प्राणायाम के प्रकार, फायदे और सावधानियां – Pranayam Types, Benefits, And Side Effects in Hindi

pranayam in Hindi

विषय सूची

उपक्षेप – Introduction

प्राणायाम शब्द 2 शब्दों के मेल से बना है, जिसमें से एक प्राण और दूसरा आयाम है| प्राण एक उज्जवल शक्ति ऊर्जा है, जो हमारे शरीर को जिंदा रखती है और जो हमारे तन और मन को शक्ति प्रदान करती है| प्राणायाम को इस प्रकार समझ सकते हैं, जिसमें प्राण शब्द का मतलब हमारे जीवन शक्ति में उल्लेख होता है और इसके विपरीत आयाम मतलब नियमित रूप से करना होता है| इस विस्तार से प्राणायाम शब्द का मतलब होता है खुद के जीवन शक्ति को नियमित करना और उसका सही रूप से उपयोग करना|

प्राणायाम को करने से हमें कई हजार ऊष्मा ऊर्जा जिसे हम नाड़ी कहते हैं और ऊर्जा के केंद्र जैसे चक्र भी कहा जाता है, शरीर के चारों और बनती है| प्राणायाम हमारे शरीर के लिए अत्यंत लाभकारी है| हमेशा लोग इसे सूर्य के आने से पहले करते हैं| प्राणायाम एक ऐसा योग है, जो हमारे शरीर को ही नहीं बल्कि दिमाग भी तंदुरुस्त करता है|

इसके आधार पर प्राणशक्ति की मात्रा मनुष्य के मनोरथ को निर्धारित करती है, जिससे वह शक्ति को अपने अनेक अच्छे कार्य में लगा सकता है| प्राणायाम के पूर्ण अभ्यास से हमारी प्राणशक्ति को बलवान होने में सहायता मिलती है, जिसके कारण वह हमेशा तन, मन और शरीर से स्वस्थ रहता है|

देखा जाए तो प्राणायाम के बहुत सारे फायदे हैं, जो हमारे जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है| प्रतिदिन नियमित रूप पर प्राणायाम करने से बहुत सारी ऊर्जा का निवास शरीर में होता है| प्राणायाम में सांस लेने का अत्यंत जरूरी मोल है, जिसके कारण मनुष्य की सांस पहले से ज्यादा अच्छी हो जाती है|

प्राणायाम और इसका इतिहास क्या हैं – What is Pranayama in Hindi

प्राणायाम में दो ही शब्द बहुत ही अनमोल है जिसमें से पहला शब्द प्राण और दूसरा आयाम है| प्राण शब्द वह है, जिसमें मनुष्य की आत्मा का निवास होता है| यदि हम आयाम शब्द का संधि विच्छेद करें तो पहले शब्द जो “आ” है इसका उपयोग उपसर्ग के तौर पर किया जाता है| “यम” का मतलब दमन होता है जिससे प्राणायाम का शब्द का निर्माण हुआ है| यहां पर देखने वाली बात यह है कि प्राणायाम शब्द में प्राण को अधिक महत्व दिया गया है| क्योंकि हर मनुष्य के अंदर प्राण और आत्मा का मिलन होता है| जाने वाली की बात यह भी है कि मनुष्य के शरीर में प्राण का वास होता है, परंतु आत्मा अमर रहती है| मनुष्य की मृत्यु के बाद शरीर नष्ट हो जाता है, परंतु आत्मा कभी नष्ट नहीं होती  है |

यह बात हम इस प्रकार समझ सकते हैं, कि जैसे मनुष्य अपने पुराने कपड़े उतार कर नए कपड़े पहनता है, उसी प्रकार हमारे शरीर में आत्मा एक शरीर से दूसरे शरीर में विलीन हो जाती है| इसलिए यह कहा गया है शरीर  तो नश्वर है परंतु आत्मा अमर है|

प्राणायाम का सबसे बड़ा स्रोत ऋषि-मुनियों से आया है, उन्होंने उनके कार्यों में बताया है कि प्राणायाम करने से मनुष्य के अंतर्मन का विकास होता है| सभी ऋषि मुनियों ने अपने-अपने ढंग से प्राणायाम की व्याख्या तथा अर्थ बताते हुए बहुत सारी किताबों में इसका उल्लेख किया गया है| यह भी कहा गया है कि प्राणायाम का सूत्र पतंजलि से आया हुआ है और इस आशंका की व्याख्या हमारे ग्रंथ जैसे गीता को दिया गया है| ध्यान देने वाली बात यह है कि पतंजलि ने प्राण  को महत्वपूर्ण स्रोत बताया है, क्योंकि इसके उपलब्धि अनेक है|

प्राणायाम जिसमें प्राण और सास आयाम जिसका मतलब दो सांसों में दूरी अर्थात सांस को नियंत्रित करने में प्राणायाम का अधिक योगदान है| प्राणायाम करते समय हमें अपनी समझ पर काबू करना होता है, जिसके कारण मनुष्य अपने समझ पर नियंत्रण कर सकता है| यह आसन करते समय हमें सांसो को धीमी गति से खींचना रहता है, आंखें बाहर निकालना| पड़ता है और जिसे हम प्राणायाम करते हैं| प्राणायाम करते समय मनुष्य को एक ही मुद्रा में बैठना होता है, अपनी पूरी सांस पर नियंत्रण करना होता है|

हमारे पुराने ऋषि मुनियों ने यह वाक्य कहा है कि हम सांस को अंदर खींचे तू हमारी अच्छाई हमारी सांस की तरह मनुष्य के शरीर के अंदर आएंगी, इसके विपरीत जब हमें सांस छोड़ना होता है तो व्यक्ति अपनी सारी बुराइयां बाहर की तरफ निकालता है| इसे हम एक उदाहरण सहित समझते हैं कि जब मनुष्य अपने घर में झाड़ू लगाता है, तो सारी अच्छी चीजें वह अंदर रखता है तथा सारी गंदगी बाहर फेंक देता है| तो इसी तरह हम प्राणायाम को अमित रूप से करते हैं| जब हम प्राणायाम करते हैं तो केवल हम सांस को ही नहीं अंदर खींचते परंतु ब्रह्मांड की सारी ऊर्जा है हमारे शरीर के अंदर आते हैं| कई मनुष्य कोई डाउट रहता है कि, सांस खींचने से कैसे उपलब्ध होगा| जब हम समझ लेते हैं तो पूरे विश्व की सारी ऊर्जा हमारे शरीर में समा जाती है और उसके तत्पश्चात वह शरीर के करने में भी ताकत रखती है|

कहा गया है कि प्राणायाम करते समय हमें निम्नलिखित मंत्रों का उच्चारण सही ढंग से करना चाहिए|

ॐ भूः भुवः ॐ स्वः ॐ महः, ॐ जनः ॐ तपः ॐ सत्यम्।

ॐ तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्।

ॐ आपोज्योतीरसोऽमृतं, ब्रह्म भूर्भुवः स्वः ॐ।

प्राणायाम को करते समय सबसे महत्वपूर्ण बैठने की अवस्थाएं निम्नलिखित हैं:

  • पहला है सुखासन है, इस आसन में हमारी आलती पालती मारकर बैठते हैं|
  • दूसरा है सिद्धासन इस आसन में हम किसी विशेषज्ञ की भांति बैठते हैं|
  • वज्रासन इस आसन में हम एड़ियों के बल बैठते हैं|
  • चौथा होता है, अर्ध पद्मासन, यह आसन बहुत ही आक्रामक है जिसमें हम आधे कमल के समान बैठते हैं|
  • पद्मासन इस आसन में हमें पूरे कमल के समान बैठना होता है|

विशेष रुप से प्राणायाम करते समय उपयुक्त बैठने की अवस्थाएं अनिवार्य है जबकि प्राणायाम करते समय हमें ध्यान देने वाली होती है| प्राणायाम करते समय सिर का ऊपरी भाग सीधा और तना हुआ होना चाहिए| इसके अलावा पीठ, गर्दन और सिर एक चीज में होने चाहिए| विशेष रूप से जाने वाली बात यह है कि हमें कंधे और पीठ की मांसपेशियों में तनाव महसूस नहीं होना चाहिए| हाथ हमेशा घुटने पर होने चाहिए जोगी प्राणायाम करते समय महत्वपूर्ण बात है| जब भी प्राणायाम करें निर्मल रखने तथा अपनी आंखें बंद होनी चाहिए|

कोई भी योग जरूरी ही की वो प्राणायाम हो, हमारे जीवन को सरल बनता है| हमें इस योग को करने से कई लाभ प्राप्त होते है जिससे बच्चा, बड़ा और जवान इस के लाभ के आनंद ले सकता है| ये आसन इतना सरल है  की कोई के उम्र के व्यक्ति भी इस आसन को कर सकता है| जिन लोगो को अपने शरीर से शिकायत है, वो सारी शिकायत अपनी इस योग के माधयम से हठा सकते है|

जिस प्रकार हमें हमारे लक्ष्य को पाने के लिए सभी कठिन मेहनत करते है, उसी प्रकार यदि हमें अपने जीवन को कारगर बनाना है तो हमें हमारे जीवन में प्राणायाम को ऐड करना होगा|

प्राणायाम के विभिन्न प्रकार क्या हैं – Different Types of Pranayama in Hindi

प्राणायाम के प्रमुख प्रकार निम्नलिखित है:

1. भस्त्रिका प्राणायाम

इस आसन को करते समय हमें सुखासन, सिद्धासन मैं बैठना चाहिए| कई ऋषि-मुनियों ने बताया है कि यह आसन करते समय हमें इन पदों में ही बैठना चाहिए| हमें नाक से लंबी सांस लेना है और से नाक से सांस छोड़ना रहता है, जानने वाली बात यह है कि सांस लेते समय हमें एक सादाबाद बना रहना आवश्यक है| कई लोग बहुत सारी गलतियां करते हैं जैसे सांस लेते समय वे पूरी सांस नहीं लेते जिसके कारण उन्हें अत्यधिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है|

कई वैज्ञानिकों ने हमें यह बताया है कि सांस लेने और छोड़ने के लिए हमारे शरीर में पहला नाक और दूसरा मुंह| फेफड़े है | जो हमारे हवा को शुद्ध करते हैं तथा वायु का आधा प्रभाव पूरे शरीर में एनर्जी होता है जिसके कारण ऑक्सीजन की कमी इंसान को नहीं होती है|

2. कपालभाति प्राणायाम

इस आसन को करते समय हमें सांस बाहर की तरफ फेंकना है और पेट अंदर की तरफ लाना होता है| आसन में हमें सिर्फ सांस छोड़ना रहता है और अगर हम इस आसन में सांस लेंगे तो यह आसन हम गलत करेंगे| सांस हमें तभी लेना है जब हम दो सांसों के बीच में जगह मिले| हमें जानबूझकर सांस अंदर नहीं देना है, नहीं तो हमें उसकी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा| इस आसन को कपालभाति  इसीलिए कहते हैं क्योंकि इससे मस्तिष्क और ज्योति दोनों का उपयोग समान रूप से होता है| और दूसरे आश्रम से कपालभाति बहुत ही आसान योग है|

जाने वाली बात यह है कि इस आसन को करते समय हमें केंद्रित करना पड़ता है जोकि बहुत कठिन नहीं बल्कि सरल है | बहुत सारे महान व्यक्ति ने कहा है कि कपालभाति करते समय हमें ऐसा सोचना है कि सारी बुरी शक्ति हमारे शरीर से जा रही है और अच्छी शक्तियों का आभास हो रहा है|

3. बाह्य प्राणायाम

इस आसन को करते समय हमें 3 पदों में बैठना चाहिए| इसमें सांस को पूरी तरह बाहर निकालने के बाद हमें सांस को बाहर ही रोकना पड़ता है और तीन बंद लगते हैं|

1. जालंधर बन्ध

2. उड़ड्यान बन्ध

3. मूल बन्ध

4.अनुलोमविलोम प्राणायाम

इस आसन को करने के लिए हमें सुखासन, सिद्धासन, पद्मासन, या वज्रासन में बैठन पड़ता है।अनमोल विलोम की शुरुआत और अंत हमेशा बायें नथुने (नोस्टिरल) से ही करनी चाहिए तथा, नाक का दाँया नथुना बंद करें व बायें से लंबी सांस लेना होता है| आसन के बाद  फिर बाये को बंद करके, दाँये वाले से लंबी साँस छोड़ना है और अब दाँये से लंबी सांस लें और बाएं वाले से छोडन आवश्यक है|

5.भ्रामरी प्राणायाम

इस आसन  को करने से पहले हमें सुखासन, सिद्धासन, पद्मासन, वज्रासन में बैठना चाहिये तथा दोनो अंगूठे से कान पूरी तरह बन्द होने चाहिये | हाथो की दो उंगलियों को माथे पर रख कर, छः उंगलियों को दोनों आँखों पर रख दे और अँधेरे के गमन करे। और लंबी सांस लेते हुए कण्ठ से भवरें जैसा आवाज निकालना  रहता है। इसके लाभ कुछ इस प्रकार है,इस आसन को करने से सायकीक पेशेंट को फायदा होता है, माइग्रेन पेन, डिप्रेशन, और मस्तिष्क से संबंधित सभी व्याधिओं को मिटाने के लिए बहुमूल्य है,मन और मस्तिष्क की शांति मिलती है, ब्रह्मानंद की प्राप्ति करने के लिये करा जाता है।

6.उद्गीथ प्राणायाम

इस आसन को करने के लिए सुखासन, सिद्धासन, पद्मासन, वज्रासन में बैठने आवश्यक होता है और इसमें  लंबी सांस लेकर मुंह से ओउम का जाप करना होते है।इस आसन के लाभ कुछ इस प्रकार है,

इसको नियमित रूप से करे से पॉजिटिव एनर्जी तैयार करता है।सायकीक पेशेंट को फायदा करता है ।अनेक बीमारी जैसे माइग्रेन पेन, डिप्रेशन, और मस्तिष्क के संबंधित सभी विरोधियों को मिटाने के लिये रामबाण इलाज है। लगता इसको करने से मन और मस्तिष्क की शांति मिलती है जो मनुष्य के लिए इम्पोर्टेन्ट है ।

7.प्रणव प्राणायाम

प्रणव प्रणायाम एक बड़ा ही शक्ति शैली आसन है जिसनमे हमें में हम सभी सुखासन, सिद्धासन, पद्मासन, वज्रासन में बैठते है और इन्शान को अपने मन ही मन में एकदम शान्त बैठ कर लंबी साँस लेते हुए ओउम का जाप करना है जिससे उनकी शांति बन पाए और वातावरण से घुल पाए। लाभ की बात की जाये तो इस आसन को करने से पॉझिटिव्ह एनर्जी के वश होता है,सायकीक पैन्ट्स को फायदा होता है और मस्तिष्क की शांति मिलती है।

8.अग्निसार क्रिया

इस आसन को करते समय हमें सुखासन, सिद्धासन, पद्मासन, वज्रासन में बैठना होता है ।बैठते समय  क्रिया में कपालभाती प्राणायाम जैसा बिलकुल नहीं है, बार बार साँस बाहर नहीं करनी होती  है और  सास को पूरी तरह बाहर निकालने के बाद बाहर ही रोक कर पेट को आगे पीछे करना आवश्यक  है जो की एक सही पद्धति है।

लाभ की बात की लाये तो  कब्ज, एसिडिटी, गैस्ट्रिक, जैसी पेट की सभी समस्या मिट जाती हैं इस आसन को करने से । हर्निया पूरी तरह मिट जाता है अगर हम इस आसन को करे तथा धातु, और पेशाब के संबंधित सभी समस्या मिट जाती हैं। ये आसन  मन की एकाग्र करने में सहायक बनता है|

9.उज्जायी प्राणायाम

इस एक ऐसा  आसन जिसमे है  हमें सुखासन, सिद्धासन, पद्मासन, वज्रासन में बैठना होता है और जो एक सही बैठने की क्रिया है । सिकुड़े हुये गले से सास को अन्दर लेना होता है।

10.सीत्कारी प्राणायाम

शीतकारी प्राणायाम दोनों जबड़े बंद करके सांस को लेना होता है जिसमें से सी की आवाज निकालते हुए हवा अंदर की ओर खींचना पड़ता है. फिर बंद करके सांस को नाक से बाहर छोड़ना होता है| इस आसन को करने से हम हमारे शरीर की गर्मी भी कम कर सकते हैं|

11.शीतली प्राणायाम

इस प्राणायाम को करते समय हमें हमारे मुंह से वह आकार करके उसी जीप से भी बाहर निकालना होता है जिसके तत्पर चल हमारी जीपीओ आकार की हो जाती है फिर हमें उसी भाग से हवा अंदर कितनी होती है तथा हमें मुंह बंद करके सांस को नाक के जरिए बाहर छोड़ना होता है|

लाभ की बात करें तो इस आसन के बहुत सारे लाभ है जैसे, हमारे शरीर की गर्मी कम करने में सहायक होता है, पसीना आने की शिकायत भी कम हो जाती है, पेट में गर्मी चलने की बीमारी से भी छुटकारा पाया जा सकता है|

12.चंदभेदी प्राणायाम

इस आसन को करते समय हमें हमारे मुंह से वह आकार को निकालना होता है, जिससे एक प्रकार की ध्वनि उत्पन्न होती है| फिर उसी आकार से हमें हवा अंदर की और ठीक नहीं पड़ती है इस योग के बहुत सारे लाभ हैं व्यक्ति की आवाज में सुधार होता है तथा आवाज पहले से ज्यादा मीठी हो जाती है|

प्राणायाम करने के क्या फायदे – Benefits of Doing Pranayama in Hindi

  • इस प्राणायाम के लगातार अभ्यास से तनाव, अस्थमा और हकलाने से संबंधित विकारों से छुटकारा पाने में मदद मिलती है ।
  • प्राणायाम से अवसाद का इलाज भी किया जा सकता है जो एक भोअत बड़ी उपलब्धि है तथा प्राणायाम के अभ्यास से स्थिर मन और दृढ़ इच्छा-शक्ति हमें प्राप्त होती है।
  • इसके अलावा देखा जाये तो नियमित रूप से प्राणायाम करने से लंबी आयु लोगों को प्राप्त होती है।
  • इस प्राणायाम के उपयोग से सभी मनुष्यो के  शरीर में प्राण शक्ति बढ़ाती है तथा अगर आपकी कोई नाड़ी रुकी हुई हो तो प्राणायाम के आबयसश से खुल जाती है वो भी बड़ी आसानी से।
  • मन को स्पष्ट और शरीर को सेहत प्रदान करता है, ये प्राणायाम और हमारे शरीर, मन, और आत्मा में प्राणायाम करने से तालमेल बना रहता है।
  • योग में प्राणायाम के लगातार  करने  पर पाप और अज्ञानता का नाश होता है।
  • पिछले ज़माने में कई सरे ऋषिमुनियों ने ये कथन दिया है और शाबित किया है की  इस आसन  की सिद्धि से मन स्थिर होकर योग के लिए समर्थ  होता है और सुपात्र हो जाता है
  • इस प्राणायम के लगातार अभयास के माध्यम से ही हम अष्टांग योग की प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और अंत में समाधि की अवस्था तक पहुंचते हैं जिससे हमारे शरीर का संपूर्ण विकास होता है और फेफड़ों में अधिक मात्रा में शुद्ध हवा जाने से शरीर स्वस्थ रहता है।
  • इस  प्राणायाम से हमारा जबरदस्त मानसिक विकास होता है जो मनुष्य को कारगर बनता  है ।

और पढ़ें: वायु मुद्रा करने का सही तरीका और फायदे

कम उम्र में प्राणायाम शुरू करने के क्या फायदे हैं?

आजकल हर मनुष्य अपने जीवन में व्यस्त है, किसी भी मनुष्य को कोई भी प्राणायाम करने का समय बिल्कुल नहीं है। परंतु अगर हम हमारे प्रारंभिक जीवन से ही किसी प्राणायाम को शुरू करते हैं, तो इससे हमें ही लाभ होगा। जैसे कि कहां जाता है के कम उम्र के लोगों को कुछ सिखाना बहुत ही आसान होता है, छोटे बच्चे किसी भी चीज को जल्दी से पकड़ लेते हैं, परंतु अगर हम वही चीज बड़े उम्र वाले किसी व्यक्ति को सिखाएं तो उसे वह देखने में बहुत ही समय लगता है।

उदाहरण के सहित समझाते हुए कहा गया है कि किसी भी घड़े को अगर हमें आकार में डालना है तो उसके बनते समय ही सब कुछ संभव है परंतु अगर एक बार वह पक्का हो जाता है, तो उसको वापस अपने पुराने रूप में लाना संभव नहीं है। तो हमें प्राणायाम 10 वर्ष है ही शुरू कर देना चाहिए यह आयु बहुत ही कारगर सिद्ध होगी किसी भी बच्चे को कोई भी आसान सीखने के लिए।

किन लोगो को नियमित तौर पर प्राणायाम करना चाहिए – People Who Can Do Pranayam in Hindi

प्राणायाम हमारे जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है| हर मनुष्य को प्राणायाम नियमित रूप से करना चाहिए| जिन लोगों को सांस से संबंधित शिकायत रहती है, उन लोगों के लिए प्राणायाम तो रामबाण इलाज है| इस प्राणायाम को करने से वह अपनी सांस पर काबू पा सकते हैं, तथा देर तक सांस भी रोक ले सकते हैं| जो लोगों को डिप्रेशन की शिकायत है ऐसे लोग के लिए भी प्राणायाम बहुत अच्छा आसान है|

दुनिया में ऐसे बहुत सारे लोग हैं जिन्हें अपनी पीठ की हड्डी से शिकायत रहती है, ऐसे व्यक्तियों के लिए प्राणायाम रामबाण इलाज है जिससे वह अपनी हड्डी से जुड़े हुए हुई सारी समस्याओं को दूर कर सकते हैं| यदि हमें डिप्रेशन का शिकार है तो प्राणायाम भी उसका मूल उपचार है|अतः प्राणायाम सभी उम्र के लोगों को करना चाहिए|

प्राणायाम करने विशिष्ट समय और अवधि – Specific Time and Duration to do Pranayama in Hindi

प्राणायाम की समय सीमा की बात की जाए तो प्राणायाम को सुबह करना अच्छा रहता है, क्योंकि सुबह सूर्य की किरणें सुषमा रूप से हमारे शरीर में धारण होती है, जिसके कारण अत्यंत सुखद ऊर्जा का निवास हमारे शरीर में होता है। प्राणायाम करने का सही समय सूर्योदय के बात का होता है। देखा जाए तो वैसे तो प्राणायाम बहुत प्रकार के होते हैं जिनके अपने ही फायदे हैं जो हमारे जीवन में बहुत कारगर सिद्ध होंगे।

शुरुआत में मनुष्य को प्राणायाम 5 मिनट से लेकर 10 मिनट तक करना चाहिए जिन लोगों को सांस से लेकर शिकायत रहती है, उन लोगों को प्राणायाम बिल्कुल करना चाहिए। बाद में कई मनुष्यों को दिक्कत आती है परंतु धीरे-धीरे हमें प्राणायाम करते रहना चाहिए। इसके लगातार रूप से करने पर हमें अनगिनत लाभ मिलते हैं।

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कौन-कौन सी बीमारियाँ दूर होती है प्राणायाम करने से – Benefits in Diseases Due To Pranayama in Hindi

नीचे दी गई बीमारियों प्राणायाम करने से लुप्त हो जाती है:

1.छोटी मोटी बीमारियां जैसे सर्दी जुकाम और एलर्जी काम करने से दूर हो जाती हैं तथा हमारे मस्तिष्क में एक नए प्रकार की ऊर्जा का आरंभ होता है।

2.बीमारियां जैसे गैस, मोटापा, दर्द आदि जैसी सभी समस्याएं प्राणायाम करने से दूर होती है।

3.प्राणायाम के लगातार प्रयास है मन की चंचलता दूर हो जाती है जिसके कारण मनुष्य अपना मन एकाग्र कर पाता है।

4.महत्वपूर्ण बात यह है कि प्राणायाम करने से सिर दर्द भी ठीक हो जाता है और नकारात्मक जैसी परेशानियां मनुष्य के जीवन से हमेशा के लिए दूर हो जाती हैं।

5.बार-बार प्राणायाम करने से हमें खांसी और कफ जैसी बीमारियां सरकारा मिलता है और हमें दवाइयां की भी जरूरत नहीं पड़ती है।

6.डायबिटीज वाले पेशेंटओं के लिए प्राणाया रामबाण इलाज है जिसके कारण वह अपने मन और बुद्धि को एकाग्र कर पाते हैं, और उन्हें प्राणायाम के अनेक लाभ हो का फल भी मिलता है।

प्राणायाम करने के लिए सावधानी – Precautions of Doing Pranayama Everyday in Hindi

कोई भी प्राणायाम हो हमें हर प्राणायाम में विशेष रूप से सावधानी लेनी चाहिए, जो हर मनुष्य के लिए कारगर सिद्ध होगा, क्योंकि हम प्राणायाम में अपने शरीर तथा मांसपेशियों  के  विकास होता है | अगर हम प्राणायाम करते समय कुछ बातों पर ध्यान नहीं देंगे तो हमें फायदे के जगह नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।

आसन करने से पहले हमें ना ही कोई लिक्विड पीना है और ना ही हमें कुछ खाना है। हमें हर आसन खाली पेट ही करना चाहिए यदि हमने कोई लिक्विड पिया है तो हमें आसान 1 घंटे के बाद करना चाहिए और यदि हमने कुछ खाया है तो हमें आसन 3 से 4 घंटे बाद करना चाहिए।

यदि आपने 2 या 3 महीने के पहले कोई ऑपरेशन करवाया हो तो आपको यह आसान नहीं करना चाहिए और यदि आप इस आसन को करते हैं तो फिर आपको इसकी हानि भुगतनी पड़ेगी।

प्राणायाम करने के बाद ही जरूरी है कि हमें कोई दौड़ने भागने वाला कार्य करना चाहिए। यह में 7 मिनट के बाद करना चाहिए। एक जरूरी जानने वाली बात यह है कि प्राणायाम करते समय हमें हमारी रीढ़ की हड्डी और चेहरे को सीधा करना होता है।

हमें हमेशा प्राणायाम बैठकर कर करना चाहिए। प्राणायाम करते समय हमें जमीन में कुछ बिछा लेना होता है, इसके विपरीत अगर हम कोई भी आसन उबड़-खाबड़ जैसी जगह पर करेंगे तो हमें अत्यधिक हानि का सामना करना पड़ेगा जो कि आसन करने की सही पद्धति में नहीं आता है। इस आसन को करने से लाभ तो है ही परंतु अगर हम इसका ध्यान ना रखे तो हनी का भी सामना करना पड़ सकता है।जगह के मामले में आप ऐसी जगह को ढूंढें बैठने के लिए कारगर हो।

इस आसन को बच्चा बूढ़ा और जवान किसी भी उम्र का व्यक्ति आसानी से कह सकता है क्योंकि इसमें हमें आसन बैठकर करना होता है।

एक और जानने वाली बात यह है कि हमेशा सांस लेते समय हमें अपनी बुराइयों को नजरअंदाज करते हुए सारी अच्छाइयों को अंदर लेना है और हमेशा सांस छोड़ते समय हमारी बुराइयों को सांस के थ्रू निकालना होता है।

आसन को शुरुआत करने से पहले हमें गायत्री मंत्र का उपचार करना जरूरी है क्योंकि जय गायत्री  जी का सबसे बड़ा मंत्र है जिससे इंसान अपनी सारी इंद्रियों पर काबू पाता है।

और पढ़ें: सूर्य नमस्कार के नियम, फायदे, और करने का तरीका

निष्कर्ष – Conclusion

सभी मनुष्यों को अपनी सुबह प्राणायाम से शुरू करना चाहिए, जिसके तत्पश्चात मनुष्य अपने दिन को अच्छा बनाता है। हम अपनी जरूरत के हिसाब से प्राणायाम कर सकते हैं जिसके कारण मनुष्य की सारी परेशानियां दूर होती हैं। जो के आधार पर प्राणायाम के बहुत सारे प्रकार हैं जिनमें अलग-अलग रूप से प्राणायाम करना होता है। हर प्राणायाम के अपने ही फायदे तथा नुस्खे हैं जो हमारे लिए अत्यंत लाभकारी साबित होंगे।

कोई भी योग जरूरी ही की वो प्राणायाम हो, हमारे जीवन को सरल बनता है| हमें इस योग को करने से कई लाभ प्राप्त होते है जिससे बच्चा, बड़ा और जवान इस के लाभ के आनंद ले सकता है| ये आसन इतना सरल है  की कोई के उम्र के व्यक्ति भी इस आसन को कर सकता है| जिन लोगो को अपने शरीर से शिकायत है, वो सारी शिकायत अपनी इस योग के माधयम से हठा सकते है|

सभी मनुष्यों को प्राणायाम नियमित रूप से प्रतिदिन करना चाहिए क्योंकि इस प्राणायाम को करने से 50 से ज्यादा लाभ मनुष्य को होते हैं जिस कारण से वह आने वाली समस्या को आसानी तरीके से हल कर सकते हैं| जानकारों द्वारा बताया गया है कि प्राणायाम करने से हमारे समस्त मैं सुधार आता है और बल बुद्धि तथा शरीर का विकास होता है| हमें एक नाक से सांस लेना होता है फिर कुछ समय रुक कर दूसरे नाक से हवा छोड़ने रहती है| इसी क्रिया को हमें बार बार दौरा ना होता है जिस कारण से सांस लेने से सारी समस्या हाल हो सकती हैं| परंतु मनुष्य आजकल अपने जीवन में इतना बिजी है कि उसके पास आसन करने का टाइम बिल्कुल नहीं है| परंतु इसके विपरीत जो व्यक्ति अपने जीवन में किसी भी आसान को महत्व देता है वह हमेशा आगे बढ़ता है तथा अपने जीवन में हमेशा तरक्की करता है| देखा जाए तो प्राणायाम का हर इंसान के जीवन में सोने जैसा अधिक मूल्य है, परंतु मनुष्य को इसका महत्व का पता नहीं है| मनुष्य इस चीज को नजरअंदाज करता है इसके कारण उसे ही सफर करना पड़ता है, और फिर वह अपने भाग्य को कोसता है, जिसके कारण वह सभी मनुष्यों से पीछे रहता है|

आजकल सारे शहरी व्यक्ति योग के अलावा सारे काम करते हैं परंतु उनका ध्यान योग पर कभी नहीं आता है, जिसके कारण उनके वृद्धावस्था में जब उनके शरीर में कोई परेशानी का अपव्यय होता है तो फिर वाह योग साधना करना शुरू करते हैं|यदि हम सभी अपने जीवन के पहले चरण में ही योग करना शुरू करते हैं तो हमें आखरी में दिक्कत का सामना करना नहीं पड़ेगा|इसलिए हम सभी लोगों को साधना करना है जैसे हमारा जीवन को लाभ मिले|

जिस प्रकार हमें हमारे लक्ष्य को पाने के लिए सभी कठिन मेहनत करते है, उसी प्रकार यदि हमें अपने जीवन को कारगर बनाना है तो हमें हमारे जीवन में प्राणायाम को ऐड करना होगा|

Vidyadhar Joshi
Mr. Joshi earned his diploma in Yoga education with high honors from the Kaivalyadham Yoga Institute. Since 1975, Mr. Joshi has been teaching Yoga Theory and Practice and has successfully trained countless students. He has trained variety of students from all walks of life and ranging from young to seniors. Mr. Joshi is recognized as a National Yoga Champion and has been honored with several awards throughout India. Mr. Joshi has also conducted a large number of Yoga camps in the state of Maharashtra.

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