गिंको बाइलोबा (जिन्‍कगो) के फायदे, उपयोग और नुकसान – Ginkgo Biloba Benefits, And Side Effects in Hindi

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विषय – सूची

उपक्षेप – Introduction

विश्व भर में कई प्रकार की जड़ी-बूटियां पाई जाती हैं, जो मानव स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होती हैं। इन्हीं जड़ी-बूटियों में से एक है गिंको बाइलोबा या जिंको बाइलोवा, जिसे मैडेनहेयर भी कहा जाता है। संभव है कि आप इस जड़ी-बूटी के बारे में पहली पढ़ रहे होंगे, क्योंकि यह दुर्लभ जड़ी-बूटी है और मुश्किल दिखाई देती है। साथ ही आपको यह जानकर भी हैरानी होगी कि प्राचीन चिकित्सा पद्धति से लेकर अभी तक गिंको बाइलोबा का उपयोग व्यापक रूप से किया जा रहा है। गिंको बाइलोबा का लाभ विभिन्न बीमारियों से बचने में किया जाता है। साथ ही अगर कोई बीमार है, तो उसके लक्षणों को कम करने में भी यह जड़ी-बूटी फायदा पहुंचा सकती है। स्टाइलक्रेज के इस लेख में हम गिंको बाइलोबा के फायदे और गिंको बाइलोबा के नुकसान के साथ ही इसके उपयोग बारे में जानेंगे। इन फायदों को जानने के बाद पाठक भी इसका उपयोग किए बिना नहीं रह सकेंगे।

गिंको बाइलोबा (जिन्को या जिन्कगो) एक लोकप्रिय जड़ी बूटी है जो कि मानव स्वास्थ्य के लिए बहुत ही उपयोगी और फायदेमंद होती है। जिन्कगो बाइलोबा को सामान्य रूप से गिंको या जिन्को बाइलोबा के नाम से जाना जाता है। इसे मैडेनहेयर पेड़ भी कहा जाता है। गिंको बाइलोबा के पेड़ की सूखी पत्तियों से रस से प्राप्त किया जाता है जो कि तरल निष्कर्ष, कैप्सूल और गोलियों के रूप में उपलब्ध होता है। गिंको बाइलोबा को उपयोग विभिन्‍न स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं जैसे रक्त विकारों, स्‍मृति समस्याओं, हृदय संबंधी कार्य में वृद्धि और आंखों के स्वास्थ्य में सुधार के लिए किया जाता है। आइए जाने गिंको बाइलोबा के बारे में अन्य जानकारियां जो आपके स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकती हैं।

गिंको बाइलोबा क्या हैWhat is Ginkgo Biloba in Hindi

गिंको बाइलोबा एक तरह का आयुर्वेदिक पौधा है, जिसका आकार काफी बड़ा होता है। इसका पेड़ 60 से 100 फीट तक ऊंचा हो सकता है। साथ ही यह सीधा, लंबा और शाखाओं वाला होता है। इसके पत्ते लंबे और डंठल वाले होते हैं। गिंको बाइलोबा के पत्ते, जड़ और छाल में कई आयुर्वेदिक गुण होते हैं, जिसके उपयोग से कई रोगों से मुक्ति पाने में मदद मिल सकती है।

यह आयुर्वेदिक पेड़ है जो आकार में बहुत बड़े होते हैं, आमतौर पर 20-35 मीटर या लगभग 60-100 फीट ऊंचे होते हैं। यह पेड़ सीधा लंबा और शाखाओं युक्त होता है। हवा और बर्फ आदि की क्षति से बचने के लिए इस पेड़ की जड़ें बहुत गहरी और प्रतिरोधी होती हैं। शरद ऋतु के दौरान इस पेड़ की पत्तियां पीली होकर गिरने लगती हैं। गिंको बाइलोबा की पत्तियां आमतौर पर 5-10 सेमी लंबी होती है। इस पेड़ की पत्तियां जो शरद ऋतु में भगवा रंग की होती ज्यादा फायदेमंद होती हैं। जिन्कगो की पत्तियां लंबे डंठलों के साथ होती हैं। आइए जाने जिन्‍कगों की पत्तियों और पेड़ में पाए जाने वाले पोषक तत्‍वों के बारे में।

अपने  औषधीय गुणों के कारण जिन्को बाइलोबा का उपयोग विभिन्न प्रकार की दवाओं के निर्माण में सदियों से किया जा रहा है। इस पेड़ को जीवित जीवाश्म माना जाता है जिसका अर्थ है कि यह विलुप्त होने के बाद भी जीवित रहता है। गिंको बाइलोबा में फ्लेवोनॉयड्स और टरपेनोइड्स अच्‍छी मात्रा में होते हैं। इनकी प्रकृति किसी एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम करती है जो फ्री रेडिकल्स से हमारे शरीर की रक्षा करते हैं और ऑक्सीडेटिव सेल क्षति के विरुद्ध सुरक्षा प्रदान करते हैं। इस तरह एंटीऑक्सीडेंट कैंसर के खतरे को कम करने में मदद करते हैं।

गिंको बाइलोबा के फायदेBenefits of Ginkgo Biloba in Hindi

गिंको बाइलोबा की न सिर्फ पत्तियां, बल्कि इसकी शाखा से लेकर जड़ तक हर चीज उपयोग में आती है। इसकी पत्तियों से निकले अर्क से आंखों व हृदय से संबंधित कई बीमारियों का इलाज संभव है। अस्थमा, चक्कर, थकान व टिनिटस आदि बीमारियों के इलाज के लिए जिंको बाइलोबा का उपयोग सैकड़ों वर्षों से किया जा रहा है। वहीं, इसके कुछ नुकसान भी हैं, जिनके बारे में आगे लेख में विस्तार से बताया गया है। आइए, जानते हैं कि किन-किन बीमारियों में इसका उपयोग किया जा सकता है।

1. आंखों के लिए

ग्लूकोमा ऐसी स्थिति है, जिसमें देखने की क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है। इससे बचने में गिंको बाइलोबा मदद कर सकता है। इस संबंध में एनसीबीआई की वेबसाइट पर एक वैज्ञानिक शोध प्रकाशित है। जिंको बाइलोवा में फ्लेवोनोइड्स, विटामिन-ई और विटामिन-सी जैसे एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जो आंखों को प्रभावित करने वाले फ्री रेडिकल्स को खत्म करने में मदद करते हैं। इससे ग्लूकोमा के जोखिम और उसके स्तर को कम करने में मदद कर सकते हैं। लिहाजा, कहा जा सकता है कि गिंको बाइलोबा के लाभ आंखों के लिए हो सकते हैं।

2. रक्त संचार में सुधार के लिए

जिंको बाइलोबा के पत्तों के अर्क में एंटीऑक्सीडेंट के रूप में क्वेरसेटिन, टेरेपिन लैक्टोन, ग्लूकोज, कार्बनिक एसिड, डी-ग्लूकेरिक और जिन्कगो लिक एसिड जैसे गुण होते हैं। ये सभी रक्तचाप को नियंत्रित करके रक्त के प्रवाह में सुधार करने का काम कर सकते हैं। साथ ही ये प्लेटलेट को इकट्ठा होने से भी रोक सकते हैं। ऐसे में कहा जा सकता है कि गिंको बाइलोबा के बेनिफिट रक्त संचार में सुधार के लिए हो सकता है।

3. चिंता व तनाव को कम कर एकाग्रता बढ़ाने के लिए

चिंता और अवसाद से निजात पाने के लिए लोग गिंको बाइलोबा का उपयोग दवाओं के रूप में करते हैं। इसमें पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट गुण मानसिक बीमारियों से ग्रस्त लोगों को जल्द ही आराम दिलाने में मदद कर सकते हैं। वहीं, इसके आयुर्वेदिक गुण अल्जाइमर का इलाज करने में सक्षम है। साथ ही याददाश्त को बेहतर करने में मदद कर सकते हैं, जिससे एकाग्रता बढ़ सकती है। इस विषय पर सटीक जानकारी के लिए अभी और वैज्ञानिक शोध किया जा रहा है।

4. हृदय के लिए

जिन्को बाइलोबा के अर्क में एंटी हाइपरट्रॉफिक गुण होता है, जिस कारण हृदय को बेहतर तरीके से काम करने में सहायता मिल सकती है। यहां बता दें कि हाइपरट्रॉफिक में हृदय की मांसपेशियां जरूरत से ज्यादा मोटी हो जाती हैं। इससे हृदय की खून को पंप करने की क्षमता प्रभावित होती है। इस प्रकार जिन्को बाइलोबा हृदय को स्वस्थ रखकर शरीर में रक्त संचार प्रणाली को संतुलित करने का काम कर सकता है।

5. दर्द को कम करने के लिए

गिंको बाइलोबा का उपयोग कई परिस्थितियों में दर्द निवारक के रूप में किया जाता है। यह नसों के सिकुड़ने से पैर में होने वाले दर्द से भी राहत दिला सकती है । इसके अलावा, गिंको बाइलोबा का अर्क टिशू के क्षतिग्रस्त होने पर न्यूरोपैथी जैसे पुराने दर्द से भी आराम दिला सकता है। लिहाजा, कहा जा सकता है कि गिंको बाइलोबा के फायदे दर्द से राहत दिलाने के लिए हो सकते हैं।

6. स्वस्थ मस्तिष्क के लिए

एनसीबीआई की वेबसाइट पर मौजूद एक रिसर्च पेपर से पता चलता है कि जिंकगो स्वस्थ लोगों की मानसिक क्षमता में सुधार कर सकता है, लेकिन इस विषय में अभी और शोध की आवश्यकता है। वहीं, एक अन्य शोध के अनुसार जिन्को बाइलोबा के अर्क में मौजूद पॉलीफेनोल्स में न्यूरोट्रॉफिक फैक्टर होता है, जो मस्तिष्क के विकास के लिए सहायक हो सकता है। इसलिए, ऐसा माना जा सकता है कि गिंको बाइलोबा के लाभ मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए हो सकते हैं।

7. ऊर्जा बढ़ाने के लिए

जिंको बाइलोबा के फायदे शरीर में ऊर्जा बढ़ाने के लिए हो सकते हैं। इस संबंध में प्रकाशित एक वैज्ञानिक अध्ययन में दिया हुआ है कि जिन्को बाइलोबा के अर्क में फ्लेवोनोइड्स और टेरपेनेस होते हैं, जो एंडोथेलियम-ड्राइवड रिलैक्सिंग फैक्टर (ईडीआरएफ) की रिलीज को उत्तेजित कर सकते हैं। इससे मांसपेशियों में ऊर्जा का प्रवाह होता है।

8. श्वसन तंत्र के लिए

एनसीबीआई के वेबसाइट पर प्रकाशित मेडिकल रिसर्च की माने, तो गिंको बाइलोबा के अर्क के उपयोग से कई श्वास संबंधी विकारों को दूर किया जा सकता है। इसके एंटीऑक्सीडेंट गुणों की वजह से चीन और जापान में गिंको बाइलोबा का उपयोग अस्थमा, कफ व खांसी जैसे रोगों के इलाज के लिए किया जाता है। इसके अलावा, गिंको बाइलोबा फेफड़ों से जुड़ी समस्या को कम कर लंग्स इंजरी को भी ठीक कर सकता है।

9. एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट की तरह

गिंको बाइलोबा के गुण में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गतिविधि भी शामिल है। इसमें पाया जाने वाला एंटीऑक्सीडेंट गुण ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस की समस्या को कम करने का काम कर सकता है। ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस मस्तिष्क और हृदय के लिए जोखिम पूर्ण होता है। वहीं, एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण कोलाइटिस की समस्या से छुटकारा दिला सकता है। यह समस्या इन्फ्लेमेशन (सूजन) के कारण होती है।

10. सिरदर्द कम करने के लिए

गिंको बाइलोबा के लाभ सिरदर्द से राहत दिलाने के लिए भी हो सकते हैं। दरअसल, गिंको बाइलोबा के पत्तियों से निकलने वाले अर्क में जिंकगो साइड बी नामक हर्बल तत्व पाया जाता है। इस तत्व के कारण ही गिंको बाइलोबा माइग्रेन जैसे रोगों के उपचार में सहायक साबित हो सकता है।

11. प्रीमेंसट्रूअल सिंड्रोम के लक्षण को कम करने के लिए

माहवारी से पहले नजर आने वाले लक्षणों को प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम कहा जाता है। इस दौरान सूजन, सिरदर्द और मूड स्विंग का सामना करना पड़ सकता है। वैज्ञानिक शोध के अनुसार, गिंको बाइलोबा के औषधीय गुण प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम के कारण होने वाले शारीरिक और मानसिक लक्षणों को कम कर सकते हैं।

12. एडीएचडी के लिए

गिंको बाइलोबा का उपयोग एडीएचडी (अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर) जैसी समस्या से निपटने के लिए किया जा सकता है। एडीएचडी से ग्रस्त व्यक्ति के लिए किसी भी काम पर ध्यान केंद्रित करना और अपने व्यवहार को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है। शोध के अनुसार, जिन्को बाइलोबा के उपयोग से मानसिक रोगों की समस्या को दूर किया जा सकता है। साथ ही शोध के अनुसार, जिन्कगो बाइलोबा कुछ ही साइड इफेक्ट के साथ एडीएचडी के उपचार में लाभदायक हो सकता है।

13. वजन कम करने के लिए

जिंको बाइलोबा के फायदे शरीर के वजन को कम करने के लिए भी हो सकते हैं। एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध में दिया हुआ है कि इसमें एंटी-वेसोजेनिक प्रभाव पाया जाता है, जो वजन को संतुलित रखने में मदद कर सकता है। साथ ही यह फैट को भी कम कर सकता हैं, जिससे वजन कम हो सकता है।

14. यौन स्वास्थ्य के लिए

एक वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार, गिंको बाइलोबा के अर्क की खुराक कामेच्छा में सुधार कर सकती है। साथ ही गिंको बाइलोबा में मौजूद नाइट्रिक ऑक्साइड रक्त के प्रवाह को सुगम बना सकता है, जिससे महिलाओं की मांसपेशियों के टिश्यू पर भी असर हो सकता है। गिंको बाइलोबा महिलाओं के जननांग की संवेदनशीलता को बेहतर कर सकता है। इससे यह साबित होता है कि गिंको बाइलोबा के गुण यौन स्वास्थ्य में सुधार कर सकते हैं।

15. बवासीर के लिए

बवासीर की समस्या से राहत दिलाने में भी गिंको बाइलोबा के गुण असर दिख सकते हैं। एक मेडिकल रिसर्च के मुताबिक, गिंको बाइलोबा का अर्क दर्दनाक बवासीर से पीड़ित लोगों का इलाज कर सकता है। गुदा और मलाशय पर जिन्कगो बाइलोबा के अर्क का प्रयोग सूजन, रक्तस्राव और संक्रमित क्षेत्र में दर्द से राहत देने में मदद कर सकता है।

16. फाइब्रोमायल्जिया के लिए

मांसपेशियों में दर्द और थकावट को मेडिकल भाषा में फाइब्रोमायल्जिया कहा जाता है। इस समस्या में जिंको बाइलोबा अर्क का सेवन करने से मांसपेशियों में दर्द और थकावट को दूर करने में मदद मिल सकती है। इससे फाइब्रोमायल्जिया विकार को कम किया जा सकता है। इसलिए, कहा सकते हैं कि गिंको बाइलोबा के बेनिफिट फाइब्रोमायल्जिया से छुटकारा दिलाने का काम कर सकते हैं।

17. त्वचा के लिए

गिंको बाइलोबा त्वचा को कई तरह के लाभ पहुंचा सकते हैं। इसमें पाए जाने वाले एंटी-रिंकल गुण त्वचा की झुर्रियों को रोक सकते हैं, जिससे चेहरे पर बढ़ती उम्र का असर जल्द नहीं दिखाई देता। वहीं गिंको बाइलोबा को फेस पैक के रूप में उपयोग कर सकते हैं। गिंको बाइलोबा एक प्राकृतिक सनस्क्रीन है। यह त्वचा को नुकसान पहुंचाने वाली सूर्य की हानिकारक किरणों से बचा सकता है। यही कारण है कि इसके अर्क का उपयोग कई सनस्क्रीन क्रीम में भी किया जाता है।

18. बालों के लिए

जिन्को बाइलोबा लीफ एक्सट्रैक्ट बालों के फॉलिकल्स में कोशिकाओं के प्रसार और अपोप्टोसिस यानी मृत कोशिकाओं पर प्रभाव डालकर बालों के पुनः विकास यानी रिग्रोथ को बढ़ावा देने का काम कर सकता है। इसलिए, इसे हेयर टॉनिक के रूप में इस्तेमाल करने की सलाह दी जा सकती हैं। इसलिए, गिंको बाइलोबा की पत्तियों के अर्क से बालों के फिर से विकसित होने की प्रक्रिया तेज हो सकती है।

19. जिन्को बाइलोबा है कैंसर के इलाज में लाभकारी

जिन्को बाइलोबा में पाये जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट, टरपेनोइड्स, फ्लेवोनॉयड्स और पॉली फेनोलिक यौगिक मिलकर, पूरे शरीर में मुक्त कणों को खत्म करने के लिये मदद करते है। ये सेलुलर चयापचय के खतरनाक उप-उत्पाद होते हैं जो स्वस्थ कोशिकाओं पर हमला करते हैं। जिन्को बाइलोबा पूरे शरीर को क्रोनिक बीमारियों से सुरक्षित रखने में मदद कर सकता है, विशेष रूप से कैंसर और हृदय रोग, क्योंकि मुक्त कण हृदय प्रणाली की रक्त वाहिकाओं की दीवारों को कमजोर करते हैं।

20. पुरुषों के लिए जिन्कगो बाइलोबा के लाभ

पुराने शोधों का अध्ययन करने पर पता चलता है कि जिन्कगो बाइलोबा का नियमित इस्तेमाल करने पर यह पुरुषों के यौन स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ावा देने में मदद करता है। ऐसा माना जाता है एंटीडिप्रेसेंट दवाओं का अधिक मात्रा में उपयोग करने पर पुरुषों में स्तंभन दोष हो सकता है। लेकिन यदि जिन्कगो बाइलोबा के औषधीय गुण इस प्रकार की समस्या से छुटकारा दिला सकते हैं। शोधकर्ताओं का मानना है‍ कि जिन्कगो नाइट्रिक ऑक्साइड गैस की उपलब्‍धता को बढ़ाता है जो लिंग में रक्त प्रवाह को बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभाता है। उचित रक्त प्रवाह होने से सीधा दोष के प्रभाव को कम किया जा सकता है।

जिन्कगो बिलोबा किन-किन रूपों में उपलब्ध है और इसे कैसे उपयोग किया जा सकता हैHow to Use Ginkgo Biloba in Hindi

जिन्कगो बिलोबा कई रूपों में उपलब्ध होता है और गिंको बाइलोबा का सेवन कैसे करें, तो नीचे हम इसके उपयोग के कुछ तरीके बता रहे हैं।

  • गिंको बाइलोबा पत्तियों के रूप में उपलब्ध है, जिससे चाय बनाकर सेवन किया जा सकता है।
  • यह कैप्सूल के रूप में भी मिलता है, जिसे डॉक्टर की सलाह पर ही लेना चाहिए।
  • जिन्कगो बिलोबा की गोलियां भी आती है, जिसे सही परामर्श के बाद लिया जा सकता है।
  • गिंको बाइलोबा पत्तियों का पेस्ट बनाकर त्वचा पर लगाया जा सकता है।
  • इसके अर्क को तेल में मिलाकर बालों में लगा सकते हैं।

गिंको बाइलोबा के नुकसानSide Effects of Ginkgo Biloba in Hindi

अगर गिंको बाइलोबा का उपयोग फायदेमंद हो सकता है, तो वहीं इसका अधिक सेवन उतना ही नुकसानदेह भी हो सकता है। इसका सेवन करने से पहले इसकी सही जानकारी का होना जरूरी है। आइए, जानते हैं कि गिंको बाइलोबा के साइड इफेक्ट के बारे में।

कई बीमारियों का खतरा: गिंको बाइलोबा के साइड इफेक्ट में सिरदर्द, पेट खराब और त्वचा की एलर्जी शामिल है।

रक्तस्राव: अगर किसी को रक्तस्राव की समस्या है, तो इसके सेवन से जोखिम बढ़ सकता है।

थायराइड कैंसर: जिन्को बाइलोबा के अधिक सेवन से लिवर और थायराइड का कैंसर होने का खतरा बढ़ सकता है।

गिंको बाइलोबा का बीज: ताजा (कच्चा) या भुना हुआ जिन्को बाइलोबा का बीज जहरीला हो सकता है और इसे खाने से गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं।

गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान: गर्भावस्था में जिन्कगो का सेवन असुरक्षित हो सकता है। इससे प्रसव के दौरान अधिक प्रसव पीड़ा या अतिरिक्त रक्तस्राव हो सकता है। वहीं, स्तनपान करने वाली महिलाओं के लिए यह सुरक्षित है या नहीं, इसका कोई सटीक प्रमाण नहीं हैं।

इस लेख में हमने जिन्को बाइलोबा के फायदों के बारे में विस्तार से जाना। अगर कोई इस जड़ी-बूटी को इस्तेमाल करने के बारे में सोच रहा है, तो पहले इस लेख को अच्छी तरह से पढ़ ले। गिंको बायलोबा के फायदे और नुकसान के बारे में अच्छी तरह जानने के बाद ही इसका सेवन शुरू करें। वहीं, अगर कोई गंभीर रूप से बीमार है, तो इसके इस्तेमाल से पहले डॉक्टर से सलाह करना भी जरूरी है। इस तरह की अन्य जडी-बूटियों से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने के लिए हमारे वेबसाइट के दूसरे लेख को भी पढ़ सकते हैं।

आयुर्वेद के अनुसार जिन्को बाइलोबा बहुत से स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है। लेकिन इसकी कम मात्रा का उपयोग लंबे समय तक लगभग 6 महीने के लिए करना चाहिए। इसका उपयोग करने से कोई गंभीर दुष्प्रभाव नहीं होते हैं, फिर भी इसका उपयोग कम से कम और पूरी जानकारी होने के बाद ही किया जाना चाहिए। आइए जाने गिंको बाइलोबा के नुकसान क्या हैं।

जिन्कगो कुछ लोगों में एलर्जी प्रतिक्रिया कर सकता है।यदि आपको रक्तस्राव विकार है और आप इसके लिए दवाओं का उपयोग कर रहे हैं तो जिन्कगो का सेवन नहीं करना चाहिए।

मधुमेह रोगी को जिन्कगो का अधिक मात्रा में सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि अधिक मात्रा में इसका सेवन करने पर यह आपके शरीर में रक्त शर्करा के स्तर को बहुत ही कम कर सकता है।

गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को गिंको बाइलोबा का उपयोग नहीं करना चाहिए।

यदि आप किसी विशेष प्रकार की दवाओं का सेवन कर रहे हैं तो जिन्कगो बाइबोला का उपयोग करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें।

जिन्कगो बिलोबा के साथ इंटरैक्शन – Interactions With Ginkgo Biloba in Hindi

यदि आप एक ही समय पर अन्य दवाओं या अनिर्देशित उत्पादों का सेवन करते हैं तो जिन्कगो बिलोबा/क्रोकस सटाइवस का प्रभाव परिवर्तित हो सकता है। यह दुष्प्रभावों के प्रति आपके जोखिम को बढ़ा सकता है या इसकी वजह से शायद आपकी दवा अच्छी तरह से काम ना करे। उन सभी दवाओं, विटामिनों और हर्बल सप्लीमेंट के बारे में अपने चिकित्सक को बताएं जिनका आप प्रयोग कर रहे हैं, ताकि आपके चिकित्सक दवा के परस्पर प्रभावों से बचने में आपकी सहायता कर सकें। जिन्कगो बिलोबा  निम्नलिखित दवाओं और उत्पादों के साथ परस्पर क्रिया कर सकता है:एन्टीप्लेटलेट एजेंट्स, ऐस्पिरिन, दांग क्युआइ, फ़ीवर्फ़्यू, गार्लिक, गिन्सेंग, नेचुरल कोउमरिंस, रेड क्लोवर, वार्फरिन।

निष्कर्ष – Conclusion 

निर्देशित खुराक से ज्यादा का सेवन ना करें। ज्यादा दवा के उपयोग से आपके लक्षणों में सुधार नहीं होगा, बल्कि इससे विषाक्तता या गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं। यदि आपको लगता है कि आपने या किसी और ने जिन्कगो बिलोबा की ज्यादा खुराक ले ली है तो कृपया अपने नजदीकी अस्पताल या नर्सिंग होम के आपातकालीन विभाग में जाएं। आवश्यक जानकारी पाने में चिकित्सकों की सहायता करने के लिए अपने साथ मेडिसिन बॉक्स, कंटेनर या लेबल ले जाएँ।

यदि आपको पता है कि किसी व्यक्ति की स्थिति आपके समान है या यदि ऐसा प्रतीत होता है कि उनकी बीमारी आपके जैसी है तो भी कभी अपनी दवाएं दूसरे लोगों को ना दें। इसकी वजह से दवा की अधिमात्रा हो सकती है।

ज्यादा जानकारी के लिए अपने चिकित्सक या दवा विक्रेता या उत्पाद पैकेज से परामर्श लें।

संदर्भ – References

Youtube [1]

Wikipedia [2]

Chetu Singhi
Chetu Singhi is a popular Nutritionist in Park Street, Kolkata. She has had many happy patients in her 4 years of journey as a Nutritionist. She has completed Diploma in Obesity Management & Clinical Medical Condition, Diploma in Dietetics, Health and Nutrition (DDHN), Diploma in Sports & Fitness, Certificate in Child Nutrition.

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