लो ब्लड प्रेशर के प्रकार, लक्षण, कारण, परीक्षण, जोखिम कारक, और इलाज – Low Blood Pressure in Hindi

low pressure in Hindi

विषय सूची

उपक्षेप – Introduction

आजकल की भागदौड़ और तनाव भरी जिंदगी में ब्लड प्रेशर की शिकायत होना आम बात है। चक्कर आना, आंखों में  अंधेरा होना, हाथ पैर ठंडे पड़ना, कुछ पल के लिए बेहोशी, लेटने, खड़े होने और बैठने में ब्लड प्रेशर के लेवल में बदलाव होना, ये सभी लो ब्लड प्रेशर के लक्षण हैं।

लो ब्लड प्रेशर लेवल कंट्रोल करने वाला मसला है। आजकल ये प्रॉब्लम ज्यादातर लोगों में पाई जाती है। यह एक नॉर्मल सी बात है। जिसकी वजह से हमारे शरीर में कई प्रकार की बीमारियों का जन्म हो सकता है। चूंकि, हाई ब्लड प्रेशर के ज़्यादा केस  देखने को मिलते हैं, इसी वजह से लोग लो ब्लड प्रेशर पर ज़्यादा ध्यान नहीं देते हैं।

इसी वजह से शुरुआत का संकेत और लक्षण का पता नहीं चल पाता है। और इसी वजह से निजात नहीं मिल पाती है।

खासतौर पर  लो ब्लड प्रेशर की जानकारी की कमी के कारण होती है, जिसकी वजह से लोग इस परेशानी में सही कदम नहीं उठा पाते हैं और घबराहट में उल्टा सीधा इलाज करते रहते हैं।

जरूरी है कि लोगों में लो ब्लड प्रेशर से जुड़ी जागरूकता को बढ़ाया जाए ताकि वह इसका सही तरीके से इलाज करा सकें।

अगर आप भी इस बीमारी की जानकारी हासिल करना चाहते हैं तो यह आर्टिकल आपकी जानकारी के लिए ही है।

इस आर्टिकल को पूरा ज़रूर पढ़े ताकि आपको आपके अनसुलझे सवालों के जवाब मिल सके।

लो ब्लड प्रेशर क्या है – What is Low Blood Pressure in Hindi

लो ब्लड प्रेशर बीमारी को हाइपोटेंशन (hypotension) भी कहा जाता है। ये ऐसे हालात हैं, जब शरीर के सभी अंगों में ब्लड सर्कुलेशन सही तरीके से नहीं पहुंच पाता है। जब किसी व्यक्ति का ब्लड प्रेशर (blood pressure) नॉर्मल (80/120 mmHg) से कम हो जाता है, जिसकी वजह से उस काफी सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

लो ब्लड प्रेशर के प्रकार – Types of Low Blood Pressure in Hindi

हो सकता है कि कुछ लोगों को यह जानकारी न हो कि लो ब्लड प्रेशर मुख्य रूप से 4 प्रकार के होते हैं, इसलिए वो यह समझ नहीं पाते हैं कि उन्हें कौन-सा लो ब्लड प्रेशर है –

ऑर्थोस्टेटिक (Orthostatic)

जब लोगों के उठने और बैठने पर ब्लड का circulation बॉडी के अन्य हिस्सों में कम होता है, तो उस स्थिति को ऑर्थोस्टेटिक कहा जाता है।

पोस्टप्राणदियल (Postprandial)

पोस्टप्राणदियल खाने के बाद होना वाला लो ब्लड प्रेशर हैं, जो ऐसे लोगों में ज्यादा  होता है, जिन्हें पार्किसन से पीड़ित होते हैं।

नउरैली मेडिएडिट (Neurallymediated)

अगर कोई व्यक्ति काफी देर तक खड़ा रहता है, तो उसे नउरैली मेडिएडिट होने की संभावना काफी अधिक रहती है।

सीवियर (Severe)

लो ब्लड प्रेशर के अंतिम प्रकार सीवियर का संबंध स्ट्रोक से है।

जब मानव शरीर के अंगों में खून का प्रवाह पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच पाता है और न ही ऑक्सीजन तब उस स्थिति में स्ट्रोक कहा जाता है। स्ट्रोक का इलाज समय रहते न किया जाए तो मौत की वजह बन भी सकता है।

लो ब्लड प्रेशर के लक्षण – Symptoms of Low Blood Pressure in Hindi

किसी व्यक्ति के शरीर में कई लक्षण नज़र आए, तो उसे डॉक्टर से संपर्क करके अपना हेल्थ चेकअप कराना चाहिए क्योंकि यह लो ब्लड प्रेशर के संकेत हो सकते हैं-

चक्कर आना

लो ब्लड प्रेशर का प्रमुख लक्षण चक्कर आना है। आमतौर पर, इसे कमज़ोरी या थकान का संकेत माना जाता है, लेकिन कई बार यह लो ब्लड प्रेशर का संकेत भी हो सकता है।

हल्का सिरदर्द होना

किसी व्यक्ति को हल्का सिरदर्द महसूस होता है, उसे इसकी सूचना डॉक्टर को देनी चाहिए क्योंकि यह निम्न रक्तचाप का लक्षण हो सकता है।

धुँधला दिखाई देना

लो ब्लड प्रेशर का अन्य लक्षण धुँधला दिखाई देना भी है। इसी कारण, किसी भी व्यक्ति इसे नज़र अंदाज़ नहीं करना चाहिए और इसकी सूचना डॉक्टर को देनी चाहिए ताकि जांच कर सकें कि यह लो ब्लड प्रेशर का संकेत है या नहीं।

जी मचलाना

किसी शख्स का बहुत जी मचलाता है, तो उसे अपना हेल्थचेकअप कराना चाहिए क्योंकि ऐसा लो ब्लड प्रेशर का लक्षण हो सकता है।

तनाव महसूस होना

लो ब्लड प्रेशर का अंतिम लक्षण तनाव महसूस होना है।अक्सर, तनाव को मानसिक रोग से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन कई बार यह लो ब्लड प्रेशर जैसी बीमारी का संकेत भी हो सकता है।

लो ब्लड प्रेशर के कारण – Causes of Low Blood Pressure in Hindi

अलग-अलग लोगों को लो ब्लड प्रेशर अलग-अलग कारणों से हो सकता है इसलिए लो ब्लड प्रेशर के सही कारणों का पता लगाना काफी मुश्किल होता है। इसके बावजूद लो ब्लड प्रेशर पर अभी तक किए गए अध्ययनों में इस बात का पता चला है कि लो ब्लड प्रेशर मुख्य रूप से इन 5 कारणों से हो सकता है-

गर्भवती होना

लो ब्लड प्रेशर ऐसी महिलाओं को देखने को मिलता है, जो गर्भवती होती हैं। ऐसी महिलाओं को हेल्थ  का खास ख्याल रखना चाहिए और हेल्थ संबंधी किसी भी तरह की परेशानी की सूचना डॉक्टर को देनी चाहिए।

चोट से अधिक मात्रा में खून का बहना

चोट लगने पर थोड़ा खून निकलना सामान्य चीज़ है, लेकिन जब इससे अधिक मात्रा में खून निकलता है तो यह किसी बीमारी का कारण बन सकता है। इनमें लो ब्लड प्रेशर भी शामिल है, इसलिए चोट लगने के तुरंत बाद मेडिकल सहायता लेना जरूरी होता है।

दिल के दौरे से खून के बहाव में कमी आना

लो ब्लड प्रेशर उस स्थिति में भी हो सकता है, जब दिल के दौरे से खून का बहाव मानव शरीर के अन्य अंगों में नहीं पहुंच पाता है।

रक्त धारा में संक्रमण होना

अक्सर, रक्त धारा में संक्रमण लो ब्लड प्रेशर का कारण बन जाता है। ऐसी स्थिति में इससे पीड़ित व्यक्ति को मेडिकल सहायता की जरूरत पड़ती ताकि संक्रमण को कंट्रोल किया जा सके।

डायबिटीज़ या थायराइड से पीड़ित होना

लो ब्लड प्रेशर ऐसे लोगों को होने की संभावना अधिक रहती है, जो डायबिटीज़ या थायराइड से पीड़ित होते हैं। ऐसे लोगों को अपनी सेहत का खास खयाल रखना चाहिए ताकि स्थिति बदतर न हो।

लो ब्लड प्रेशर का परीक्षण – Diagnosis of Low Blood Pressure in Hindi

आमतौर पर, ऐसा माना जाता है कि लो ब्लड प्रेशर की पहचान काफी मुश्किल होता है, इसी कारण ज्यादातर लोगों के लिए लो ब्लड प्रेशर से निजात पाना मुश्किल हो जाता है। लेकिन, अभी यह स्थिति काफी हद तक बदल चुकी है क्योंकि मेडिकल साइंस ने काफी विकास कर लिया है, जिसकी वजह से लो ब्लड प्रेशर की पहचान करना आसान बन गया है। कोई व्यक्ति लो ब्लड प्रेशर से पीड़ित है, तो वह निम्नलिखित तरीकों से इसकी पहचान करा सकता है-

ब्लड टेस्ट कराना

लो ब्लड प्रेशर की पहचान करने का सबसे आसान तरीका ब्लड टेस्ट कराना है।

ई.सी.जी कराना

ब्लड टेस्ट के अलावा लो ब्लड प्रेशर की पहचान ई.सी.जी के जरिए भी किया जा सकता है।

इकोकार्डियोग्राफी कराना

अक्सर, डॉक्टर लो ब्लड प्रेशर का पता लगाने के लिए इकोकार्डियोग्राफी का सहारा भी लेते हैं। इस टेस्ट में दिल का अल्ट्रासाउंड किया जाता है, ताकि दिल की स्थिति का पता लगाया जा सके।

स्ट्रेस टेस्ट कराना

कई बार, लो ब्लड प्रेशर की जांच स्ट्रेस टेस्ट के द्वारा भी की जाती है। इस टेस्ट में मानसिक स्थिति पर निगरानी रखी जाती है क्योंकि लो ब्लड प्रेशर का कारण तनाव भी होता है।

टिल्ट टेबल टेस्ट कराना

लो ब्लड प्रेशर की पहचान टिल्ट टेबल टेस्ट के द्वारा भी की जाती है।

लो ब्लड प्रेशर का इलाज – Treatment of Low Blood Pressure in Hindi

जब लो ब्लड प्रेशर की पुष्टि हो जाती है, तब इसका इलाज करना आसान हो जाता है। इस प्रकार, कोई शख्स लो ब्लड प्रेशर से पीड़ित है, तो वह इन 5 तरीके से इस बीमारी का इलाज करा सकता है-

घरेलू नुस्खे अपनाना

अन्य किसी बीमारी की तरह लो ब्लड प्रेशर का भी इलाज घरेलू नुस्खे के द्वारा भी किया जा सकता है। लो ब्लड प्रेशर को ठीक करने के लिए ज्यादा मात्रा में नमक का सेवन करना और पानी पीना इत्यादि तरीके को अपनाना सहायक साबित हो सकता है।

लेग स्टॉकिंग्स पहनाना

आमतौर पर, स्टॉकिंग्स का इस्तेमाल पैरों के दर्द या सूजन को कम करने के लिए किया जाता है। लेकिन, लो ब्लड प्रेशर की स्थिति लेग कंप्रेशर स्टॉकिंग्स का इस्तेमाल पैरों तक खून का प्रवाह को पहुंचाने के लिए किया जा सकता है।

एक्सराइज़ करना

लो ब्लड प्रेशर का इलाज एक्सराइज़ करके भी किया जा सकता है। इसके लिए पैरों और हाथों की एक्सराइज़ किया जा सकता है ताकि मानव शरीर के सभी अंगों तक खून का प्रवाह पहुंच सके और ब्लड प्रेशर बढ़ सके।

दवाई लेना

एक्सराइज़ के अलावा लो ब्लड प्रेशर का इलाज दवाई लेकर भी किया जा सकता है। ये दवाईयां शरीर में ब्लड प्रेशर को बढ़ाने में सहायक साबित होती हैं।

सप्लीमेंट का सेवन करना

सप्लीमेंट को सेहत के लिए नुकसानदायक माना जाता है, लेकिन इसके बावजूद यदि इनका सेवन पर्याप्त मात्रा में किया जाए तो यह लो ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों का इलाज करने में सहायक साबित हो सकते हैं।

लो ब्लड प्रेशर के जोखिम कारक – Complications of  Low Blood Pressure in Hindi

ऐसा माना जाता है कि किसी बीमारी का इलाज समय रहते न किया जाए तो वह घातक रूप ले सकती है। यह बात लो ब्लड प्रेशर निम्न पर भी लागू होती है, इसलिए इससे पीड़ित लोगों के लिए यह समझदारी की बात है कि वे सही समय पर लो ब्लड प्रेशर का इलाज कराए वरना उन्हें जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है

सांस लेने में तकलीफ़ होना

लो ब्लड प्रेशर का प्रमुख जोखिम सांस लेने में तकलीफ़ होना है।

कमज़ोरी महसूस होना

सांस लेने में तकलीफ़ के अलावा लो ब्लड प्रेशर शारीरिक कमज़ोरी का कारण भी बन सकता है। यह कमज़ोरी कुछ समय के बाद ही ठीक हो जाती है, लेकिन कुछ स्थिति में यह लंबे समय तक रह सकती है।

किडनी की बीमारी की संभावना का बढ़ना

अक्सर, लो ब्लड प्रेशर का असर शरीर के अन्य अंगों जैसे किडनी पर भी पड़ जाता है। इसके कारण, यह किडनी की बीमारी का कारण भी बन सकता है।

आंखों का खराब होना

जैसा कि ऊपर स्पष्ट किया गया है कि लो ब्लड प्रेशर का असर शरीर के अन्य अंगों पर भी पड़ सकता है। लो ब्लड प्रेशर से आंखे खराब हो सकती है और आंखों की रोशनी भी जा सकती हैं।

स्ट्रोक होना

लो ब्लड प्रेशर का अंतिम जोखिम स्ट्रोक होना है। स्ट्रोक का इलाज समय रहते न किया जाए तो यह मौत की वजह भी बन सकता है।

लो ब्लड प्रेशर में क्या खाना चाहिए – Diet For Low Blood Pressure in Hindi

यह सवाल लो ब्लड प्रेशर से पीड़ित लोगों के मन में आता ही है। उनके लिए अपने खान-पान पर ध्यान देना बहुत जरूरी होता है क्योंकि इसका सीधा असर उनकी सेहत पर पड़ता है। अगर आप लो ब्लड प्रेशर से पीड़ित है तो इन 5 चीज़ों को खा सकता है, ये सेहत के लिए मुफीद साबित होंगे-

पर्याप्त मात्रा में नमक का सेवन करना

आमतौर पर, नमक को सेहत के लिए अच्छा नहीं माना जाता है क्योंकि यह ब्लड प्रेशर और किडनी जैसी बीमारियों का कारण बन सकता है। लेकिन, लो ब्लड प्रेशर की स्थिति में नमक का अहम अंग माना जाता है क्योंकि यह ब्लड प्रेशर को बढ़ाने में सहायक साबित होता है।

तरल पदार्थों का सेवन करना

लो ब्लड प्रेशर की रोकथाम तरल पदार्थों के द्वारा की जा सकती है। 

कैफीन का सेवन करना

कोई व्यक्ति लो ब्लड प्रेशर से पीड़ित है, तो उसे कैफीन का सेवन करना चाहिए ताकि उसका ब्लड प्रेशर बढ़ सके।

तुलसी के पत्तों का सेवन करना

लो ब्लड प्रेशर की स्थिति में तुलसी के पत्तों को काफी अच्छा माना जाता है। इसी कारण, लो ब्लड प्रेशर की रोकथाम के लिए तुलसी के पत्तों का सेवन करना लाभकारी साबित होता है।

बादाम वाला दूध पीना

डॉक्टर लो ब्लड प्रेशर को ठीक करने के लिए बादाम वाला दूध पीने की सलाह देते हैं। बादाम वाला दूध शरीर के साथ-साथ दिमाग के लिए फायदेमंद होता है, जो लो ब्लड प्रेशर को बेहतर करता है।

पूरी दुनिया ब्लड प्रेशर की बीमारी से जूझ रही है, इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हर साल 17 मई को वर्ल्ड ब्लड प्रेशर डे  के रूप में मनाया जाता है। इसका मकसद लोगों में ब्लड प्रेशर के प्रति जागरूकता को बढ़ाना है। हालांकि, लोगों में हाई ब्लड प्रेशर से जुड़ी जानकारी है, जिसके कारण वे इसका इलाज समय रहते शुरू कर देते हैं। इसके विपरीत लो ब्लड प्रेशर की बात की जाए तो इसे लेकर लोगों में जागरूकता की कमी देखने को मिलती है।

लो ब्लड प्रेशर को काबू में करने के कारगर उपाय – Natural Ways to Reduce Low Blood Pressure in Hindi

●      फौरन नमक का पानी पिएं, अगर आपको डायबिटीज हो तो खाएं।

●      फौरन बैठ जाएं या फिर लेट जाएं।

●      अपनी मुट्ठी बांधें, फिर खोलें। ऐसा बार- बार करें।

●      अपने पैरों को हिलाते रहें, अर्थात सक्रिय रखें।

●      50 ग्राम देशी चने व 10 ग्राम किशमिश को रात में 100 ग्राम पानी में किसी भी कांच के बर्तन में रख दें। सुबह चनों को किशमिश के साथ अच्छी तरह से चबा-चबाकर खाएं और पानी को पी लें। सिर्फ किशमिश का प्रयोग भी कर सकते हैं।

●      गाजर के 200 ग्राम रस में पालक का 50 कम ब्लड प्रेशर में गाजर भी आपके लिए फायदेमंद हो सकती है। इसके लिए लगभग 200 ग्राम गाजर के रस में एक चौथाई पालक का रस मिलका  कर पिएं। यह आपके लिए बेहद फयदेमंद हो सकता है।

●      छाछ में नमक, भुना हुआ जीरा और हींग मिलाकर, इसका सेवन करते रहने से भी ब्लड प्रेशर कंट्रोल रहता है।

●      दालचीनी के पाउडर को रोज़ाना गर्म पानी के साथ लेने से भी आपको इस समस्या में लाभ मिल सकता है, इसके लिए सुबह-शाम यह प्रयोग करें।

●      लो ब्लड प्रेशर के कारण अगर चक्कर आने की शिकायत हो, आंवले के रस में शहद मिलाकर खाने से बहुत जल्दी राहत मिलती है । इसके अलावा आंवले का मुरब्बा भी ब्लड प्रेशर के रोगियों के लिए एक बेहतर ऑप्शन है।

●      खजूर को दूध में उबालकर पीने से भी लो ब्लड प्रेशर की समस्या में फ़ायदा होता है। आप खजूर खाकर भी दूध पी सकते हैं।

●      अदरक के छोटे-छोटे करके, उनमें नींबू का रस और सेंधा नमक मिलाकर रख दें। अब इसे रोज़ाना भोजन से पहले थोड़ी-थोड़ी मात्रा में खाते रहें। दिनभर में 3 से 4 बार भी इसका सेवन आप कर सकते हैं। ऐसा करने से रक्तचाप की समस्या कुछ ही दिनों में खत्म हो जाएगी।

●      टमाटर के रस में थोड़ी-सी काली मिर्च और नमक डालकर पिएं। इससे कुछ ही समय में लो ब्लड प्रेशर में फ़ायदा होगा।

●      लो ब्लड प्रेशर को सामान्य बनाए रखने में चुकंदर का रस काफी फायदेमंद साबि‍त होता है। प्रतिदिन सुबह-शाम इसका सेवन करने से एक सप्ताह में ब्लड प्रेशर में सुधार होता है।

●       इन सभी उपायों के अलावा लो ब्लड प्रेशर के मरीजों को पोषक तत्वों से भरपूर भोजन करना चाहिए, साथ ही पैदल चलना या फिर व्यायाम करना उनके लिए बेहद फायदेमंद होता है।

ब्लड प्रेशर की समस्या को दूर करते हैं ये योगासन – Yogasana For Low Blood Pressure in Hindi

लो ब्लड प्रेशर के गलत मर बॉडी में ब्लड सर्कुलेशन  धीमा होने से जरूरी अंगों तक अच्छी तादाद में ब्लड  नहीं पहुंच पाता

हाई ब्लड प्रेशर की तरह ही लो ब्लड प्रेशर भी नुकसानदायक है। आजकल युवा इससे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। लो ब्लड प्रेशर में बैलेंस डाइट लेने और कुछ योगासनों के अभ्यास से परेशानी में राहत मिलती है।

नौकासन

ऐसे करें: पीठ के बल लेटकर दोनों पैरों को एक साथ जोड़ें। दोनों हाथों को शरीर के पास स्पर्श करें। सांस छोड़ते हुए हाथों को पैरों की तरफ खींचें। पैर-छाती ऊपर उठाएं। इस दौरान आंखें, हाथ-पैरों की अंगुलियां एक सीध में हों। पेट की मांसपेशियों के सिकुडऩे के साथ नाभि पर हो रहे खिंचाव को महसूस करें। गहरी सांस लेते हुए इस अवस्था में कुछ देर रुकें। सांस छोड़ते हुए प्रारंभिक अवस्था में आ जाएं। शरीर ढीला छोड़ें।

ये न करें: जल्दबाजी व झटके से शरीर ऊपर न उठाएं। कमर दर्द, स्लिप डिस्क, हाई बीपी या हृदयरोगी हैं तो न करें।

सूर्यभेदी प्राणायाम

ऐसे करें : पद्मासन या सुखासन की मुद्रा में बैठें। बाएं हाथ को सीधा कर बाएं घुटने पर रखें। आंखें बंद रखें। दाएं हथेली की तर्जनी और मध्यमा अंगुली को मोड़ते हुए अंगूठे को नाक के दाएं नथुने पर रखें। बाएं नथुने से सांस अंदर लेते हुए अनामिका और कनिष्ठिका अंगूली से बायां नथुना बंद करें और सांस दाएं नथुने से बाहर छोड़ें। सांस अंदर लेने की प्रक्रिया के दौरान सांस को क्षमतानुसार अंदर रोककर रखें। 2-3 बार इसे दोहराकर प्रारंभिक अवस्था में आ जाएं।

ये न करें: आमतौर पर प्राणायाम में किसी प्रकार की सावधानी की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन इसके बावजूद असहजता महसूस हो तो न करें।

मत्स्यासन

ऐसे करें: लो ब्लड प्रेशर के लिए इसे सबसे उत्तम योगासन मानते हैं। पद्मासन की मुद्रा में बैठकर पीछे की ओर झुकते हुए लेट जाएं। हथेलियों को आपस में मिलाकर लॉक कर लें। पीठ के कंधे वाले हिस्से को ऊपर उठाते हुए गर्दन मोड़ें और सिर के ऊपरी हिस्से को जमीन पर टिकाएं। दोनों पैर के अंगूठे को हथेलियों से पकड़ें। काेहनियां जमीन से स्पर्श करें। सामान्य सांस लेते हुए प्रारंभिक अवस्था में आ जाएं।

गर्मियों में लो ब्लड प्रेशर हो सकता है खतरनाक – Why Low Blood Pressure is Dangerous in Summer in Hindi

लो ब्लड प्रेशर से बचने के लिए हेल्थ लाइफ स्टाइल को फॉलो करना बहुत ही जरूरी होता है। लो ब्लड प्रेशर के कारण शरीर को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बहुत से ऐसे लोग हैं, जिन्हें लो ब्लड प्रेशर की वजह से गर्मियों में बहुत ही ज़्यादा चक्कर आते हैं। इसके साथ ही कई अन्य ऐसी ही गंभीर समस्याएं हो जाती है।

सर्दियों में मेटाबॉलिक रेट ज्यादा होने की वजह से लोगों का ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। वहीं, गर्मियों में ब्लड प्रेशर घटने की आशंका ज्यादा रहती है, जो एक गंभीर रूप धारण कर सकती है। लो ब्लड प्रेशर से बचने के लिए हेल्दी लाइफ स्टाइल फ़ॉलो करना बहुत जरूरी होता है। लो ब्लड प्रेशर के कारण शरीर को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बहुत से ऐसे लोग हैं, जिन्हें लो बीपी की वजह से गर्मियों में बहुत ही अधिक चक्कर आते हैं। इसके साथ ही कई अन्य ऐसी ही गंभीर समस्याएं हो जाती है। 

डिहाइड्रेशन

डीहाइड्रेशन के कारण काफी समय तक वॉमिटिंग या डायरिया जैसी समस्याएं होने की संभावना बढ़ जाता है। ये समस्याएं अधिक एक्सरसाइज, शारीरिक श्रम या फिर लू लगने के कारण भी हो सकती हैं। इतना ही नहीं इसके कारण नज़र में धुंधलापन और बेहोशी जैसे लक्षण भी नजर आने लगते हैं। 

ब्लीडिंग

शरीर से अधिक खून बह जाने के कारण भी ब्लड प्रेशर की समस्या होने लगती है। शरीर से ब्लड निकलने के कई कारण हो सकते हैं। चाहे वे एक्सीडेंट से निकले हों या फिर ऑपरेशन से  इन किसी भी अन्य वजह से। इसके चलते आपको ब्लड प्रेशर की परेशानी हो सकती है। महिलाओं में डिलीवरी के समय खून अधिक बहता है, इसलिए इन्हें खून की कमी के कारण लो ब्लड प्रेशर की समस्या हो जाती है। 

दिल से जुड़ी बीमारियां

दिल से जुड़ी समस्याओं के कारण भी लो ब्लड प्रेशर की समस्या होने लगती है।  इस स्थिति में हार्ट बहुत कम मात्रा में ब्लड को पंप कर पाता है। ऐसे में शरीर का ब्लड सर्कुलेशन बहुत ही धीमा होने लगता है और व्यक्ति लो ब्लड प्रेशर का शिकार हो जाता है। इस वजह से हार्ट अटैक और दिल में इंफेक्शन का भी खतरा बढ़ सकता है।

गंभीर इंफेक्शन

गंभीर इंफेक्शन या फिर सेप्टिसीमिया  के कारम भी लो ब्लड प्रेशर की समस्या होने लगती है।

हाइपो थायरॉडिज्म

थायरॉयड ग्लैंड से हॉर्मोन का स्त्राव कम होने लगता है। हार्मोन संतुलित ना होने की वजह से लो बीपी की समस्या होेने लगती है।

लो ब्‍लड प्रेशर का आयुर्वेदिक इलाज : थेरिपी

आयुर्वेद में हाइपोटेंशन के इलाज के लिए कई तरह की थेरेपीज हैं जिनका प्रयोग करके समस्या को मैनेज किया जा सकता है।

सरवांग शीरोधारा

यह एक आयुर्वेदिक इलाज है जिसमें दूध या तेल को कई तरह की जड़ी-बूटियों के साथ मिलाकर लिक्विड मिक्चर तैयार किया जाता है। फिर इसे सिर पर डाला जाता है।

अभ्‍यंग

अभ्‍यंग में शरीर में मालिश के जरिए ऊर्जा का उचित प्रवाह किया जाता है। 60 से 90 मिनट तक के लिए की जाने वाली इस प्रक्रिया से लो ब्लड प्रेशर का आयुर्वेदिक इलाज किया जाता है।

स्वेदन

इस आयुर्वेदिक थेरेपी में गर्म पुल्टिस से 30 से 40 मिनट तक शरीर की सिकाई की जाती है। इससे शरीर से पसीना निकलता है जिससे शरीर में जमे टॉक्सिन्स आसानी से निकल जाते हैं।

शोधन कर्म

लो ब्लड प्रेशर के आयुर्वेदिक इलाज में शोधन कर्म का उपयोग भी कर सकते हैं:

एनिमा या बस्‍ती

इस आयुर्वेदिक कर्म से तीनों दोष वात, पित्त और कफ को संतुलित किया जा सकता है। इसमें कई तरह की हर्ब्स का तेल या काढ़ा इस्तेमाल में लाया जाता है।

नास्‍य कर्म

इसमें नांक के नोस्ट्रिल्स में औषधीय तेल की बूंदें डाली जाती हैं। यह तेल कई जड़ी-बूटियों से मिलकर बना होता है।

लो ब्लड प्रेशर का आयुर्वेदिक इलाज हर्ब्स – Ayurvedic Treatment of Low Blood Pressure in Hindi

तुलसी पत्तियां

रोज सुबह पांच से छह तुलसी के पत्ते खाने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है। तुलसी के पत्तों में पोटेशियम, मैग्नीशियम और विटामिन सी उच्च मात्रा में पाया जाता है। यह यूजेनॉल नामक एंटीऑक्सिडेंट से भी भरा हुआ है जो रक्तचाप को नियंत्रण में रखता है और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करता है।

मुलेठी (Licorice)

एडाप्टोजेनिक और एंटी-इंफ्लामेट्री गुणों से भरपूर मुलेठी के फायदे सेहत के लिहाज से बेहिसाब हैं। आयुर्वेद में, इसकी जड़ का इस्तेमाल पित्त और वात को शांत करने के लिए किया जाता है। यह निम्न रक्तचाप को भी कंट्रोल करने में काफी प्रभावी है। शोध के अनुसार, पोटेशियम की कमी के कारण हाई ब्लड प्रेशर के कारण इसे हाइपरटेंशन के रोगियों को न लेने की सलाह दी जाती है। क्योंकि इसमें रक्तचाप बढ़ाने वाला प्रभाव होता है, इसलिए यह लो ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए उपयोगी होती है। इसके लिए डॉक्टर की सलाह से आप मुलेठी कैप्सूल या इसकी जड़ का सेवन कर सकते हैं।

लहसुन

आयुर्वेद में लहसुन काफी लाभदायक माना गया है, जिसे रसोनम के नाम से जाना जाता है। इसमें भरपूर मात्रा में एनर्जी देने वाले और वायुनाशक गुण होते हैं। एक्सपर्ट दिल की कई बीमारियों के लिए इसका इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं। यह पाउडर, रस व ऑयल के रूप में आसानी से उपलब्ध हो जाता है।

रोजमेरी का तेल

एक फ्लेवरिंग हर्ब के रूप में रोजमेरी का इस्तेमाल लंबे समय से किया जा रहा है। रोजमेरी एसेंशियल ऑइल का उपयोग एरोमाथेरेपी में भी किया जाता है। कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि यह हाइपोटेंशन के उपचार में भी मदद कर सकता है।

ब्राम्‍ही

इस इंडियन हर्ब को निम्न रक्तचाप के लिए एक और प्रभावी घरेलू उपाय है। इसे थोड़े से कपूर और दालचीनी (एक चुटकी) के साथ लिया जाना चाहिए।

अर्जुन

आयुर्वेद में अर्जुन का इस्तेमाल कई रोगों के इलाज में किया जाता है। अर्जुन की छाल का चूर्ण डॉक्‍टर के निर्देशानुसार लेने से लो बीपी की समस्या को सही किया जा सकता है। ब्‍लड प्रेशर को कंट्रोल करने में यह काफी उपयोगी है। लो ब्‍लड प्रेशर (हाइपोटेंशन) और हाई ब्‍लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) दोनों ही स्थितियों में अर्जुन का उपयोग किया जा सकता है।

और पढ़ें: हाई बीपी के लक्षण, कारण, उपचार, इलाज, और परीक्षण

निष्कर्ष – Conclusion

किसी भी व्यक्ति का ब्लड प्रेशर 120/80 के स्तर पर होना सामान्य होता है, लेकिन इसका स्तर 90/60 या उससे भी कम है, तो इसे लो ब्लड प्रेशर या हाइपोटेंशन माना जाता है। हाल ही में हुई स्टडी में शोधकर्ताओं ने पाया है कि बुजुर्गों में लो ब्लड प्रेशर उच्च मृत्यु दर से जुड़ा हुआ है। एज एंड एजिंग नाम के जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में ब्रिटेन में बुजुर्गों के 415,980 इलेक्ट्रॉनिक मेडिकल रिकॉर्ड का विश्लेषण किया गया।

ब्रिटेन में यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सेटर के स्टडी के लीड ऑथर जेन मासोली ने कहा, ‘हम जानते हैं कि ब्लड प्रेशर का इलाज करने से स्ट्रोक और दिल के दौरे को रोकने में मदद मिलती है और हम किसी को भी सलाह नहीं देंगे कि जब तक उनके डॉक्टर नहीं कह देते हैं, तब तक वे अपनी दवाएं लेना बंद न करें।‘यह शोध तब किया गया जब कुछ देशों ने चिकित्सकों को प्रोत्साहित के लिए ब्लड प्रेशर को कम करने के लिए इसके दिशा-निर्देशों को बदल दिया था।

संदर्भ – References

विकिपडिया [1]
Reduce Blood Pressure [2]

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