पादहस्तासन के फायदे, विधि और सावधानियां – Padahastasana Benefits, Process, And Precautions in Hindi

Padahastasana in Hindi

उपक्षेप – Introduction

मनुष्य के जीवन में योग अत्यधिक आवश्यक है। देखा जाए तो योग का आविष्कार भारत जैसे महान देश में हुआ है। आज भारत पूरे विश्व में  योग गुरु के नाम से प्रसिद्ध है, जिससे वह अनेक देशों में योग गुरु के नाम से जाना जाता है। योग करने की परंपरा हमारे देश में प्राचीन काल से चली हुई आ रही है। वैसे देखा जाए तो पूरी दुनिया में अनेक प्रकार के योग उपलब्ध है, परंतु पादहस्तासन सबसे अलग और अनोखा पादहस्तासन आसन है। हर आसन की खुद में एक नई पहचान होती है, जिसमें से सूर्य नमस्कार, प्राणायाम और पद्म हंसता आसन सबसे प्रचलित है। दुनिया में करोड़ों लोग हैं, जो अपनी दिन शुरुआत करने से पहले आसन करते हैं, परंतु इसके विपरीत बहुत कम लोग ऐसे हैं, जिन्हें आसन की अहमियत पता है ,वे सभी लोग अपनी दिनचर्या की शुरुआत योग से करते हैं।

योग साधना से मनुष्य अपने दैनिक कार्य सफल बनाता है, जिसमें उसको अनेक बुराइयों तथा कठिनाइयों से लड़ने की शक्तियां और प्रभावशीलता का प्राप्त होने लगता है। आज के युग में सभी लोग व्यस्त हैं किसी भी व्यक्ति के पास योग करने का समय नहीं है, लेकिन देखा जाए तो योग हमारे जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण है और लाभकारी भी सिद्ध हुआ है।

भारत एक महान देश है, इसमें कई महान मनुष्यों ने जन्म लिया है, जैसे आर्यभट्ट, ऋषि वाल्मीकि, वेदव्यास, परशुराम, करण, चाणक्य, गौतम बुद्ध, महावीर, ऋषि वशिष्ठ, विश्वामित्र आदि। यह सभी पुण्य आत्माएं योग साधना पर विश्वास रखती थी और उन्होंने अनेक विचित्र तथा अन्य कार्य करें है।

कई महान व्यक्तियों ने यह कहा है कि एक सफल व्यक्ति के पीछे समय और उसके दिनचर्या का बहुत महत्व होता है। देखा जाए तो जो व्यक्ति सफल होता है, वो अपने पूरे दिन को सही ढंग से उपयोग करता है, जिसमें से योग साधना करना उसके जीवन में महत्वपूर्ण होता है। सफल मनुष्य को यह अज्ञात रहता है कि उसकी सफलता में समय की अनु काष्टा बहुत जरूरी है, इसलिए वह अपने समय को योग साधना करते हुए काटता है।

पादहस्तासन योग एक ऐसा आसन है जिसका नाम पद और हस्त दो शब्दों के मेल से बना है। इसमें शब्द पद का अर्थ होता है “पैर” और हस्त  शब्द का मतलब “हाथ” होता है, जो कि मनुष्य के शरीर के 2 अंग है। ये आसन इंसान को खड़े-खड़े करना पड़ता है, जिसके कारण बहुत कम लोग ये आसन कर पाते है। यह आसन सभी दूसरे आसनों से बहुत ज्यादा कठिन है। पादहस्तासन योग में हमें खड़े होकर, और आगे की ओर झुक कर करना होता है, जिसमें अपने दोनों हाथों से पैरो को छूना पड़ता है।

इस आसन के अनेक फायदे हैं, जिसके कारण मनुष्य का दिमाग और शरीर चुस्त तंदुरुस्त रहता है। यह आसन करने से मनुष्य की बॉडी में मजबूत रहती है जिससे मनुष्य बलवान बनता है। ज्यादातर ये आसान करने वाले लोगो की संख्या में काम पाए जाते है, जो लोग पहले से फिट है, वे लोग इस आसन को अच्छी तरह से कर पाते  है | हमारे वेदो और पुराणों में भी इस योग कि उल्लेख है, पुराने ज़माने में लोग इस आसन को बहुमोल रूप से करते थे।

पादहस्ता क्या है – What is Padahastasana in Hindi

पदहस्तासन संस्कृत भाषा का एक शब्द है, जिसका मतलब होता है ऐसा आसन जिसमें हम हमारे पांव को छूते है। यह आसन हमेशा झुक के करना पड़ता है।  फायदे की बात की जाए तो इस आसन के बहुत सारे फायदे है।  पदहस्तासन न केवल आपके शरीर को ही नहीं अच्छा करता है, बल्कि आपको नई जिंदगी भी प्राप्त करवाता है। एक बहुत जरूरी बात जानने वाली यह है कि यह आसन करते समय आपका सिर आपके दिल के नीचे होना चाहिए, जो कि इस आसन को बहुत कठिन बनाता है। जिसके कारण खून का प्रवाह पैरों में  होने के बजाय इसके विपरीत हमारे सिर की तरफ होता है, जो एक अच्छी बात है।

जिस कारण से हमारी मेंटल स्टेबिलिटी मैं निखार आता है | इस आसन को करने से ऑक्सीजन और रक्त की अच्छी खासी मात्रा  हमारे मस्तिष्क में पहुंचने लगती है और हमारा शरीर पहले से ज्यादा फुर्तीला हो जाता है। यह आसन हठयोग की शैली में आता है, तथा आज के दिन में सबसे  कठिन है ।

लोग इस आसन को बहुत दिनों से करते हुए आ रहे हैं, वह लोग इस आसन को बहुत अच्छी तरीके से करते हैं, परंतु जो लोग नए हैं उन्हें यह आसन करने में कुछ दिक्कत होगी। समय की बात की जाए तो इस आसन को 15 से 30 सेकंड तक किया जाना आवश्यक है क्योंकि मनुष्य इससे ज्यादा नहीं रुक सकता है ।

इस आसन को करने में दोहराव की आवश्यकता नहीं पड़ती है, जोकि मनुष्य के लिए अच्छी बात है। इस आसन के अभ्यास से हमारी हिप्स, कब पर खिंचाव आता है, जिसके तत्पश्चात हमारे शरीर में मजबूती का प्राप्त होता है । इस आसन में हम हमारे दोनों हाथों से पैर के घुटने को छूते हैं, जिसमें हमारा सिर धरती की तरफ होता है।  जैसा कि आप जानते हैं इस आसन को खड़े होकर किया जाता है और अपने हाथों से पैरों को पकड़ना होता है, इसलिए शासन को पदहस्तासन  कहा जाता है।

पादहस्तासन करने से पहले यह आसन करें – Do These Asanas Before Padahastasana in Hindi

अगर हम कुछ आसनों को पादहस्तासन के पहले करेंगे हमें अत्यधिक फायदे का अनुभव होगा। जैसा कि पादहस्तासन में हमें हमारे सिर को झुका कर हाथों को पांव से छूना होता है, जिसके तत्पश्चात निम्नलिखित आसनों को करने से हमें पादहस्तासन करने में कोई परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। कुछ आसान पदहस्तासना के पहले इसलिए किए जाते हैं, जिससे हमार| शरीर अच्छे से खुल सके और हमें आसन करने में कोई परेशानी का सामना करना ना पड़े। 

हमें कुछ आसन इस आसन के पहले इसलिए करना चाहिए क्योंकि इस आसन को करने में हमें बार-बार झुकना और मुन्ना पड़ता है, जो कि एक साधारण मनुष्य के लिए असंभव सी बात हो जाती है। कई महान लोगों ने यह भी कहा है कि नीचे दिए गए आसन को करने से हमारी बॉडी में पहले से फ्लेक्सिबिलिटी आ जाती है और हमें आगे आसन करने में कोई परेशानी नहीं होती है। इसलिए हमें नीचे दिए का आसन करना आवश्यक है।

यह उसी प्रकार है जिस तरह हम दौड़ने से पहले एक्सरसाइज करते हैं। देखा जाए तो इस आसन को करने से पहले कम से कम 20 मिनट तक हमें निम्नलिखित आसन करने चाहिए। बॉडी को योग के लिए तैयार करने के लिए हमें कुछ आसानो की सहायता लेनी पड़ती है। लगभग १००० साल पहले लोग गुरुकुल में रहते थे, और उनकी सुबह की शुरुआत आसन से होती थी। इसलिए हमारी जीवन में आसन का महत्व बताया गया है।

1. पहला आसन सुषमा व्यायाम होता है, जो कि अत्यधिक आवश्यक है। इस आसन को करने से पहले शुरुआत में इस आसन को धीरे धीरे करना होता है, जिसके कारण मनुष्य का शरीर लचीला हो जाता है ।

2. दूसरा आसन सूर्य नमस्कार होता है जोकि अत्यंत प्रचलित है। सूर्य नमस्कार कम से कम दो से 4 बार करना होता है ।

3. आखिरी पश्चिमोत्तानासन करना होता है। जो की अंतिम श्रोणि में आता है।

अगर हम इन आसनों को पादहस्तासन से पहले करें तो मनुष्य को ही लाभ उठाना पड़ेगा जिसके कारण उन्हें झुकने और मुड़ने में कोई समस्या नहीं होगी।  यह आसन करने से मनुष्य का शरीर पूरी तरह से खुल जाता है और वह पहले से ज्यादा फ्लैक्सिबल हो जाता है।

पादहस्तासन की विधि – Padahastasana Steps in Hindi

आसन को हमें नियमित रूप से करना चाहिए। हर आसन एक समय और सीमा होती है जिसके आधार पर हमें करना चाहिए। परंतु कुछ व्यक्ति योगासन को किसी भी समय करते हैं जो कि सही बात नहीं है और फिर तत्पश्चात उन्हें अत्यंत हानि का सामना करना पड़ता है। इस आसन को करने की अपनी ही विधि है तथा एक समय काल है, जिसको हमें उसी समय पर करना आवश्यक है। आसन को करने का सही समय उठने के बाद का होता है, परंतु अगर इंसान इस आसन को रात या शाम के समय करें तो यह सही समय नहीं है। वैज्ञानिकों द्वारा बताया गया है कि योग करने का सही समय सूर्योदय से पहले का होता है, क्योंकि इस समय सूर्य की पहली किरण हमारे शरीर में भर्ती होती है, जिसके कारण हमें अनेक ऊर्जा से बड़ी शक्ति प्राप्त होती है। किसी भी आसन को करने की खुद की विधि होती है जिसे हमें उसकी विधि के अनुष्ठान करना पड़ता है।

आइए अब हम समझते हैं इस आसन को करने की सही विधि – Correct Way To Perform Padahastasana in Hindi

सबसे पहले आप सीधे खड़े हो जाइये और एक लंबी सांस लेते हुए अपने हाथों को पीछे कमर की ओर झुकाते हुए अपने दोनों हाथ दोनों पैरों के अंगूठे को पकड़े। सांस लेते समय हमें हमारी बॉडी को सीधे रखना होता है। इसके बाद आपको सांस बाहर निकालनी होती है और पेट को अंदर की तरफ खींचना होता है। इस पोजीशन में आपका सिर घुटनों पर होना चाहिए, जो एक सही आसन करने का तरीका है।

जब आपको सांस लेने की इच्छा हो खड़े हो जाइए आप एक बार गहरी सांस लीजिए और नीचे  जाते समय रेचक करें और अपनी सारी सांस बाहर निकाल दे। लेकिन जब आप आसन की स्थिति में ठहरे तो ब्रह्मा कुंभक करिए और ऊपर उठते समय अपनी सांस अंदर भर ले । देखिए हमें खड़े होते समय सांस को खींचना है। इस प्रकार इस आसन को बार-बार रिपीट करना है|

एक महत्वपूर्ण बात यह है कि, इस आसन को करते समय रेचक, ब्रह्मा कुम्भक और पूरक तीनों व्यायाम पूरे हो जाते है। एक विशेष बात जानने वाली यह है कि आसन को करते हुए हमें हमारे पांव को सीधा होना होता है, और यह सुनिश्चित कर लें कि घुटने मुड़े हुए ना हो। अगर आपके  घुटने मुड़े होंगे तो यह आसन करने की सही पद्धति नहीं है। यह आसन अपने पांव को बदलकर भी कर सकते है। जिसमे दांयां हाथ से बांये पाँव को छूकर और बाये हाथ से दायें पाँव का अंगूठा पकड़ने से प्रथम प्रकार सिद्ध होता है।

पादहस्तासन के फायदे – Benefits of Padahastasana in Hindi

दुनिया में कोई भी आसान हो, हर आसन के अपने फायदे होते हैं। फायदे की बात की जाए इस आसन के फायदे है, जो हमारे जीवन के लिए बहुमूल्य साबित होंगे। केवल इस योग ही नहीं, बल्कि संसार में बहुत सारे ऐसे योग हैं जो कि बहुत सरल है और अगर हम उसका प्रतिदिन पालन करें इंसान हमेशा स्वस्थ रहेगा। यदि आपको अपना जीवन और अपना शरीर दोनों स्वस्थ रखना है तो योग करना आवश्यक है। कई लोग कि इसकी तरफ अलग-अलग राय है। परंतु हमें इसके फायदे ना देखते हुए बिना स्वार्थ भावना से योग और प्राणायाम को प्रतिदिन करना चाहिए।

1.हृदय संबंधी बीमारियों के लिए लाभकारी 

पादहस्तासन एक ऐसा आसन है, जिसको करने से हृदय संबंधी बीमारियां दूर जाती  हैं, और हमारी सेहत अच्छी रहती है। ये आसन करने से हमारी पेट की चर्बी को कम करने में फायदा होता है , पाचन संबंधी समस्याओं को ठीक रहती है , लंबाई बढ़ाने में और जांघ की मांसपेशियों को एक अच्छा खिंचाव देने के लिए जाना जाता है, जो एक स्वस्थ शरीर की निशानी है ।

2.रक्त को समान रूप से पहुंचता है  

पादहस्तासन योग सिर के रक्त संचार (ब्लड सर्कुलेशन ) को बढ़ाने में मदद करता है, जिससे खून का प्रभाव पूरे शरीर में रहता है। तनाव जो एक कॉमन बीमारी है, सभी मनुष्यो की, तनाव को कम करने के लिए पादहस्तासन योग अत्यंत  ही लाभदायक सिद्ध  है। वैसे देखा  जाये तो सभी योग अपने तनाव को कम करने में मदद करते हैं , पर पादहस्तासन योग आपके शरीर की थकान को खत्म करने में मदद करता हैं और हमारी मन को शांति प्रदान करता हैं।

3.मेटाबॉलिज्म बढ़ाने ने सहायक 

पादहस्तासन योग को करने से शरीर का मेटाबॉलिज्म बढ़ता है और  इस योग को करने से व्यक्ति की एकाग्र क्षमता का विकास होता है।  इस योगाभ्यास को यदि हम सभी लोग नियमित रूप  से करते है तो नाक और थ्रोट डिजीज से निजात मिलती है। इस आसन को लगातार हम सभी करें तो शरीर के डायजेस्टिव ऑर्गन का मसाज होता है और इसको करने से पेट के फूलने की शिकायत भी दूर होने से साथ ही, कब्जियत और अपच की समस्या नहीं होती है जिससे सभी लोग प्रसिद्ध बीमारियों से दूर रहती है। स्पाइनल नर्व में मजबूती है, अनुभव होता है अगर आप इस आसन  तो रोज सुबह प्रातः काल नियमित रूप से करते है तो व्यक्ति लंबे समय तक जीवित रहता  है |

पादहस्तासन करने में सावधानियां – Precautions Before Doing Padahastasana in Hindi

 जहां देखा जाए तो योग करने के अपने ही फायदे होते हैं, परंतु इसके विपरीत हमें कुछ सावधानियां अवश्य बरसना चाहिए। यदि हम कोई भी योग करते हैं तो उसमें हमारे शरीर की एनर्जी लगती है| योग करते समय हमारे हाथों और पांव का उपयोग अधिक संख्या में होता है। हमें कुछ सावधानियां योग करते समय बरतने चाहिए नहीं तो हमें पेट दर्द, बदन दर्द, घुटनों में दर्द आदि समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। जैसा कि पुराने जमाने में कहा गया है कि योग हमारे जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, परंतु यदि हम कोई योग उसके निम्नलिखित स्टेप द्वारा ना करें तो मनुष्य को हानि का सामना कर सकता है। इसलिए हमें योग करते समय कुछ सावधानियों का अत्यंत रूप से ध्यान रखना चाहिए जो हमारे जीवन को सफल बनाता है।

इस योग को करने से हमें अत्यधिक खिंचाव तथा दर्द का सामना करना पड़ता है। जिसके कारण हमें कई सावधानियां बरतना चाहिये। यह आसन करने से पहले हमें कुछ बातों का जान लेना बहुत आवश्यक है।

  • यदि आप पीठ के दर्द से परेशान हैं तो आपको ऐसा आसन नहीं करना चाहिये ।
  • अगर आप साइटिका की समस्या से जूझ रहे हैं तो आपको यह आसन करना अत्यधिक लाभकारी नहीं है क्योंकि इस आसन को करते समय हमें बार-बार झुकना पड़ता है ।
  • यदि आपको आपकी जांघों में दर्द या सूजन रहती है तो आप कोई आसन नहीं करना चाहिए।
  • इसके विपरीत गर्भवती महिलाओं को यह आसन करने से पहले डॉक्टर से एक बार सलाह मशविरा लेना आवश्यक है ।

विशेष जानकारी यह है अगर आपको यह आसन करते समय अपनी पीठ में दर्द का महसूस हो तो आपको यह आसन कुछ दिन के लिए नहीं करना चाहिए।  यदि आपको हृदय समस्या, पीठ में दर्द, और झुकने में दर्द होता है तो आपको यह आसन नहीं करना चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी प्रकार का दर्द या घाव हो तो यह आसान आपके लिए उत्तम नहीं है, इसके विपरीत आपको कुछ ऐसे आसान करना चाहिए जो आपके शरीर के लिए हितकारी हो।

पादहस्तासन के लिए प्रतिबंध – Restrictions for Padahastasana in Hindi

पादहस्तासन से सम्बंधित नीचे बीमारियों की सूची दी गई है, इसलिए जो लोग इन बीमारियों से पीड़ित हैं, तो  उन्हें पादहस्तासन नहीं करना चाहिए।

1.अगर आपका सिर चकराता है तो ये आसन आपको नहीं करना है। 

2.उच्च रक्तचाप वाले लोग इस आसन को न करें क्योंकि इससे आपको ही नुकसान होगा।

3.जरूरी बात ये है की  गर्भावस्था के दौरान इस आसन को न करें।

4.स्पोंडिलोसिस और डिस्क वाले लोग इस आसन को न करें और करने से पहले डॉक्टर से एक बार पूछ ले।

पादहस्तासन करने के बाद यह आसन करें – Asana After Padahastasana in Hindi

इस आसन को करने के बाद कुछ आसन ऐसे हैं, जिन्हे आप यदि करें तो आपके लिए यह पादहस्तासन और लाभकारी सिद्ध होगा, परंतु जाने वाली बात यह है कि पूरे विश्व में में बहुत कम लोग ऐसे हैं जो इन आसनों को पादहस्तासन  के बाद करते हैं।  ऋषि-मुनियों द्वारा प्रेरित किया गया है कि इन 3 आसनों को हमें पादहस्तासन आसन के बाद करना चाहिए जो एक सही पद्धति में गिना जाता है |

यह 3 आसन कुछ इस प्रकार है:

  • प्रसारित पादोत्तानासन।
  • त्रिकोणासन।
  • योग निद्रा।

और पढ़ें: सूर्य नमस्कार के नियम, फायदे, और करने का तरीका

निष्कर्ष – Conclusion

पदहस्तासना विज्ञान रूपक बहुत ही अच्छा आसन माना गया है। आसन की रोजाना प्रैक्टिस करने से पैर और हड्डियां बहुत मजबूत होती है।  इस आसन को करने से आपके पैरों में नए प्रकार की मजबूती आ जाती है जिससे आप अत्यधिक वेट उठाने में सक्षम हो जाते हैं।

यह आसन हमें हमारे बचपन से ही करते हुए आना चाहिए | जिससे कि हमें हमारे बुढ़ापे में कोई परेशानी का सामना ना करना पड़े | इस आसन को बच्चा, बूढ़ा तथा जवान कोई भी उम्र का व्यक्ति इसको कर सकता है| यह आसन अन्य आसनों से थोड़ा एडवांस माना गया है, क्योंकि यह शासन में हमें हमारे सिर को घुटने तक लाना होता है, जबकि एक  नॉर्मल इंसान नहीं कर सकता है| परंतु यह आसान इतना भी कठिन नहीं है अगर हम इस आसन को ढंग से करें तो सब कुछ संभव है |

इस आसन को प्रतिदिन करने से हमारी पूरे दिन की तकलीफ पहले से ही दूर हो जाती है, तथा जो भगवान का आशीर्वाद है और अच्छे विचार है उसे हम ग्रहण करते हैं। इस आसन को हम कुछ इस प्रकार समझ सकते हैं कि जब हम सांस लेते हैं तो मनुष्य की सारी अच्छाई उसके अंदर आ जाती हैं, इसके विपरीत जब हम सांस छोड़ते हैं तो मनुष्य अपनी सारी बुराइयां, जैसे क्रोध, ईर्ष्या, घृणा, लालच पन आदि सभी बुराइयों का नाश होता है।

इस आसन को करने से हमारी अंदरूनी मांसपेशियां भी स्वस्थ होती हैं और हमारा दिमाग भी तरोताजा महसूस करता है। इस आसन को करने से हमें अत्यंत शक्ति की ऊर्जा का प्राप्त होता है, जो हमारे पूरे दिन को काम करने में सहायक बनाता है और जिससे मनुष्य डिप्रेशन जैसी बीमारी से, मानसिक तनाव से, शारीरिक तनाव से, और समाज की कठिनाइयों के लिए पहले से तैयार होकर निडरता से आगे बढ़ता है।योग करने से हम अपने क्रोध को और गुस्से को काबू में रखते हैं, जो एक सफल मनुष्य की असली पहचान होती है।

संदर्भReferences

Padhastasana [1]

Bal Sanskar Kendra [2]

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