापेंगे। इसके बाद डॉक्टर आपके शरीर को एक हृदय यंत्र से जोड़ कर कुछ टेस्ट करेंगे। इन टेस्ट से ही पाता चलता है कि किसी को हार्ट अटैक जैसी दिक्कत सच में है या नहीं।

दिल का दौरा पड़ने पर होने वाले परीक्षण, कुछ इस प्रकार हैं :

  • इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (Electrocardiogram): इस परिक्षण में कुछ इलेक्ट्रोड्स को सीने के आस-पास लगाया जाता है। इन इलेक्ट्रोड्स के सहारे विद्युत सिग्नल को दिल के भीतर से गुज़ारा जाता है और इन सिग्नल्स की गतिविधियों को देखा जाता है। इन सिग्नल्स को वेव के रूप में किसी कागज़ पर या मशीन पर रिकॉर्ड किया जाता है। हार्ट अटैक की स्थिति में दिल के भीतर से ये सिग्नल आम रूप से नहीं निकल पाते और इसी से हार्ट अटैक का पाता लगाया जाता है।
  • खून जाँच: हार्ट अटैक के बाद खून में दिल में मौजूद कुछ प्रोटीन धीरे-धीरे घुलने लग जाता है। खून जाँच में खून के अंदर इस प्रोटीन की उपस्थिति को देखा जाता है। अगर जांच में प्रोटीन दिखा तो हार्ट अटैक आया था और अगर नहीं दिखा तो इसका मतलब है कि हार्ट अटैक नहीं आया था।

कुछ और टेस्ट जिसका इस्तेमाल डॉक्टर हार्ट अटैक का पाता लगाने के लिए करते हैं, वो इस प्रकार है :

  • सीने का एक्स-रे: एक्स-रे से दिल के आकार और धमनियों की जांच हो जाती है। डॉक्टर एक्स-रे को देख कर दिल के अंदर या आस पास किसी असामान्यता का पाता लगा लेते हैं। 
  • इकोकार्डियोग्राम (Echocardiogram): इस टेस्ट में अल्ट्रासाउंड के द्वारा दिल की एक तस्वीर को बना कर, उसकी जांच की जाती है। इन तस्वीरों से डॉक्टर दिल के खून फेकने के तरीके और क्षमता को देखने की कोशिश करते हैं। इस दौरान अगर दिल के किसी हिस्से में कोई दिक्कत या क्षति हो तो उसका पाता लगा लिया जाता है। 
  • एंजियोग्राम (Angiogram): इस जांच में, धमनियों के अंदर एक डाई को इंजेक्शन के सहारे डाला जाता है। इसके बाद धमनियों का एक्स-रे करके धमनियों के अंदर मौजूद रुकावट का पाता लगाया जाता है।
  • कार्डियक सीटी स्कैन या एमआरआई: इन टेस्ट के द्वारा भी सीने और दिल की तस्वीर को बना कर उसके अंदर किसी दिक्कत के होने का पाता लगाया जाता है।

दिल का दौरा से बचाव – Prevention From Heart Attack in Hindi

बहुत सी ऐसी चीज़ें जिसे करके आप खुद को हार्ट अटैक के खतरे से बचा सकते हैं। इन्ही में से कुछ तरीकों को हमने नीचे शामिल किया है।

  • रक्तचाप को नियंत्रण में रखें: उच्च रक्तचाप होने से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। ज़रूरी है कि आप समय-समय पर अपना रक्तचाप की जाँच करते रहें। अगर आपको उच्च रक्तचाप की शिकायत है तो उस पर नियंत्रण करने की कोशिश करें। आप अपने जीवनशैली में बदलाव ला कर खुद को उच्च रक्तचाप से होने वाले नुकसान से बचा सकते हैं। 
  • कोलेस्ट्रॉल और चर्बी को नियंत्रण में रखें: कोलेस्ट्रॉल और चर्बी ऐसी चीज़ है जो की धमनियों से जुड़ी बिमारियों का खतरा बढ़ा देती हैं और इन्ही बिमारियों की वजह से दिल का दौरा पड़ता है। जीवनशैली में बदलाव और ज़रुरत पड़ने पर दवाइयों के सेवन से कोलेस्ट्रॉल और चर्बी को नियंत्रित किया जा सकता है। 
  • स्वस्थ वजन बनाए रखें: ज़्यादा वजन होने से कई बिमारियों का खतरा होता है और हार्ट अटैक उन्ही खतरों में से एक है। वजन पर नियंत्रण बनाए रखने से हार्ट अटैक का खतरा खत्म हो सकता है। 
  • स्वस्थ आहार खाएं: जैसा हम कहते हैं, हम वैसा ही बन जाते हैं। स्वस्थ खाना खाने से हमारा शरीर कई खतरनाक बिमारियों से खुद को बचा लेता है। स्वस्थ खाने से हम अपने रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रण में रख सकते हैं। साथ ही साथ वजन पर भी नियंत्रण बनाए रख सकते हैं। 
  • नियमित रूप से व्यायाम करें: नियमित रूप से व्यायाम करने से दिल के काम करने पर एक सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और रक्त परिचालन भी सुधर जाता है। व्यायाम करने से वजन पर नियंत्रण होने के साथ-साथ कोलेस्ट्रॉल और रक्तचाप भी नियंत्रण में आ जाता है। इन सब की वजह से हार्ट अटैक के खतरे से बचा जा सकता है। 
  • शराब और सिगरेट का सेवन ना करें: शराब और सिगरेट पीने से उच्च रक्तचाप की शिकायत रहती है। शराब और सिगरेट से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। 
  • स्ट्रेस से खुद को दूर रखें: स्ट्रेस धीरे-धीरे हमारे शरीर को अंदर से बर्बाद कर देता है। स्ट्रेस की वजह से लोगों को उच्च रक्तचाप की शिकायत रहती है। ज़्यादा स्ट्रेस होने के कारण कभी-कभी लोगों को हार्ट अटैक भी आ जाता है। स्ट्रेस को दूर करने के लिए लोग अक्सर शराब और सिगरेट का सहारा लेते हैं। स्ट्रेस के कारण लोग ज़रुरत से ज़्यादा खाना भी शुरू कर देते हैं। ये सारी वजह हार्ट अटैक के खतरे को बढ़ा देता है। ज़रूरी हैं कि स्ट्रेस से दूरी बनाए रखने की। व्यायाम करके, अच्छी किताबें पढ़ के, सही लोगों से बात करके, या ध्यान लगा के, आप खुद को स्ट्रेस से दूर रख सकते हैं।
  • डायबिटीज को नियंत्रण में रखें: अगर आपको डायबिटीज है तो आपको हार्ट अटैक से ज़्यादा खतरा है। डायबिटीज के कारण रक्त वाहिकाओं पर प्रभाव पड़ता है और वो नष्ट हो जाती हैं। डायबिटीज के कारण दिल और रक्त वाहिकाओं को नियंत्रित करने वाले तंत्रिकाओं पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। ज़रूरी है कि आप डायबिटीज की जाँच करा लें और अगर आपको डायबिटीज की शिकायत है तो उसे नियंत्रण में ज़रूर रखें।

हार्ट अटैक का इलाज – Treatment of Heart Attack in Hindi

हार्ट अटैक का इलाज दवाई, सर्जरी या फिर पुनर्वास के द्वारा किया जा सकता है। आइए इन सारे तरीकों को एक-एक करके समझें :

  • दवाइयों के द्वारा – हार्ट अटैक में डॉक्टर के द्वारा मरीज़ को कुछ ऐसी दवाइयाँ दी जाती हैं, जिसका काम सिर्फ और सिर्फ हार्ट अटैक के लक्षणों को कम करना होता है। एस्पिरिन एक दवाई होती है जिसके द्वारा खून के जमने को कम किया जाता है। एस्पिरिन जमे हुए खून को कम कर देता है जिसके मदद से खून बिना रुके शरीर में बहना शुरू हो जाता है। कुछ ऐसी दवाई भी दी जाती हैं जिसके द्वारा खून में मौजूद प्लेटलेट के गतिविधि को रोका जा सके। प्लेटलेट खून को जमने में मदद करता है। इसी कारण से ये दवाइयाँ खून को जमने से रोकती है साथ ही साथ पुराने जमे हुए खून को बढ़ने से भी रोकती है। खून को पतला बनाने के लिए दवाइयाँ दी जाती है। ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि पतला खून कम जमता है। दर्द निवारक दवाइयाँ जैसे की मॉर्फिन भी दिया जा सकता है। ऐसी दवाइयाँ भी दी जाती है, जो सीने में होने वाले दर्द को कम करे और धमनियों को आकर में चौड़ा कर दे। 
  • सर्जरी के द्वारा – दवाइयों के अलावा निम्न तरीकों में से किसी एक तरीके का इस्तेमाल भी किया जाता है। 

कोरोनरी एंजियोप्लास्टी एंड स्टेंटिंग: इस सर्जरी में धमनियों के अंदर एक पतली सी नली डाली जाती है। इस नली के सिरे पर एक गुब्बारा-नुमा आकृति बनी होती है। इस आकृति को धमनी में जिस जगह रुकावट है वहाँ पर ले जा कर खोल दिया जाता है। इसकी वजह से धमनी अपने आप खुल जाती है। इसके साथ ही एक धातु से बनी जाली को धमनी में डाल दिया जाता है। ये धातु धमनी को खुला रखने में और खून के प्रवाह को लम्बे समय तक बनाए रखने में सहायता करता है। 

बाईपास सर्जरी: इसमें किसी शिरा या धमनी को बंद पड़े धमनी की जगह इस तरीके से सील कर लगा दिया जाता है जिससे खून का प्रवाह बंद पड़े धमनी को छोड़ कर दूसरे शिरा या धमनी के सहारे होने लगता है। 

  • पुनर्वास के द्वारा – कार्डियक रिहैबिलिटेशन जिसे पुनर्वास भी कहते हैं, भारत में ये इतना प्रसिद्ध तरीका नहीं है। लेकिन धीरे-धीरे पुनर्वास को भी हार्ट अटैक के इलाज के तौर पर देखा जा रहा है। पुनर्वास अस्पताल से शुरू होता है और मरीज़ के घर लौटने के कुछ हफ़्तों के बाद तक चलता है। इस अवधि के दौरान मरीज़ की दवाइयों का ध्यान रखा जाता है, जीवन शैली में आने वाले बदलाव पर ध्यान दिया जाता है, भावनात्मक मुद्दों को समझा जाता है तथा धीरे-धीरे मरीज़ को सामान्य जीवन में लौटने में मदद किया जाता है। पुनर्वास के बाद लोगों को दोबारा हार्ट अटैक आने की स्थिति में कमी आ जाती है और लोग ज़्यादा वक़्त तक ज़िंदा रहते हैं।

हार्ट अटैक के जोखिम कारक – Risk Factors of Heart Attack in Hindi

हार्ट अटैक के कई जोखिम कारक हो सकते हैं। कुछ ऐसे कारक होते हैं, जिन पर हमारा सीधा नियंत्रण होता है। इन कारकों से खुद को बचा कर रखने से हम खुद को हार्ट अटैक से बचा सकते हैं। अगर किसी को पहले हार्ट अटैक आ चूका है तो उन्हें इन कारकों से दूरी बना कर रखने की सबसे ज़्यादा ज़रुरत है।

  • उम्र: 45 वर्ष से ऊपर के पुरुष और 55 वर्ष से ऊपर की महिलाओं को हार्ट अटैक आने की संभावना काम उम्र के लोगों से ज़्यादा होती है। 
  • तम्बाकू: सिगरेट पीने से या सिगरेट पीने वाले इंसान के संपर्क में आने से भी हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। 
  • उच्च रक्तचाप और डायबिटीज: रक्तचाप को नियंत्रित ना रखने से धमनियों पर बुरा प्रभाव पड़ता है और धमनियाँ नष्ट भी हो सकती हैं। खून में मौजूद शुगर के स्तर के बढ़ने से भी हार्ट अटैक का खतरा होता है। 
  • खून में कोलेस्ट्रॉल और चर्बी की मात्रा ज़्यादा होना: कोलेस्ट्रॉल और चर्बी दिल से जुड़ी धमनियों के अंदर रुकावट पैदा कर देती हैं। इसकी वजह से दिल के अंदर मौजूद मांसपेशियों पर बुरा प्रभाव पड़ता हैं और हार्ट अटैक का खतरा भी बढ़ जाता है। 
  • ज़्यादा वजन होने से: ज़्यादा वजन होने से कई बिमारियों का खतरा होता है। वजन के ज़्यादा होने से रक्तचाप की शिकायत शुरू हो जाती हैं, और खून में शुगर और कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी बढ़ सकता है। इन सब कारणों से हार्ट अटैक का खतरा अपने आप बढ़ जाता है।

इन सब के अलावा कम शारीरिक गतिविधि होने से, स्ट्रेस की वजह से, या गैरकानूनी ड्रग्स के सेवन से भी हार्ट अटैक का खतरा होता है। इन सारे कारकों में से ज़्यादातर कारकों पर काम किया जा सकता है और उसे नियंत्रित भी किया जा सकता है। इन कारकों को नियंत्रित करना ज़रूरी भी है ताकि हार्ट अटैक जैसी खतरनाक बीमारी से बचा जा सके।

हार्ट अटैक में क्या खाएं – What To Eat For Heart Attack in Hindi

हार्ट अटैक से बचने के लिए या दूसरे हार्ट अटैक से खुद को सुरक्षित रखने के लिए ऐसे खाने का सेवन करना ज़रूरी है जो दिल के लिए सेहतमंद हो। ऐसे ही कुछ खाने के नाम हैं :

  • खूब सारा फल और सब्ज़ी
  • लीन मीट
  • नट और फलियां 
  • मछली 
  • साबुत अनाज
  • ओलिव ऑयल
  • कम वसा वाले डेयरी उत्पाद
  • अंडे

मछली दिल को सेहतमंद रखने के लिए एक बेहतरीन विकल्प है। जिन मछलियों में ओमेगा-3 फैटी एसिड मौजूद होता है, वो कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है।

हार्ट अटैक में क्या ना खाएं – What To Avoid During Heart Attack in Hindi

हार्ट अटैक से बचने के लिए निम्नलिखित भोजन के सेवन से बचना ज़रूरी है।

  • फास्ट फूड
  • तला हुआ खाना
  • डिब्बाबंद भोजन
  • कैंडी
  • चिप्स 
  • आइस क्रीम
  • बिस्कुट
  • केक
  • मेयोनेज़ और टोमेटो केचप 
  • लाल मांस
  • शराब 
  • पिज़्ज़ा और बर्गर

निष्कर्ष – Conclusion

हार्ट अटैक एक बेहद ही खतरनाक बीमारी है। हार्ट अटैक से जुड़ी स्टडी ये बताती है कि भारत में ये बीमारी बहुत आम हो चुकी है। ऊपर हमने आप से इस बीमारी के कारणों के बारे में बात की है। अगर ऐसा कुछ आपको या आपके जान पहचान में किसी को हो तो डॉक्टर से तुरंत रूप से संपर्क करें। हार्ट अटैक आने पर अगर मरीज़ को समय रहते इलाज मिल जाए तो खतरा कम हो जाता है। 

हार्ट अटैक से बचने के लिए सबसे ज़रूरी है जीवनशैली में परिवर्तन लाना। अगर आपने एक बार ठान लिया कि आपको खुद को हार्ट अटैक से जुड़े कारणों से खुद को दूर रखना है तो आप खुद को सुरक्षित ज़रूर रख पाएंगे। याद रखें कि आप की देख-भाल आप से अच्छा कोई और नहीं कर सकता। 

संदर्भ – References

Photo of Dr. Swaroop Choudhari
Dr. Swaroop Y Choudhari is an MBBS, MD in General Medicine. The doctor holds an experience of 8 years, and has extensive knowledge in his respective field of medicine.

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