अस्थमा (दमा) के कारण, लक्षण, उपचार एवं बचाव – Asthma Causes, Symptoms, Treatment And Prevention in Hindi

asthma in Hindi

विषय सूची

उपक्षेप – Introduction

क्या आपको पता है, दुनिया में हर 10 अस्थमा के मरीज़ में 1 मरीज़ भारत में होता है? ग्लोबल अस्थमा रिपोर्ट 2018 के अनुसार, भारत की कुल आबादी में से 6% बच्चे और 2% वयस्कों को अस्थमा था। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार भारत में 2015 में अस्थमा के कुल 35 करोड़ से ज़्यादा मरीज़ थे और 2015 में ही अस्थमा से मरने वाले लोगों की संख्या 4 लाख थी।  

वायु प्रदुषण का अस्थमा पर प्रभाव के बारे में कई शोधकर्ताओं ने बात करी है। वायु प्रदुषण से अस्थमा के लक्षण बढ़ जाते हैं तथा अस्थमा का दौरा आने का खतरा भी बढ़ जाता है। दूषित वायु में कुछ खतरनाक पदार्थ मौजूद होते हैं। ये पदार्थ हमारे श्वसन तंत्र (respiratory tract) को नुकसान पहुँचाते हैं। वायु प्रदुषण के कारण एक स्वस्थ इंसान भी बीमार पड़ सकता है। वायु प्रदुषण का सबसे बुरा प्रभाव बच्चों पर पड़ता है। लम्बे समय तक वायु प्रदुषण के संपर्क में आने के कारण बच्चों को भी अस्थमा जैसी बिमारी हो जाती हैं।

दिन-प्रतिदिन एयर क्वालिटी की गिरती हालत इस बात का संकेत है कि आने वाले वक़्त में अस्थमा जैसी बिमारी और भयावह रूप धारण कर सकती है। लंग केयर फाउंडेशन के संस्थापक और सर गंगा राम हॉस्पिटल में चेस्ट सर्जन, डॉक्टर अरविन्द कुमार वायु प्रदुषण के संकट को एक आपातकाल जैसा बताते हैं। लंग केयर फाउंडेशन के द्वारा की गई एक अध्ययन के मुताबिक, दिल्ली की हवा के कण में मैंगनीज, सीसा, निकल, बेरियम, सिलिकॉन और आयरन के उच्च स्तर मौजूद थे। ये सारे धातु लोग सांस के द्वारा अपने फेफड़ो और शरीर तक पहुँचा रहे हैं। ऐसे खतरनाक धातुओं के संपर्क में आने से कई बिमारियों का खतरा बढ़ जाता है। 

इन सारे तथ्यों से ये बात साफ़ हो जाती है कि अस्थमा एक बहुत ही आम और खतरनाक बिमारी है। कहीं ना कहीं लोगों को इस बिमारी की पूरी जानकारी नहीं होती। इस लेख में हमने अस्थमा और उस से जुड़े सारे महत्वपूर्ण बातों का उल्लेख किया है। आप इस लेख को अपने जान-पहचान के लोगों के साथ ज़रूर साँझा करें ताकि अस्थमा और उस से जुड़ी जानकारी उन तक पहुँचे। 

अस्थमा क्या है – What is Asthma in Hindi?

अस्थमा एक ऐसी स्तिथि है जिसमें हमारे फेफड़ों में मौजूद वायुमार्ग संकीर्ण होने के साथ-साथ सूज जाते हैं। इसके अलावा हमारे फेफड़ों में अतिरिक्त बलगम भी बनना शुरू हो जाता है। इन सब दिक्कतों की वजह से सांस लेने में तकलीफ होना शुरू हो जाती है। साथ ही खाँसी और सांस लेते वक़्त घरघराहट की आवाज़ आने लगती है। 

कुछ लोगों के लिए अस्थमा जैसी बिमारी के मामूली बाधा होती है। लेकिन कुछ लोगों के लिए ये एक बहुत ही खतरनाक बिमारी बन जाती है। ये लोगों के रोज़मर्रा के कामों में दखल दे सकती है साथ ही साथ अस्थमा का दौरा कभी-कभी जानलेवा भी साबित हो सकता है। अस्थमा को ठीक नहीं किया जा सकता मगर इसके कारणों को नियंत्रित किया जा सकता है। आगे हम आपको अस्थमा के कारणों अथवा उनको नियंत्रित करने के तरीके बताएँगे।

अस्थमा एक गैर-संक्रामक रोग है। अस्थमा रोगी के संपर्क में आने से ये रोग फैलता नहीं है। कई लोगों को अस्थमा के एक संक्रामक रोग होने की ग़लतफ़हमी रहती है मगर ऐसा बिलकुल नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अलावा कई ऐसी संस्था है जिसने अस्थमा के संक्रामक रोग होने की बात का खंडन किया है। हालाँकि अस्थमा एक दीर्घकालीन बिमारी (chronic disease) ज़रूर है और लम्बे समय तक किसी को परेशान कर सकती है। 

अस्थमा (दमा) के प्रकार – Types of Asthma in Hindi

अस्थमा को समझने के बाद ज़रूरी है कि हम उसके प्रकार को समझें। बहुत से लोग जिन्हे अस्थमा होता है या अस्थमा जैसा लक्षण दिखाई देता है, ये समझ नहीं पाते कि वो किस तरीके के अस्थमा का शिकार हैं। अगर आपको अस्थमा के प्रकार के बारे में पता होगा तो आप उन चीज़ों से खुद को आसानी से दूर कर पाएँगे जिनकी वजह से अस्थमा का दौरा आता है। अस्थमा निम्नलिखित प्रकार का हो सकता है:

एलर्जिक अस्थमा (Allergic Asthma)

इसे एटॉपिक अस्थमा (Atopic Asthma) भी कहते हैं। ये अस्थमा का वो प्रकार है जो किसी ऐसी चीज़ के संपर्क में आने से होता है जिससे इंसान को एलर्जी हो। ये चीज़ें पराग (pollen), पालतू जानवर या धुल के कण हो सकते हैं।  

सीजनल अस्थमा (Seasonal Asthma)

ये अस्थमा का वो प्रकार है जो किसी विशिष्ट स्तिथि में इंसान को होता है, जैसे ठण्ड या गर्मी के मौसम में। वैसे तो अस्थमा एक दीर्घरूपी बिमारी है लेकिन सीजनल अस्थमा के लक्षण विशिष्ट स्तिथि के अनुपस्तिथि में ख़त्म हो जाते हैं। 

ऑक्यूपेशनल अस्थमा (Occupational Asthma)

ये अस्थमा का वो रूप है जो किसी इंसान को उसके द्वारा किये जाने वाले काम के कारण होता है। किसी को ऑक्यूपेशनल अस्थमा हो सकता है अगर उन्हें:

  • अस्थमा के लक्षण वयस्क बनने के बाद दिखने शुरू हुए हों। 
  • अस्थमा के लक्षण उस दिन नज़र नहीं आते जिस दिन वो काम ना कर रहे हो। 

नॉन-एलर्जिक अस्थमा (Non-Allergic Asthma)

ये अस्थमा का वो रूप है जो बिना किसी एलर्जी के इंसान को होता है। इसके कारण ठीक तरीके से अभी तक पता नहीं चल पाए हैं। ये इंसान को एक उम्र के बाद ही होता है। 

एक्सरसाइज एनडूस्ड अस्थमा (Exercise Induced Asthma)   

इस प्रकार के अस्थमा के कारण किसी विशेष व्यायाम के बाद नज़र आते हैं। 

एडल्ट ऑनसेट अस्थमा (Adult Onset Asthma)

वयस्क उम्र में अस्थमा के लक्षण दिखने को एडल्ट ऑनसेट अस्थमा कहते हैं। 

चाइल्डहुड अस्थमा (Childhood Asthma)

अस्थमा की शुरुआत ज़्यादातर बचपन में ही हो जाती है। ऐसा अस्थमा जो किसी बच्चे को बचपन में हुआ हो और वयस्क उम्र आते-आते खत्म हो जाए या कम हो जाए, चाइल्डहुड अस्थमा कहलाता है। इस प्रकार के अस्थमा के लक्षण एक उम्र के बाद दोबारा नज़र आ सकते हैं।   

अस्थमा (दमा) के कारण – Causes of Asthma in Hindi

अभी तक हमें ये नहीं पता कि अस्थमा होने का सटीक कारण क्या है? बहुत सी ऐसी चीज़ें हैं जिनकी वजह से शायद किसी को अस्थमा हो सकता है। वो चीज़ जिसकी वजह से किसी को अस्थमा का दौरा पड़ता है उसे वैज्ञानिक अस्थमा ट्रिगर कहते हैं। हर व्यक्ति जिसे अस्थमा है, उसका अस्थमा ट्रिगर अलग हो सकता है। एक घर में रहने वाले दो लोगों को अगर अस्थमा है तो उनका अस्थमा ट्रिगर भी अलग-अलग हो सकता है। अगर किसी व्यक्ति को अस्थमा है तो उसके अस्थमा ट्रिगर को पहचानना सबसे ज़रूरी है। एक बार अगर इसके बारे में पता चल गया तो अस्थमा के दौरे का प्रभाव काम किया जा सकता है। 

आइये क्या-क्या चीज़ें अस्थमा ट्रिगर हो सकती है, उन्हें समझते हैं। 

  • एलर्जी: अगर आपको किसी चीज़ से एलर्जी है तो वो एक अस्थमा ट्रिगर हो सकता है। अगर ऐसे किसी चीज़ के संपर्क में आने पर आपको अस्थमा का दौरा आता है तो आपको उस चीज़ से दूरी बना कर रखनी है। 
  • खाना: क्या आपको किसी विशेष तरीके का खाना खाने के बाद अस्थमा के लक्षण दिखाई देते हैं? अगर हाँ, तो वो खाना आपके लिए अस्थमा ट्रिगर है। 
  • व्यायाम: कभी-कभी कोई व्यायाम करने के बाद आपको अस्थमा के लक्षण अपने शरीर में दिखने शुरू हो जाते होंगे। अगर आपके साथ ऐसा होता है तो आपको वो व्यायाम नहीं करना चाहिए। 
  • सिगरेट: कुछ लोगों को सिगरेट और इसके धुएँ से अस्थमा का दौरा पड़ सकता है। अगर आपके साथ ऐसा कभी भी हुआ है तो आपको सिगरेट और सिगरेट पीने वाले लोगों से दूरी बना कर रखनी चाहिए। 
  • साइनसाइटिस (Sinusitis): ये एक ऐसी बिमारी होती है जिसमे हमारे शरीर में मौजूद साइनस में सूजन हो जाती है। इसकी वजह से वहाँ बलगम इक्कट्ठा हो जाता है। अगर किसी को अस्थमा है और उनके साइनस में सूजन हो जाता है तो वायुमार्ग में भी सूजन हो सकता है। इस वजह से अस्थमा का दौरा पड़ सकता है। साइनस का तुरंत और पूर्ण रूप से इलाज, अस्थमा के खतरे को कम कर देता है। 
  • दवाइयाँ: कभी-कभी कुछ ऐसी दवाइयां होती है जो हमारे शरीर को फायदा पहुँचाने के बजाय नुकसान पहुंचाते हैं। अगर ऐसा ही कोई दवा अस्थमा के लक्षण का कारण बनती है तो आपको तुरंत रूप से उसका सेवन बंद कर देना चाहिए। 
  • मौसम: अगर आपको किसी एक मौसम में अस्थमा की शिकायत रहती है और जैसे ही वो मौसम खत्म होता है तो आपका अस्थमा खत्म हो जाता है। इस स्तिथि में आपका अस्थमा ट्रिगर वो मौसम है। आपको उस मौसम के शुरुआत और अंत में खुद का अच्छे रूप से ख्याल रखने की ज़रुरत है। 

जब किसी को अस्थमा होता है तो उनके वायुमार्ग में सूजन हो जाता है तथा वायुमार्ग काफी ही संवेदनशील हो जाते हैं। जैसे ही कोई अस्थमा ट्रिगर वायुमार्ग के संपर्क में आता हैं तो वायुमार्ग और सूज जाते हैं। इसके साथ ही उसमे बलगम जमा हो जाता है और वो वायुमार्ग को जाम कर देता है। इसके वजह से सांस लेने में तकलीफ होने लगती है और अस्थमा का दौरा पड़ जाता है। लेकिन ये दौरा ठीक उसी वक़्त पड़े ऐसा ज़रूरी नहीं है। अस्थमा का दौरा, ट्रिगर के संपर्क में आने के कुछ दिन या हफ़्तों बाद भी पड़ सकता है। 

आप खुद इस चीज़ को समझ सकते हैं कि आपका अस्थमा ट्रिगर क्या है। इसके अलावा डॉक्टर खून की जाँच करके भी अस्थमा ट्रिगर का पता लगा लेते हैं। इसके अलावा एक यंत्र होता है जिसे कहते हैं, पीक फ्लो मीटर। ये मीटर इस बात की जाँच करता है की आप कितना हवा अपने फेफड़ो से बाहर छोड़ रहे हैं और वो कितनी देर में फेफड़ों से बाहर आ जाता है।

अस्थमा के जोखिम – Risk Factors of Asthma in Hindi

जोखिम कारकों के आस-पास रहने से अस्थमा और सांस संबंधी बिमारियों की संभावना बढ़ जाती है। लेकिन अस्थमा होने के लिए किसी जोखिम कारक का ही होना ज़रूरी हो ऐसा नहीं है। कभी-कभी लोगों को अस्थमा बिना किसी जोखिम कारकों के भी हो जाती है। इस अनुभाग में हम अस्थमा के जोखिम कारकों के बारे में समझेंगे। हम ये भी देखेंगे कि कैसे ये जोखिम कारकों के कारण अस्थमा के कारणों की उत्पत्ति होती है। इन सब कारकों को समझने के बाद ये ज़रूरी है कि आप इन कारकों से खुद को दूर करें और अपनी जीवनशैली में परिवर्तन करें।

चाइल्डहुड अस्थमा लड़कियों से ज़्यादा लड़कों को प्रभावित करता है। इसका सटीक कारण अज्ञात है। लेकिन कुछ शोधकर्ता ये बताते हैं कि लड़कों का वायुमार्ग लड़कियों के मुकाबले आकार में छोटा होता है। इस कारण से जुखाम, संक्रमण या एलर्जी के बाद वायुमार्ग के बंद होने कि संभावना लड़कियों से ज़्यादा लड़कों में होती है। 20 साल की उम्र तक पुरुषों और महिलाओं में अस्थमा का अनुपात समान होता है। 40 की उम्र तक आते-आते पुरुषों की तुलना में महिलाओं को वयस्क अस्थमा ज़्यादा होता है। 

अनुवांशिक

अस्थमा एक अनुवांशिक बिमारी (genetic disease) है। दुनिया में 5 में से 3 अस्थमा का मामला इसी वजह से होता है। एक स्टडी के मुताबिक, अगर किसी के माता-पिता को अस्थमा है या था तो उन्हें अस्थमा होने की संभावना 3 से 6 गुना बढ़ जाती है। 

अटॉपी (Atopy) एक अनुवांशिक प्रवृति है जिसमे खुजली, एलर्जी रिनिथिस (Allergic Rhinitis), एलर्जी नेत्रश्लेष्मलाशोथ (Allergic Conjunctivitis) और अस्थमा की संभावना बढ़ जाती है। अटॉपी के वजह से हवा और खाने के कारण एलर्जी होने की उम्मीद भी बढ़ जाती है। जिन बच्चों को अटॉपी होती है उन्हें अस्थमा का खतरा तो होता ही है लेकिन वयस्क उम्र तक आते-आते ये अस्थमा काफी गंभीर हो जाता है। एलर्जी की वजह से अस्थमा के खतरे के बारे में में हमने पहले ही आपको बताया है। एलर्जी एक ऐसी चीज़ है जिसे दवाई के सहारे काम किया जा सकता है। 

वायु प्रदुषण

घर के अंदर का वायु प्रदुषण जो की सिगरेट के धुएँ, घरेलू क्लीनर के धुएँ, और पेंट के कारण होता है, इसकी वजह से भी अस्थमा होने का खतरा बढ़ जाता है। पर्यावरण प्रदूषण, सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, ओजोन, ठंडे तापमान और नमी भी अस्थमा का खतरा बढ़ा देते हैं। प्रदुषण एक ऐसी खतरनाक चीज़ है जिसके कारण कई तरीके की बिमारी हो जाती हैं। जैसे ही प्रदुषण बढ़ता है, लोगों को अस्थमा के दौरे पड़ने के मामले बहुत बढ़ जाते हैं। ओजोन धुंध में मौजूद होता है। इसकी वजह से खाँसी, साँस लेने में कठिनाई, और सीने में दर्द होना शुरू हो जाता है। ये सारे कारण अस्थमा के खतरे को बढ़ा देते हैं। धुंध में सल्फर डाइऑक्साइड भी मौजूद होता है। इसकी वजह से वायुमार्ग में जलन हो सकता है और साँस लेने में दिक्कत भी हो सकती है, इन दोनों वजहों के कारण अस्थमा के दौरे पड़ना आम बात है। 

नाइट्रोजन डाइऑक्साइड गैस

गैस स्टोव से नाइट्रोजन डाइऑक्साइड गैस उत्पन्न होती है। नाइट्रोजन डाइऑक्साइड से साँस लेने में तकलीफ, बुखार और अस्थमा भी हो सकता है। मौसम के बदलने का भी कुछ लोगों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। ठण्ड में वायुमार्ग में सिकुड़न हो जाती है जिसकी वजह से बलगम ज़्यादा बनने लगता है। सिगरेट और उसके धुएँ से भी अस्थमा का खतरा बढ़ जाता है। सिगरेट के नुकसान के कई सबूत मौजूद है। अस्थमा से बचने के लिए सिगरेट से दूरी बनानी ज़रूरी है। 

मोटापा

जिन लोगों का वजन अधिक होता है उन्हें अस्थमा का खतरा ज़्यादा होता है। अधिक वजन होने की वजह से अस्थमा भी अनियंत्रित हो जाता है और इसे काबू करने के लिए इंसान को लम्बे समय तक दवाइयों पर निर्भर रहना पड़ता है। 

अस्थमा (दमा) के लक्षण – Symptoms of Asthma in Hindi

किसी भी बिमारी को समझने के लिए उसके लक्षणों को समझना बहुत ज़रूरी होता है। अस्थमा के कुछ लक्षण ऐसे होते हैं, जो शुरू में काफी साधारण लगते हैं और लोग उन पर ध्यान नहीं देते। यही एक सबसे बड़ी वजह है कि अस्थमा इतनी भयानक और खतरनाक बिमारी है।  शुरूआती संकेत जिन्हे लोग समझ नहीं पाते और ये बिमारी भयावह बिमारी में तब्दील हो जाती है, कुछ इस प्रकार है:

अस्थमा (दमा) के सामान्य लक्षण

  • लगातार खांसी का होते रहना
  • साँस की तकलीफ होना
  • व्यायाम करते वक़्त थकान और कमज़ोरी का महसूस होना
  • व्यायाम के बाद साँस में घरघराहट की आवाज़ आना 
  • थकान महसूस करना, आसानी से परेशान होना, जी घबराना या मूडी होना
  • एलर्जी का होना
  • सोने में दिक्कत होना

इनमें से किसी भी लक्षण के दिखने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। 

अस्थमा एक दीर्घकालीन बिमारी है। इसका मतलब ये है कि एक बार ये बिमारी हो गई तो काफी लम्बे समय तक इंसान के पीछे पड़ी रहती है। चूँकि इसे पूरे तरीके से ठीक नहीं किया जा सकता इसीलिए एक बार ये बिमारी होने पर इसका ज़िन्दगी भर प्रभाव रहने की संभावना भी होती है। अस्थमा में हमारी स्वास नली में सूजन हो जाती है। इसकी वजह से वायुमार्ग में बलगम जम जाता है। कुछ आम दिक्कतें जो अस्थमा के मरीज़ों को होती है वो है:

  • खाँसी का होना खासकर रात के वक़्त में
  • साँस लेते वक़्त घरघराहट की आवाज़ आना
  • साँस का फूलना
  • सीने में जकड़न, दर्द और दबाव का होना 

ज़रूरी नहीं की ये सारी दिक्कतें हर अस्थमा के मरीज़ को हो। कुछ मरीज़ों को सिर्फ एक लक्षण भी हो सकते हैं। एक अस्थमा दौरे के दौरान किसी को कुछ लक्षण dikh सकते हैं और अगले दौरे में कुछ और लक्षण। कुछ लोगों को कई दिनों तक अस्थमा का दौरा नहीं पड़ता और कुछ लोगों को रोज़ इससे हो कर गुज़ारना पड़ता है। अस्थमा के दौरे पड़ने पर वायुमार्ग में मौजूद मांसपेशी तंग हो जाते हैं, इसे ब्रोन्कोस्पासम (Bronchospasm) कहते हैं। इसी वक़्त वायुमार्ग में सूजन हो जाती है और इसकी वजह से गाढ़ा बलगम बनना शुरू हो जाता है। 

इन सब चीज़ों के एक साथ होने की वजह से साँस लेने में दिक्कत, घरघराहट की आवाज़, खाँसी का होना, साँस फूलना और रोजमर्रा के कम को करने में दिक्कत महसूस होना शुरू हो जाता है। अस्थमा के दौरे के कुछ और लक्षण इस प्रकार है:

वयस्कों में अस्थमा के लक्षण

  • साँस लेने और छोड़ते वक़त घरघराहट की आवाज़ आना
  • बिना रुके खाँसी का आना
  • तेज़-तेज़ साँसें लेना
  • छाती में दर्द और दबाव का महसूस होना
  • गर्दन और छाती के माँसपेशियों में जकड़न 
  • बातें करने में दिक्कत होना
  • चिंता और घबराहट महसूस करना
  • पीला और पसीने से तर चेहरा होना
  • होंठ और नाखून का नीला पड़ जाना

दमें का इलाज अगर समय पर रोगी को नहीं मिले तो उनका बोलना बंद हो सकता है और उनके होंठ नीले पड़ सकते हैं। ये संकेत होता है कि खून में ऑक्सीजन की कमी हो गई है। अगर समय पर इलाज नहीं हुआ तो इंसान बेहोश भी हो सकता है और जान जाने का खतरा भी होता है। 

बच्चों में अस्थमा के लक्षण

बच्चों में अस्थमा के लक्षण वयस्कों से कुछ अलग होते हैं। बच्चों में अस्थमा के लक्षण कुछ इस प्रकार होते हैं:

  • लगातार खाँसी का होना
  • खेलते वक़्त, रात के वक़्त, ठन्डे मौसम में, हँसते हुए या खेलते हुए खाँसी का बिना रुके होना
  • वायरल इन्फेक्शन के बाद खाँसी और ख़राब हो जाती है
  • खेल के दौरान कम ऊर्जा का होना या बीच खेल में साँस लेने के लिए रुकते रहना
  • खेल या सामाजिक गतिविधियों से बचना
  • खाँसी और साँस लेने में दिक्कत की वजह से नींद ना आना
  • तेज़-तेज़ साँसें लेना

अस्थमा (दमा) का इलाज – Treatment of Asthma in Hindi

अस्थमा को पूरे तरीके से खत्म नहीं किया जा सकता लेकिन इसके प्रभाव को काम किया जा सकता है। अस्थमा के प्रभाव को काम करने के लिए पहले कुछ टेस्ट्स करना ज़रूरी होता है। इन टेस्ट के द्वारा डॉक्टर अस्थमा की पुष्टि करते हैं। एक बार ये साबित हो जाए कि किसी इंसान को अस्थमा है तो फिर उसे दवाई दे कर स्तिथि को सुधारा जा सकता है। अस्थमा की पुष्टि करने के लिए निम्न तरीका अपनाया जाता है:सबसे पहले डॉक्टर शारीरिक जाँच करते हैं। अस्थमा के लक्षण बहुत से अन्य साँस से जुड़ी बिमारियों जैसी होती है इसीलिए शारीरिक जाँच के द्वारा अन्य बिमारी के शक को मिटाया जाता है। 

शारीरिक जाँच में सबसे पहले फेफड़ों का परिक्षण किया जाता है। इस परिक्षण में कुछ टेस्ट किये जाते हैं और ये देखा जाता है कि साँस लेते और छोड़ते वक़्त कितनी हवा शरीर के अंदर और बाहर जाती है। इसे निम्न टेस्ट के द्वारा जाँचा जाता है:

  • स्पिरोमेट्री (Spirometry): इस टेस्ट के द्वारा स्वास नली की संकीर्णता की जाँच की जाती है। साथ ही एक अनुमान लगाया जाता है कि मरीज़ एक गहरी साँस लेने के बाद कितनी हवा निकाल सकते हैं और कितनी तेजी से साँस छोड़ सकते हैं। 
  • पीक फ्लो (Peak Flow): पीक फ्लो मीटर एक ऐसा यन्त्र होता है जिसके द्वारा ये देखा जाता है कि मरीज़ कितनी तेज़ी से साँस छोड़ते हैं। अगर इस टेस्ट का परिणाम कम आता है तो इसका मतलब है कि फेफड़े सही से कम नहीं कर रहे और अस्थमा तेज़ी से फेफड़ों को नुकसान पहुँचा रहा है।

फेफड़ों का परिक्षण ब्रांकोडायलेटर (Bronchodilator) दवाई लेने के बाद किया जाता है। इस दवाई से फेफड़ों में मौजूद वायुमार्ग खुल जाते हैं। इस दवाई की मदद से दो बार टेस्ट किया जाता है, एक बार बिना दवाई लिए और एक बार दवाई लेने के बाद। अगर दवाई लेने से फेफड़े के कार्य करने में कोई भरी परिवर्तन आता है तो इसका मतलब है कि मरीज़ को अस्थमा कि बिमारी है। 

कुछ और टेस्ट जो अस्थमा के निदान करने में मदद करते हैं, वो कुछ इस प्रकार के हैं:

  • मेथाचोलिन चैलेंज (Methacholine Challenge): मेथाचोलिन एक अस्थमा ट्रिगर है। इसको लेने के बाद अस्थमा मरीज़ों की श्वास नली सिकुड़ जाती है। अगर ऐसा होता है मरीज़ को अस्थमा है वरना नहीं है। इस टेस्ट को तब किया जाता है जब ऊपर के दो टेस्ट का परिणाम नार्मल आता है। 
  • इमेजिंग टेस्ट (Imaging Test): इस टेस्ट में एक्स-रे के द्वारा फेफड़ों में संरचनात्मक असामान्यताएं या रोग (जैसे संक्रमण) के होने या ना होने की पुष्टि की जाती है। अगर ऐसा कुछ किसी इंसान के फेफड़ों में पाया जाता है तो उसे सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। 
  • एलर्जिक टेस्टिंग: इस टेस्ट के द्वारा इंसान को जिस चीज़ से एलर्जी है उसका पता लगाया जाता है। ये स्किन या ब्लड टेस्ट के द्वारा किया जाता है। 

एक बार अस्थमा की पुष्टि हो जाने के बाद उनका वर्गीकरण किया जाता है। ये वर्गीकरण अस्थमा की तीव्रता को देख कर किया जाता है। अस्थमा को तीव्रता के अनुसार निम्न वर्गों में बाँटा जाता है:

  • माइल्ड इंटरमिटेंट (Mild Intermittent): अस्थमा के लक्षण काफी हल्के होने के साथ-साथ हफ्ते में दो दिन और महीने में दो रातों तक दिखते हैं। 
  • माइल्ड परसिस्टेंट (Mild Persistent): अस्थमा के लक्षण हफ्ते में दो से ज़्यादा बार देखे जा सकते हैं लेकिन एक दिन में एक बार से ज़्यादा नहीं देखे जाते। 
  • मॉडरेट परसिस्टेंट (Moderate Persistent): अस्थमा के लक्षण दिन में एक बार और रात में हफ्ते में एक बार से ज़्यादा बार देखे जाते हैं। 
  • सीवियर परसिस्टेंट (Severe Persistent): अस्थमा के लक्षण पूरे दिन और रात में कई बार देखे जाते हैं। 

अस्थमा के लक्षणों को काम करने के लिए इनहेलर काम में आता है। ये अस्थमा की दवाई को सीधा फेफड़ों तक पहुँचा देता है और सूजन से राहत दिलाता है। डॉक्टर द्वारा निर्धारित इनहेलर का इस्तेमाल बताये गए तरीके और अवधि पर करने से अस्थमा के लक्षणों को काम किया जा सकता है। 

अस्थमा (दमा) से बचाव – Prevention of Asthma in Hindi

अस्थमा जैसी बिमारी हमारे श्वास प्रणाली को पूरा रूप से खत्म करने का माद्दा रखती है। साथ ही साथ ये हमारी रोजमर्रा की ज़िन्दगी को भरी रूप से नुकसान पहुँचा सकती है। अस्थमा हमें प्रभावित करे उस से पहले हमें खुद को सतर्क कर लेना चाहिए।आज के वक़्त में जहाँ वायु प्रदुषण अपने चरम सीमा पर है, ऐसे समय में ये ज़रूरी है कि हम अस्थमा से खुद को बचाने की कोशिश करें। अस्थमा से बचाव के कुछ तरीके जो हर कोई अपना सकता है वो ये हैं:

  • अस्थमा ट्रिगर वो चीज़ें होती हैं जिनके संपर्क में आने से हमें अस्थमा के दौरे पड़ सकते हैं। अस्थमा ट्रिगर का पहचान करके उनसे दूरी बना के रखें। 
  • एलर्जी पहुँचाने वाली चीज़ों से खुद को जितना हो सके उतना दूर रखें। एलर्जी होने से अस्थमा होने का खतरा बहुत रूप से बढ़ जाता है। 
  • धुआँ चाहे सिगरेट का हो या अन्य किसी चीज़ का, हर तरीके के धुएँ से खुद को दूर रखने की कोशिश करनी चाहिए। 
  • जिन लोगों को फ्लू हो उनके निकट ना जाएँ। ऐसा करने पर अस्थमा का खतरा बढ़ सकता है। 
  • आप अपने घर को एलर्जी-प्रूफ करवा सकते हैं। जब आप घर से बहार निकलें तो भी इस चीज़ का ध्यान रखें की जहाँ भी आप जा रहें हो वहां कोई ऐसी चीज़ ना हो जिससे एलर्जी होने का खतरा हो सके। 
  • फ्लू और भी ऐसी कई बिमारियाँ होती हैं जिनका टीका आसानी से हो जाता है। आप अपने डॉक्टर से इस बारे में बात करके खुद को ऐसी बिमारियों से ज़रूर सुरक्षित कर लें। 
  • एलर्जी से आप इम्मुनोथेरपी एलर्जी शॉट्स के द्वारा भी बच सकते हैं। इसमें डॉक्टर आपके शरीर में कुछ एलर्जेंस (Allergens) को वक़्त-वक़्त पर डालते हैं। कुछ वक़्त के बाद शरीर इन एलर्जेंस को पहचान जाता है और इसके खिलाफ प्रतिक्रिया को काम कर देता है। इसके द्वारा आप एलर्जी से बच सकते हैं और साथ-साथ अस्थमा के खतरे को भी काम कर सकते हैं। 

और पढ़ें: हाई बीपी के लक्षण, कारण, उपचार, इलाज, और परीक्षण

निष्कर्ष – Conclusion

अस्थमा एक बेहद ही गंभीर बिमारी है। आज जहाँ हम रोज़ वायु प्रदुषण को एक नया रिकॉर्ड बनाते हुए देख रहें हैं, ऐसे वक़्त में इसका खतरा और बढ़ जाता है। हम सबको अस्थमा जैसी बिमारी से दूरी बना कर रखना चाहिए। हम खुद को स्वस्थ रख कर ही ज़िन्दगी को जी सकते हैं। अस्वस्थ रहने से बहुत से ऐसे अवसर होते हैं जो हमारे हाथ से निकल जाते हैं। अगर हम अपना ख्याल रखेंगे तो शयद हमें देख कर कोई और अपना ख्याल रखना शुरू कर देगा। अगर ऐसी कुछ कड़ी भी बन गई तो एक स्वस्थ समाज का निर्माण हो सकता है। 

इस लेख के माध्यम से हमने आपको अस्थमा और उससे जुड़ी हर एक जानकारी देने की कोशिश करी है। आप इस लेख को अपने जान पहचान के लोगों से ज़रूर साझा करें। सही और सटीक जानकारी से हर किसी का भला हो सकता है। ऐसे बहुत से लोग हैं जिन्हें अस्थमा जैसी खतरनाक बिमारी के बारे में ज़्यादा नहीं पता होता। कुछ ऐसे भी लोग होते हैं जिन्हें अस्थमा के शुरुआती लक्षण दिखने शुरू हो जाते हैं मगर वो इन पर ध्यान नहीं देते। अगर आप ऐसे लोगों को जानते हैं तो उन तक ये लेख पहुँचा कर उनकी और उनके आस-पास के लोगों की मदद ज़रूर करें। 

संदर्भ – References

World Health Organisation on Asthma [1]

The Global Asthma Report 2018 [2]

American Academy of Allergy Asthma & Immunology [3]

Parvaiz A Koul and Raja Dhar on Economic Burden of Asthma in India [4]

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