कमजोरी (दुर्बलता) के प्रकार, कारण, लक्षण, निदान और इलाज – Weakness Types, Causes, Symptoms, And Treatment in Hindi

weakness in Hindi

उपक्षेप – Introduction

कमजोरी एक ऐसी बीमारी है जिसे ले कर सबसे ज़्यादा ग़लतफहमी लोगों को रहती है। हम हर चीज़ को कमजोरी समझ बैठते हैं। सिर में दर्द, बदन में दर्द, नींद ना आना, नींद ज़्यादा आना, बुखार, भूख का ना लगना, इत्यादि चीज़ों को हम कमजोरी का नाम दे देते है। 

बहुत सी गंभीर बिमारियों की शुरुआत कमजोरी से होती है। कई लोग ऐसे वक़्त में खुद ही इलाज़ करने लग जाते हैं। लोग दवाई और टॉनिक ले कर कमजोरी को दूर भगाने की कोशिश करने लगते हैं। ऐसा करने से कई बार बहुत सी खतरनाक बीमारियों का पता का बहुत देरी से चलता है। कई बार बहुत देरी से पता चलने पर बहुत देर भी हो जाती है। 

कमजोरी जैसा लगने पर सबसे पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। कभी-कभी कमजोरी बिना किसी बीमारी के भी हो सकती है लेकिन इसका पता डॉक्टर लगाए तो अच्छा है। इस लेख के द्वारा हमने कमजोरी के लक्षण, कमजोरी की दवा, कमजोरी को कैसे पहचाने, कमजोरी आने का कारण और भी कई महत्वपूर्ण चीज़ों के बारे में बात की है। आप इस जानकारी को अपने आस-पास के लोगों के साथ ज़रूर साँझा करें। 

कमजोरी क्या होती है – What is Weakness in Hindi?

कमजोरी में इंसान शरीर के किसी एक हिस्से को हिला नहीं पाता है। कमजोरी के वक़्त इंसान के शरीर में शक्ति की कमी हो जाती है। इस वजह से इंसान के शरीर की एक या एक से अधिक मांसपेशी काम करना बंद कर देती है। कमजोरी एक अस्थायी और दीर्घकालीन स्थिति होती है। 

कमजोरी ज़्यादातर लोगों के हाथ या पैर में होता है। कभी-कभी लोगों को पूरे शरीर में कमजोरी जैसी बीमारी भी हो जाती है। पूरे शरीर में कमजोरी की वजह वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण होती है। 

कभी-कभी लोग थकान को कमजोरी समझ लेते हैं। लेकिन कमजोरी और थकान में काफी अंतर होता है। कमजोरी एक ऐसी बीमारी है जहाँ शरीर में या मांसपेशियों में ताकत की कमी महसूस होने लगती है। टांग, हाथ या शरीर के किसी और हिस्से को हिलाने के लिए ज़रुरत से ज़्यादा प्रयास लगना, कमजोरी का प्रतिक होता है। मांसपेशियों में कमजोरी अगर किसी दर्द की वजह से हुआ हो तो इंसान मांसपेशियों को हिला तो पाता है लेकिन ऐसा करने में उसे दर्द का अनुभव होता है। 

थकान एक ऐसी स्थिति होती है जो किसी काम को लम्बे वक़्त तक करने से, नींद का पूरा ना होने से, चिंता करने से, उदास या व्यायाम ना करने से हमारे अंदर उत्त्पन्न होती है। थकान किसी बीमारी, दवाई या चिकित्सकीय इलाज के कारण भी हो सकती है। चिंता या डिप्रेशन भी थकान की वजह हो सकते हैं। 

बुखार या ज़ुखाम में थकान का अनुभव करना एक आम बात है। ऐसी थकान बीमारी के पूर्ण रूप से खत्म होने के बाद अपने आप खत्म हो जाती है। हल्का थकान घरेलु उपचार से ठीक हो जाता है और डॉक्टर के पास जाने की ज़रुरत नहीं पड़ती। तनावपूर्ण स्थिति में भी लोग थकान का अनुभव करते हैं और ऐसी थकान तनाव के खत्म होने के बाद अपने आप खत्म हो जाती है। शराब, कैफीन और अवैध दवा के इस्तेमाल करने के बाद लोगों को थकान महसूस होने लगती है। 

कमजोरी और थकान अपने में एक बीमारी ना हो कर किसी गंभीर बीमारी के लक्षण होते हैं। कमजोरी और थकान की वजह को समझने के लिए ज़रूरी होता है कि पहले बीमारी को समझा जाए। एक बार कमजोरी और थकान के पीछे की बीमारी का पता चल गया तो फिर इनसे निजात पाने में देर नहीं लगती। 

कमजोरी या थकान के साथ अगर किसी और तरीके का लक्षण भी नज़र आने लगे तो आपको तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए। 2 हफ्ते से ज़्यादा वक़्त तक अगर कमजोरी या थकान महसूस हो तो डॉक्टर के पास जा कर इसका निवारण ढूंढने का प्रयास ज़रूर करें। 

कुछ बेहद ही खतरनाक बीमारी जिनके शुरुआती लक्षणों में कमजोरी का एहसास होता है, वो हैं:

  • एनीमिया जिसे रक्तहीनता भी कहा जाता है। खून में हीमोग्लोबिन की कमी की वजह से इस बीमारी के होने का खतरा होता है। 
  • डायबिटीज के शुरुआत में इंसान को कमजोरी महसूस होने लगती है। अगर आपके घर में किसी को भी एक वक़्त पर डायबिटीज है या थी और आपको नियमित रूप से कमजोरी की शिकायत होती हो तो बिना देरी के डॉक्टर को दिखा लें। 
  • शरीर में थाइरोइड के स्तर के बढ़ने और घटने दोनों ही स्थिति में कमजोरी जैसा महसूस होना शुरू हो जाता है। 

कमजोरी के प्रकार – Types of Weakness in Hindi

कमजोरी कई जानलेवा बीमारियों का लक्षण होता है। कमजोरी के कारण के हिसाब से उसके प्रकार को निम्न नामों से जाना जाता है:

  • तंत्रिकापेशीय कमजोरी (Neuromuscular Weakness): ये एक ऐसी स्थिति होती है जिसमे मांसपेशियों द्वारा लगाया गया बल अपेक्षा से कम होता है। इस स्थिति के कारण कई बीमारी हो सकती हैं। उनमें से एक बीमारी का नाम मांसपेशीय दुर्विकास है।    

मांसपेशीय दुर्विकास बीमारियों का एक समूह होता है जिससे मांसपेशियाँ कमजोर और क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। इसकी वजह डिस्ट्रोफिन नामक एक प्रोटीन की कमी होती है। डिस्ट्रोफिन मांसपेशियों को सही रूप से काम करने में मदद करता है। उसकी अनुपस्थिति में चलने, खाना निगलने में, और मांसपेशियों के बीच के तालमेल में दिक्कत होनी शुरू हो जाती है।

तंत्रिकापेशीय कमजोरी किसी भी उम्र में होने वाली बीमारी है मगर इसके होने का सबसे ज़्यादा खतरा बचपन में होता है। लड़कियों की तुलना में युवा लड़कों को यह बीमारी होने की अधिक संभावना होती है।    

  • गैर-तंत्रिकापेशीय कमजोरी (Non-Neuromuscular Weakness): ये एक ऐसी स्थिति होती है जिसमे किसी इंसान को किसी चीज़ पर बल लगाने के लिए सामान्य से ज़्यादा प्रयास करने की ज़रुरत महसूस होती है। लेकिन मांसपेशियों की वास्तविक ताक़त सामान्य होती है। आसान शब्दों में, जब हमारे मांसपेशियों में कोई खास दिक्कत नही होती लेकिन फिर भी हमें कमजोरी महसूस होती है। 

क्रोनिक फटीग सिंड्रोम (Chronic Fatigue Syndrome) एक ऐसी बीमारी होती है जिसके कारण गैर-तंत्रिकापेशीय कमजोरी किसी को हो सकती है। क्रोनिक फटीग सिंड्रोम एक ऐसी हालत या ऐसी बीमारी होती है जिसमे काफी ज़्यादा थकान और कमजोरी का अनुभव होता है। ये सिंड्रोम काम से काम 6 महीनों तक किसी को हो सकता है। इसके पीछे छिपे कारण को अभी तक नहीं समझा गया है। शारीरिक और मानसिक गतिविधि से कमजोरी और बढ़ जाती है लेकिन सोने या आराम करने से ये ठीक नहीं होती। 

  • शक्तिहीनता (Asthenia): ये एक ऐसी स्थिति होती है जिसमे शरीर में शक्ति की कमी या शक्ति पूरे तरीके से खत्म हो जाती है। शक्ति या तो पूरे शरीर में या शरीर के किसी हिस्से से खत्म हो जाती है। इसके लक्षण शारीरिक कमजोरी और ताकत की कमी होती है।

शक्तिहीनता कई खतरनाक बिमारियों में होती है। जैसे: क्षय रोग कर्क रोग, निद्रा विकार, दिल, फेफड़े और किडनी से जुड़ी बीमारियाँ, और एड्रि‍नल ग्रंथि से सम्बंधित बीमारियों में। 

ये किसी विशेष अंग में या पूरे अंग प्रणाली को प्रभावित कर सकती है। कभी-कभी कुछ दवाइयों के ख़राब असर के कारण भी शक्तिहीनता महसूस हो सकती है। शक्तिहीनता के कुछ कारण ये सब भी होते हैं:

  • फ़्लू
  • थाइरोइड से जुड़ी बीमारी
  • एनीमिया
  • डिप्रेशन
  • नींद का ना आना
  • डायबिटीज
  • विटामिन बी-12 की कमी
  • कीमोथेरेपी
  • मायस्थेनिया (Myasthenia): मांसपेशियों में हुई कमजोरी को मायस्थेनिया कहते हैं। इस बीमारी में मांसपेशियों की ताक़त में कमी महसूस होने लगती है। मायस्थेनिया कई कंकाल के मांसपेशियों से जुड़ी बिमारियों का लक्षण होता है। 

कमजोरी का कारण – Weakness Causes in Hindi

शरीर में महसूस होने वाली कमजोरी के कई कारण हो सकते हैं। आइये कमजोरी के कुछ कारणों को अच्छे से समझें। 

  • नींद की कमी के कारण: नींद हमारे शरीर को ढंग से चलने में बहुत मदद करती है। नींद ना पूरी होने से कई तरीकों की बीमारी हमें घेर सकती है। जब हम सोते हैं तो हमारे मांसपेशियों को, दिमाग को और शरीर के बाकी अंगों को आराम करने का मौका मिलता है। अगर हम अपने शरीर को तय मात्रा में नींद नहीं देंगे तो स्वाभाविक तौर पर हमारा शरीर ढंग से काम नहीं करेगा। 

स्वस्थ रहने के लिए और कई बिमारियों से खुद को दूर रखने के लिए ज़रूरी है कि हम सात से आठ घंटे की नींद रोज़ पूरी करें। 

  • स्लीप एपनिया के कारण: स्लीप एपनिया सोने से जुड़ी एक बेहद ही गंभीर बीमारी होती है। इसमें सोते वक़्त कई बार सांस रुक जाती है और फिर शुरू हो जाती है। बहुत लोगों को ऐसा होने का पाता नहीं चलता और इंसान काफी ज़ोर-ज़ोर से खर्राटे लेता है। अगर आप पूरे रात अच्छे से सोते हैं मगर फिर भी पूरे दिन कमजोरी जैसा महसूस होता हो तो हो सकता है आपको ये बीमारी है। 
  • खाने के आदत के कारण: आप जैसा खाना कहते हैं, आप वैसे ही बनते हैं। अगर आप स्वस्थ खाना खाएँगे तो खुद भी स्वस्थ रहेंगे। अगर आप वक़्त पर खाना नहीं कहते तो भी कमजोरी महसूस कर सकते हैं। अगर आप ऐसा खाना कहते है जिसके कारण ब्लड शुगर बढ़ जाता हो तो जैसे ही वो काम होगा तो आपको कमजोरी का एहसास होने लगेगा। 
  • एनीमिया के कारण: शरीर में आयरन की कमी के कारण लाल रक्त कोशिका में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। इस कमी के कारण कमजोरी का अनुभव करना स्वाभाविक बात है। 
  • डिप्रेशन के कारण: डिप्रेशन एक ऐसी बीमारी है जिसके कारण चिंता और कमजोरी होने लगती है। डिप्रेशन के कई और भी भयानक लक्षण होते हैं। डिप्रेशन से जूझ रहे व्यक्ति तो जल्द से जल्द डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए। 
  • थाइरोइड से जुड़ी बीमारी के कारण: थाइरोइड हमारे शरीर में मेटाबोलिज्म को कण्ट्रोल करने के लिए होता है। थाइरोइड ग्रंथि के सही से काम ना करने पर कमजोरी, डिप्रेशन और वजन का अनियमित रूप से बढ़ने जैसी शिकायत हमारे शरीर में होता है। 
  • कैफीन ओवरलोड के कारण: संयमित रूप से कैफीन के सेवन से ध्यान केंद्रित करने में, सतर्कता और ऊर्जा में सुधर जैसी अच्छी चीज़ें होती हैं। लेकिन अनियमित रूप से कैफीन के सेवन से दिल के धड़कन का बढ़ना, कमजोरी, अनिद्रा और घबराहट जैसी बीमारियाँ हो सकती हैं। 
  • मूत्र पथ के संक्रमण के कारण: मूत्र पथ के संक्रमण की वजह से मूत्र के समय दर्द का होना या बार-बार पेशाब करने की ज़रुरत महसूस होती है। मगर इसके कारण थकान और कमजोरी भी हो सकता है। 
  • डायबिटीज के कारण: कमजोरी का अनुभव करना डायबिटीज का सबसे पहला लक्षण होता है। खून में शुगर की मात्रा ज़्यादा होने से उसका इस्तेमाल नहीं होता और वो वो खून में रह जाता है। शुगर का काम ऊर्जा देना होता है और ऐसा ना होने पर कमजोरी और थकान होना शुरू हो जाता है। 

खून में शुगर की मात्रा कम होने पर भी कमजोरी का एहसास होता है क्योंकि उस दौरान शरीर में ऊर्जा की मात्रा कम होती है। 

  • पानी की कमी के कारण: पानी हमारे शरीर को कई तरीके के ज़रूरी खनिज प्रदान करता है। शरीर में पानी की कमी के कारण कई बार लोगों को कमजोरी का अनुभव होता है। 

इसके अलावा दिल से जुड़ी दिक्कतों के कारण और एलर्जी के कारण ख़ासकर खाने की एलर्जी के कारण भी कमजोरी का अनुभव लोगों को होता है। 

कमजोरी से बचाव – Prevention of Weakness in Hindi

हम अब तक कमजोरी का मतलब और उसके कारण को समझ चुके हैं। अब ये समझना ज़रूरी है कि अगर आपको कमजोरी महसूस हो रही हो तो कैसे खुद को कमजोरी से बचा सकते हैं। ज़्यादातर वक़्त कमजोरी किसी बड़ी बीमारी के लक्षण के रूप में हमें हमारे शरीर में महसूस होना शुरू होता है। मगर कई बार बिना किसी बीमारी के भी कमजोरी का अनुभव करना एक सामान्य बात है। अगर कमजोरी किसी बीमारी के कारण है तो आपको तुरंत उस बीमारी का इलाज करवा लेना चाहिए। बाँकी अगर आपको बिना किसी बीमारी के कमजोरी का सामना करना पद रहा है तो आप नीचे लिखी हुई चीज़ों का पालन करके खुद को बचा सकते हैं। 

  • खान-पान का ध्यान रख कर: ऐसे खाने से परहेज करें जो कमजोरी और थकान देती हो। जिस खाने को खा कर थकान और कमजोरी होती हो ऐसा खाना लम्बे वक़्त तक खाने से शरीर को और भी कई तरीके के नुक्सान को झेलना पड़ सकता है। 

स्वस्थ खाना खाने से आपको बहुत से फायदे हो सकते हैं। अगर आपको हमारी बात पर यकीन ना हो तो खुद से कोशिश करके ज़रूर देखें और फिर हमें ज़रूर बताएँ कि हम सही कह रहे हैं या गलत। स्वस्थ खाने का मतलब है कि आप बाहर का खाना बंद करके घर में बना खाना खाना शुरू कर दें। 

  • कसरत और व्यायाम कर के: कसरत और व्यायाम के फायदे तो हम सब को पता ही है। लेकिन अगर आप सच में खुद को स्वस्थ और फिट रखना चाहते हैं तो आपको व्यायाम और कसरत को भी अपनाना पड़ेगा। 

किसी भी तरह के शारीरिक गतिविधि से हमारे शरीर में खून के दौड़ने की रफ़्तार बढ़ जाती है और इसकी वजह से हमारे शरीर में ऊर्जा का उत्पादन होता है। ये ऊर्जा हमें कई चीज़ों को करने की शक्ति देती है, सबसे बड़ी बात ये हमें थकने और कमजोरी महसूस करने से रोकती है। ढंग से खान पान करने और सही वक़्त पर कसरत करने से आप कई बिमारियों से लड़ने के लिए अपने शरीर को तैयार कर सकते हैं। 

  • दिमाग को आराम दे कर: अगर आप चिकित्सा की दृष्टि से फिट हैं तो फिर दिक्कत कहाँ है? हो सकता है असली दिक्कत आपके अंदर मौजूद हो। इस भागते-दौड़ती ज़िन्दगी में कई बार हम तो थक कर बैठ जाते हैं, आराम कर लेते हैं लेकिन हमारा दिमाग ऐसा नहीं कर पाता वो हमेशा भागता रहता है। 

ज़्यादा भागने से क्या होता है? हम थक जाते हैं और कमजोरी का अनुभव करने लगते हैं। अगर आपकी कमजोरी किसी बीमारी के वजह से नहीं है तो इसका मतलब है की दिमाग में कुछ ऐसी चीज़ें हैं जिन्हे शांत करने की ज़रुरत हो। 

आपको कुछ ज़्यादा नहीं करना है बस ऐसी चीज़ें करिये जिनसे आप को ख़ुशी मिलती हो। किसी पुराने दोस्त से बात करिये, अपने पसंद का खाना बना कर खा लीजिये, परिवार के साथ बैठ कर उनसे बात कर लीजिये, या जो आपको पसंद हो वो करिये। ऐसा करने से आप खुद को कमजोरी के साथ-साथ और भी कई बड़ी-बड़ी बिमारियों के कारण से बचा सकते हैं। 

  • कोई नया शौक ढूँढ कर: जब आप कोई ऐसा काम करते हैं जो आपको पसंद हो तो आपके अंदर एक अलग तरीके की ऊर्जा बननी शुरू हो जाती है। ये ऊर्जा आपको बहुत चीज़ों में मदद करती है। 
  • लोग नए शौक को ढूँढ कर अपने ज़िन्दगी का उद्देश्य ढूँढ लेते हैं। एक बार ये मिल जाए फिर आपका यहाँ पर रहने का मतलब आपको समझ आ जाता है। एक बार ऐसा हो जाए फिर मुश्किल लगने वाली चीज़ें भी आसान हो जाती हैं। अगर सब कुछ ऐसा ही हुआ तो फिर कमजोरी से दूरी बनाने में ज़्यादा वक़्त नहीं लगेगा। 

इन सब चीज़ों के अलावा कई ऐसी चीज़ें हैं जो आप कर सकते हैं। सबसे अच्छा होगा कि ऐसा क्या होगा जिससे आप खुश हो सकते हैं। आपके खुद के पास ज़रूर जवाब होगा, जवाब ढूंढिए और सवाल अपने आप गुम हो जाएगा। 

कमजोरी का परीक्षण – Diagnosis of Weakness in Hindi

बहुत सी खतरनाक बीमारियाँ हमारे शरीर में दस्तक देने से पहले कमजोरी बन कर हमें परेशान करते हैं। कमजोरी का इलाज़ करने पहले डॉक्टर उसके पीछे छिपी बीमारी को समझने की कोशिश करते हैं। एक बार बीमारी पकड़ में आ गयी तो कमजोरी को ख़त्म करना मुश्किल नहीं होता।  

डॉक्टर कमजोरी के पीछे छिपी बीमारी को समझने के लिए निम्न सवाल आपसे पूछ सकते हैं:

  • पूरे शरीर में कमजोरी महसूस हो रही है या सिर्फ किसी एक हिस्से में?
  • कितने वक़्त से कमजोरी महसूस हो रही है?
  • कभी कोई चोट लगी थी? 
  • क्या आप शराब या ड्रग्स का सेवन करते हैं?
  • क्या आप कोई दवा नियमित रूप से खाते हैं? अगर हाँ तो कौन सी?
  • कमजोरी के अलावा कोई और लक्षण मौजूद हैं शरीर में?
  • कभी कोई खतरनाक बीमारी हुई थी?
  • खाने में क्या-क्या खाते हैं?
  • पूरे दिन में कितनी देर तक सोते हैं?

इन सब सवालों का जवाब मिलने के बाद डॉक्टर को कमजोरी की असली वजह के बारे में पता चल सकता है। इन सब सवालों के अलावा डॉक्टर आपको ख़ून और पेशाब की जाँच कराने के लिए भी कह सकते हैं। कमजोरी के साथ-साथ अगर दर्द भी महसूस हो तो डॉक्टर कुछ और टेस्ट कराने को कह सकते हैं ताकि दर्द होने वाली जगह को ध्यान से देखा जा सके। नीचे लिखे हुए टेस्ट में से कोई एक या एक से ज़्यादा करने का डॉक्टर आपको सलाह दे सकते हैं। 

  • एक्स-रे
  • एमआरआई स्कैन
  • सीटी स्कैन
  • अल्ट्रासाउंड 

अगर कमजोरी की वजह दिल से जुड़ी कोई बीमारी होती है तो डॉक्टर दिमाग के स्कैन या फिर इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (Electrocardiogram) के कराने के लिए भी कह सकते हैं। 

एक बार बीमारी का पता चल जाए तो फिर उसका इलाज किया जाता है इसलिए ज़रूरी है की अगर आपको कमजोरी महसूस हो तो एक बार डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें। 

कमजोरी का इलाज – Treatment of Weakness in Hindi

बीमारी का पता चल जाए तो उसका इलाज भी मुमकिन होता है। जिन बीमारी की शुरुआत कमजोरी से होती है, वो कुछ इस प्रकार हैं:

  • निर्जलीकरण (Dehydration): शरीर में पानी की कमी के कारण निर्जलीकरण जैसी बीमारी हो सकती है। तरल पदार्थ के सेवन से निर्जलीकरण से छुटकारा मिल सकता है। लेकिन अगर तबियत ज़्यादा बिगड़ जाए तो इंसान को अस्पताल में भर्ती भी कराना पड़ सकता है। नसों में तरल पदार्थ को डालने से जिसे आम बोलचाल की भाषा में पानी चढ़ाना कहते हैं, के द्वारा निर्जलीकरण से राहत मिल सकता है।

निर्जलीकरण की स्थिति में रक्तचाप में गिरावट भी आ सकता है। पानी चढ़ाने के अलावा डॉक्टर रक्तचाप को बढ़ने के लिए दवाई भी देते हैं। 

  • एनीमिया: एनीमिया के कारण कमजोरी और खून में आयरन की कमी हो जाती है। आयरन की मात्रा को सामान्य करने के लिए डॉक्टर आयरन पूरक दवा का सेवन करने के लिए कहते हैं। 

अगर एनीमिया गंभीर रूप से हो चूका हो तो रक्त – आधान (Blood Transfusion) की ज़रुरत भी पड़ सकती है। 

  • कैंसर: कैंसर के रोगी को कमजोरी का अनुभव हो सकता है। कैंसर को ठीक करने के लिए पहले ये देखा जाता है कि कैंसर शरीर के कौन से हिस्से में है, कौन से चरण में है, और रोगी के शारीरिक संरचना को भी समझा जाता है। इन सब जानकारी को इक्कठा करने के बाद में डॉक्टर सही इलाज के बारे में बता पाते हैं। कैंसर को ठीक करने के लिए इन विकल्पों में से किसी एक को चुना जा सकता है:
    • कीमोथेरेपी
    • विकिरण उपचार (Radiation Treatment) 
    • सर्जरी

कीमोथेरेपी के बाद भी कुछ वक़्त तक कमजोरी का अनुभव होता है। 

  • हार्ट अटैक: हार्ट अटैक के कारण अगर कमजोरी होता है तो डॉक्टर उस से जुड़ी दवाई देते हैं साथ ही साथ खान-पान का ध्यान रखने की सलाह भी दी जाती है। 

अगर मांसपेशियों में दिक्कत के कारण कमजोरी होती है तो उसके लिए आमतौर पर डॉक्टर इन चीज़ों का सुझाव दे सकते हैं: 

  • फिजिकल थेरेपी: इसमें रोगी को कुछ तरीकों के व्यायाम करने की सलाह दी जाती है। 
  • ऑक्यूपेशनल थेरेपी: इसमें शरीर के ऊपरी हिस्से को मज़बूत करने के लिए कुछ व्यायाम के तरीके बताये जाते हैं। इस थेरेपी के लिए रोगी को जाने के लिए तभी कहा जाता है जब उसके शरीर के ऊपरी हिस्से में कोई दिक्कत हो। 
  • दवाई: कुछ दवाइयों से भी मांसपेशियों की दिक्कत को ख़त्म किया जा सकता है। 
  • खानपान में बदलाव: खानपान में बदलाव करने से और कैल्शियम, मैग्नीशियम ऑक्साइड या पोटेशियम ऑक्साइड के सेवन से भी मांसपेशी की दिक्कतों से छुटकारा मिल जाता है। 
  • सर्जरी: अगर ऊपर लिखी हुई कोई भी चीज़ काम ना आये तो सर्जरी ही आखिरी उपाय होता है। जिस मांसपेशी या अंग में दिक्कत हो उसे सर्जरी के द्वारा ठीक किया जाता है। 

ज़रूरी नहीं है की कमजोरी किसी खतरनाक बीमारी के कारण ही हो। कभी-कभी बुखार या जुखाम के कारण भी कमजोरी महसूस हो सकती है। ऐसी स्थिति में बुखार या जुखाम से जुड़ी दवाइयों का सेवन करके कमजोरी से भी निजाद पाया जा सकता है। 

कमजोरी के जोखिम कारक और जटिलताएं – Risks And Complications of Weakness in Hindi

कमजोरी का अगर सही समय पर इलाज नहीं हुआ तो ये काफी गंभीर और जानलेवा बिमारियों को न्यौता दे सकता है। एक बार बीमारी का पता चल जाए तो उसके लिए दिए गए दवाइयों को भी नियमित रूप से खाते रहना चाहिए। अगर कोई दवाई को बीच में छोड़ देते हैं तो उस बीमारी के वापिस लौटने की उम्मीद बढ़ जाती है। कमजोरी से पीड़ित मरीज़ निम्नलिखित जटिलताओं का सामना करता है:

  • रोज़-मर्रा के काम को करने में दिक्कत
  • नींद का बिलकुल ना आना या ढंग से ना सो पाना
  • काम पर ना जा पाना
  • बच्चे अगर ऐसी स्थिति का शिकार हैं तो उन्हें स्कूल जाने में दिक्कत हो सकती है 
  • हिलने-डुलने में परेशानी का होना
  • कमजोरी के कारण और किसी बीमारी का हो जाना
  • डिप्रेशन

कुछ खतरनाक बीमारियाँ जो कमजोरी को नज़रअंदाज़ करने के कारण हो सकती हैं:

  • अतालता (Arrhythmia): ये दिल की धड़कन या गति से जुड़ी बीमारी होती है। इस बीमारी के कारण कभी-कभी हृदय गति तेज़ हो जाती है और कभी धीरे हो जाती है। हृदय गति में एक अनियमिता का अनुभव किया जाता है। 
  • कोंजेस्टिव हार्ट फेलियर (Congestive Heart Failure): इसमें दिल के खून पंप करने की शक्ति पर प्रभाव पड़ता है। दिल पूरे तरीके से काम करना बंद नहीं करता बल्कि अपनी क्षमता के अनुसार काम करना बंद कर देता है।
  • निर्जलीकरण (Dehydration): शरीर में पानी की कमी के कारण होने वाली ये बीमारी के शुरू में कमजोरी का अनुभव होता है। अगर इसका वक़्त पर इलाज नहीं किया गया तो ये जानलेवा भी साबित हो सकता है। निर्जलीकरण के कारण एक वक़्त के बाद रक्तचाप में भरी रूप से गिरावट हो जाती है। 
  • किडनी का ख़राब होना: किडनी से जुड़ी बीमारी की शुरुआत भी कमजोरी से होती है। अगर शुरू में इस पर ध्यान दिया गया तो ये इतनी खतरनाक नहीं होती। थोड़ा भी देर करने पर किडनी के ख़राब होने का खतरा होता है। 
  • मियासथीनिया ग्रेविस (Myasthenia Gravis): ये एक ऐसी बीमारी होती है जिसमे हड्डियों से लगी मांसपेशियों में कमजोरी का एहसास होना शुरू हो जाता है। इस बीमारी का सबसे ज़्यादा प्रभाव आँख और चेहरे के मांसपेशियों पर होता है। आँख और चेहरे पर एक सूजन जैसा दिखने लगता है और बात करने या चलने में दिक्कत महसूस होने लगती है। 
  • सेप्सिस (Sepsis): यह खून में बैक्टीरिया के संक्रमण के कारण होने वाली बीमारी है। जब हमारा शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए ज़रुरत से ज़्यादा केमिकल खून में छोड़ देता है तो सेपिस होने का खतरा बढ़ जाता है। इस वजह से कई अंगों में दिक्कत होने लगती है और कई बार कुछ अंग पूर्ण रूप से काम करना भी बंद कर देते हैं। इस बीमारी की शुरुआत में भी कमजोरी से होता है। 
  • स्ट्रोक: जब दिमाग में खून पहुँचना कम या बंद हो जाता है तो इसकी वजह से दिमाग में मौजूद कोशिकाओं को पर्याप्त रूप से ऑक्सीजन मिलना बंद हो जाता है। ऐसी स्थिति में दिमाग में मौजूद कोशिकाएँ नष्ट होने लग जाती है। अगर सही वक़्त पर इलाज नही हुआ तो जान जाने का खतरा भी होता है। स्ट्रोक में अचानक से कमजोरी महसूस होने लगती है और इंसान बेहोश हो जाता है। 

और पढ़ें: मैग्नीशियम के स्रोत, उपयोग, फायदे और नुकसान

निष्कर्ष – Conclusion

कमजोरी या दुर्बलता अपने में कोई बीमारी नहीं है। ये किसी बीमारी के कारण के रूप में हमारे शरीर को नुकसान पहुँचाता है। ज़रूरी है कि आप कमजोरी के लक्षण को समझें और तुरंत इस पर कार्यवाही करें। अगर देर हो जाए तो कमजोरी के कारण कई जानलेवा बीमारी के होने का खतरा बढ़ जाता है। एक चीज़ ये भी है कि ज़रूरी नहीं कमजोरी किसी बीमारी की वजह से हो रहा हो। कमजोरी कई बार डिप्रेशन या सही खाना ना खाने या बुखार और ज़ुखाम के कारण भी हो सकता है। 

इस लेख के द्वारा हमने आपको कमजोरी और उस से जुड़ी हर एक बारीकी के बारे में समझने की कोशिश की है। हमें उम्मीद है कि आपको ये कोशिश पसंद आई होगी। हम ये भी उम्मीद करते हैं कि कमजोरी से जुड़ी हर एक ग़लतफहमी भी दूर हो गयी होगी। अगर ऐसा हुआ है तो इस लेख को लोगों के साथ ज़रूर साझा करें। ऐसा करने से आप ना सिर्फ जागरूकता फैलाएँगे बल्कि लोगों को कमजोरी से जुड़े गलत ज्ञान के बारे में भी सचेत कर पाएंगे। 

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