इरिटेबल बाउल सिंड्रोम के कारण, लक्षण, इलाज एवं बचाव – Irritable Bowel Syndrome (IBS) in Hindi

IBS

विषय सूची

उपक्षेप – Introduction

कहते हैं दिल का रास्ता पेट से हो कर जाता है। हम इंसानों की खुशी पेट से ही जुड़ी होती है, और ज़रा सोचिए किसी खाने पीने के शौकीन व्यक्ति के साथ स्टमक अपसेट जैसी बीमारी हो जाए तो क्या होगा। ऐसे में उसकी पूरी की पूरी लाइफ ही अपसेट हो  सकती है। क्योंकि इंसान खुद को मन पसंद चीज़ों का सेवन कर के ही खुश रखता है, और इस दौरान अगर कुछ खाने पीने का मन न हो या दिल चाहने पर भी कुछ खा न पाने का दुख तो मूड अपसेट होना लाज़मी है, और ये होता है इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS) की वजह से।

वैसे यह कोई खास बीमारी नहीं है या फिर ये भी कह सकते हैं कि इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम कोई बीमारी नहीं है। लेकिन ये बीमारी बड़ी आंत को इफेक्ट करती है जिसकी वजह से पेट के अंदर उथल – पुथल मची रहती है।

इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम पाचन तंत्र की क्रिया में लम्बे समय से लगातार या  बार-बार हो रहे नेगेटिव बदलाव  की वजह से समस्या पैदा होती है। लेकिन इससे बहुत ज्यादा घबराने की ज़रूरत भी नहीं है। बल्कि यह एक साथ होने वाले कई लक्षणों का समूह है जो शरीर और पेट में उथल – पुथल की स्थिति पैदा करते हैं। इस समस्या से पीड़ित व्यक्ति को पेट में असहनीय दर्द और मरोड़ होना स्वाभाविक सी बात है। इसके अलावा पेट में सूजन, गैस बनना, कब्ज और डायरिया जैसे हालात पैदा होना ही इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम के मुख्य लक्षण है।

लम्बे समय तक इस समस्या को नजरअंदाज किया गया तो यह गंभीर बीमारी का रूप ले सकती है। कुछ केस में इस बीमारी से पीड़ित लोगों की आंत में जख्म और क्षति हो सकती है। हालांकि  ऐसे हालात कम ही पैदा होते हैं ।

इस समस्या के शुरूआती दौर में ही  खान-पान, लाइफ स्टाइल  में फेरबदल कर  परेशानी और तनाव को कम किया जा सकता है और इस बीमारी के लक्षणों पर  काबू पाया जा सकता है।

वैसे इरिटेबल बाउल सिंड्रोम नाम की यह बीमारी हर साल कम से कम 10 –15 प्रतिशत लोगों को अपनी गिरफ्त में लेती है। जिसका प्रभाव गंभीर है।

आईए जानते है इरिटेबल बाउल सिंड्रोम क्या है:

इरिटेबल बाउल सिंड्रोम क्या है – What is IBS in Hindi?

इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (आईबीएस) आंत  से जुड़ी सामूहिक लक्षण वाली बीमारी है, जिसमें पेट में असहनीय दर्द, ऐंठन और मरोड़, पेट में सूजन, डायरिया और कब्ज की शिकायत होती है। इसे कई नाम से जाना जाता है।

जैसे -स्पैस्टिक कॉलन, इरिटेबल कॉलन, म्यूकस कॉइलटिस।

इरिटेबल बाउल सिंड्रोम तीन तरह की होती है जो इस प्रकार हैं:

●      आईबीएस डी

●      आईबीएस सी

●      आईबीएस एम

इरिटेबल बाउल सिंड्रोम आईबीएस डी के लक्षण मुख्य रूप से डायरिया की शिकायत होती है जबकि इरिटेबल बाउल सिंड्रोम आईबीएस सी में कब्ज के लक्षण होते हैं। इरिटेबल बाउल सिंड्रोम आईबीएस एम में दोनों के लक्षण होते हैं। आमतौर पर मरीज को पेट के दर्द की शिकायत होती है। इस परेशानी का पता लगाने के लिए कोई टेस्ट नहीं है। इन लोगों के सभी टेस्ट जैसे सी बी सी, सोनोग्राफी, एंडोस्कोपी, सीटी स्कैन, मल जांच की रिपोर्ट नॉर्मल आती है। यह परेशानी लंबे समय तक होती है, लेकिन लाइफ स्टाइल में थोड़ा बहुत बदलाव करके इससे निजात पाया जा सकता है।

ये बीमारी जेनेटिक नहीं है। ज्यादातर यह बीमारी उन्हीं लोगों में होती है जो ज्यादा से ज्यादा  स्ट्रेस या तनाव में रहते हैं। जिन लोगों को रात में ठीक से नींद नहीं आती उन्हें भी इसकी शिकायत रहती है। अगर कोई दिमागी बीमारी से पीड़ित, ऐसे लोगों को भी यह बीमारी अपनी गिरफ्त में  ले सकती है।

इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (आईबीएस) से ग्रसित बहुत कम लोगों में गंभीर लक्षण होते हैं। कुछ लोग डाइट यानी आहार, लाइफ स्टाइल और तनाव में तालमेल   इसके लक्षणों को काबू में  कर सकते हैं। ज्यादा खतरनाक लक्षणों का इलाज दवा और किसी चिकित्सक के परामर्श के साथ किया जा सकता है।

इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम के लक्षण – Irritable Bowel Syndrome in Hindi

इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम के लक्षण सभी में अलग अलग हो सकते हैं। इनमें से कुछ आम लक्षण इस प्रकार  हैं:

पेट में दर्द,पेट में ऐंठन और मरोड़, बहुत ज्यादा गैस बनना, आंत का ठीक से काम न करना, दस्त की शिकायत, तनाव, उलझन, कब्ज की दिक्कत, नींद न आना, शरीर में खून की मात्रा कम हो जाना, शरीर में पानी की कमी होना, अपच की दिक्कत, जी मिचलाना, पेट सही से साफ ना हो पाना, बार-बार मल त्याग महसूस होना इत्यादि।

यदि आपके बॉवेल मूवमेंट में लगातार बदलाव हो रहा है या इरिटेबल बाउल सिंड्रोम क्या के दूसरे लक्षण नजर आ रहे हैं तो आपको फौरन किसी डॉक्टर से सलाह मशविरा करना चाहिए। ये कोलोन कैंसर जैसे ज्यादा खतरनाक हालात की तरफ इशारा हो सकता है।

इस बीमारी के ज्यादा खतरनाक इशारे और लक्षण में शामिल कुछ पहलू पर नजर डालते हैं: जैसे लगातार वजन कम होना, रात के समय में डायरिया की समस्या होना, रेक्टल ब्लीडिंग, आयरन की कमी एनीमिया, बिना किसी वजह से उल्टी होना, खाना पीना  निगलने में दिक्कत होना, लगातार दर्द होना।  गैस पास या बॉवेल मूवमेंट के बावजूद भी ठीक न होना इत्यादि।

इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम के कारण – Causes of Irritable Bowel Syndrome in Hindi

इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम की सही वजह की कोई जानकारी नहीं है, लेकिन कुछ पहलू  इसमें अपनी अहम भूमिका निभाते हैं।

आंत में मांसपेशियों का सिकुड़ना

आंतों की दीवार मांसपेशियों की परतों से पंक्तिबद्ध होती हैं, जो खाने को पेट से आंत के जरिये से पाचन नली में ले जाती हैं। अगर आप इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम से पीड़ित हैं तो संकुचन के समय में सामान्य से ज्यादा  समय लग सकता है। इसी वजह से पेट में दर्द, गैस, दस्त और सूजन की शिकायत होती है।

नर्वस सिस्टम

पाचन तंत्र में मौजूद नसों में असामान्यताएं पेट में गैस या मल से खिंचाव होने पर आपको तकलीफ पहुंचा सकती हैं। यदि दिमाग और आंत के बीच सही तालमेल नहीं होगा तो शरीर सामान्य रूप से पाचन प्रक्रिया में होने वाले बदलाव के  लिए गैर जरूरी प्रतिक्रिया जैसे दर्द, कब्ज या दस्त की परेशानी पैदा कर सकता है।

इंटेस्टाइन में सूजन

इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम से पीड़ित कुछ लोगों की इंटेस्टाइन में इम्यून सिस्टम सेल्स में बढ़ोत्तरी हो सकती है। ऐसे में इम्यून सिस्टम की प्रतिक्रिया से दर्द और डायरिया की शिकायत हो सकती है।

गंभीर संक्रमण

बैक्टीरिया या वायरस की वजह दस्त की गंभीर परेशानी के बाद इरिटेबल बाउल सिंड्रोम क्या विकसित हो सकता है। इरिटेबल बाउल सिंड्रोम क्या आंतों में मौजूद ओवर ग्रोथ बैक्टीरियल के साथ भी जुड़ा हो सकता है।

इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (आईबीएस) के लक्षण को एक्टिव करने के विभिन्न  कारण शामिल हैं:

स्ट्रेस

इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (आईबीएस) पेशेंट्स जब स्ट्रेस में होते हैं  तो उनके लक्षण ज़्यादा ख़तरनाक हो जाते हैं। तनाव से यह लक्षण बढ़ जाते हैं लेकिन तनाव से यह पैदा नहीं होते हैं।

हार्मोन

पुरुषों की तुलना में इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (आईबीएस)  की परेशानी महिलाओं में दोगुनी होने की आशंका होती है। इसलिए रिसर्चर्स का मानना है कि इसमें हार्मोनल बदलाव अहम भूमिका निभाता है। एक शोध के अनुसार, कई महिलाओं ने पीरियड्स के दौरान इस बीमारी के लक्षण को खराब होने का दावा भी किया है।

इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम का निदान – Diagnosis of Irritable Bowel Syndrome in Hindi

अगर आपका डॉक्टर आपके लक्षणों को देखकर आई बी एस डायग्नोस कर सकता है। वह आपके लक्षणों के अन्य संभावित वजहों  का पता  के लिए इनमें से किसी एक या उससे ज्यादा कदम उठा सकते हैं। इंफेक्शन  का पता लगाने के लिए मल के सैंपल की जांच कर सकते हैं। एनीमिया रोग की जांच के लिए ब्लड टेस्ट  किया जा सकता है।

कोलोनॉस्कोपी

आमतौर पर कोलोनोस्कोपी तब की जाती है जब डॉक्टर को कोलाइटिस, क्रोहन रोग या कैंसर के सिम्टम्स नजर आए। इसके बारे में अगर आप ज्यादा जानकारी  चाहते हैं तो अपने डॉक्टर से सलाह मशविरा ज़रूर करें।

इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम का इलाज – Irritable Bowel Syndrom in Hindi

इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम का इलाज इसके सिम्टम्स पर निर्भर करता है, जिस के लिए दवा भी दी जाती है। अगर मरीज को दिमागी परेशानी है तो उस को तनाव कम करने की दवाएं दी जाती है। कई लोगों में खान  पान  में बदलाव करके इस परेशानी से   राहत दिलाई  जा सकती है। खान पान  में कई अहम बदलाव कर आप इस परेशानी से छुटकारा पा सकते हैं:

संक्रमण का पता लगाने के लिए मल के नमूने की जांच कर सकते हैं। एनीमिया रोग की जांच के लिए रक्त परीक्षण किया जाता है।

उदाहरण

●      कैफीन युक्त ड्रिंक्स जैसे कॉफी, टी और सोडा का सेवन नहीं करना चाहिए

●      अपनी खाद्य पदार्थ में फाइबर युक्त चीजों को जरूर शामिल करना चाहिए

●      ज्यादा से ज्यादा मात्रा में पूरा दिन पानी पीते रहना चाहिए।

●      समय सीमा के मुताबिक दूध और अन्य चीज का सेवन करना चाहिए

●      एक साथ ज्यादा मात्रा में खाना नहीं खाना चाहिए।

●       दिनभर थोड़े थोड़े अंतराल में  खाते पीते रहना चाहिए।

इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम से बचने के लिए खाद्य पदार्थ – Irritable Bowel Syndrome Diet in Hindi

खाद्य पदार्थ

इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (आईबीएस)  बचने के लिए  खाद्य पदार्थों से एलर्जी को लेकर अभी कोई ठोस इंफॉर्मेशन नहीं है। लेकिन कई लोगों में कुछ खास खाद्य पदार्थों का सेवन करने से इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम के लक्षण खराब होते देखे गए हैं। इस लिस्ट में शामिल हैं गेहूं, डेयरी उत्पाद, खट्टे फल, बीन्स, दूध, गोभी और कार्बोनेटेड पेय पदार्थ।

कई कारणों से तकलीफ

स्वस्थ व्यक्ति की आंत का संतुलन अचानक बिगड़ने की वजह तनाव, नींद न आना और किसी चीज़ की लत या  नशा खास वजह हैं। जठराग्नि के गड़बड़ होने से से भी व्यक्ति के दिमाग में वहम के हालात  बने रहते हैं, और वह खुद में कमजोरी, उलझन, बेचैनी महसूस करता है और धीरे धीरे खुद को रोगी मानने लगता है। कुछ केस में इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (आईबीएस) की वजह से सिरदर्द, कमर दर्द, जोड़ों और सीने में दर्द होता है। ज़ाहिर तौर पर एसिडिटी की वजह भी हो सकती है।

क्या खाएं

पुराने चावल, तुरई, लौकी, अनार, मूंग की दाल, ज्वार, सौंठ, कालीमिर्च, अदरक, लस्सी, धनिया, पुदीना, इलायची और जीरा अलग – अलग तरह से इस्तेमाल करना चाहिए।

क्या न खाएं

मक्के की रोटी, आलू, कद्दू, जिमिकंद, अनानास, लोबिया, राजमा, प्याज, बेसन इत्यादि  से बनी चीजों को कम या न के बराबर ही सेवन करना चाहिए। अपनी डायट से कैफीन ड्रिंक्स को बाहर करें।

आहारीय उपवास

एक आहारीय उपवास-अगर संभव हुआ‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‍ तो उपचार अवधि में कभी कभार दिन भर में सिर्फ एक मील ही लें, रात के समय। इसे एक आहारीय उपवास कहा जाता है। इसे आप माह में एक दिन भी करेंगे तो लाभ मिलेगा, बिना अनाज का आहार आजकल के अनाज, खासकर गेहूँ भी कुछ एक के पाचन में बाधा पहुंचती है। क्या आपको अनाज सही से हजम हो जाते है; इसे जानने का आसान उपाय है, लगातार तीन से पाँच दिन तक सिर्फ दाल, सब्जी और दही का ही सेवन करें, यदि आपको लाभ अनुभव हो तो पेट के पूरी तरह ठीक होने तक अनाज का उपयोग बंद कर दें। आपको बहुत जल्द लाभ मिलेगा। यदि आपको अनाज तंग न भी करते हैं तो भी सप्ताह में एक या दो दिन सिर्फ सब्जियां, दाल और फल का ही सेवन करना चाहिए।

आराम से भोजन करें

भोजन को हमेशा धीरे-धीरे चबा चबा का खाना किए। जल्दबाजी में भोजन कभी न करें, मुँह की लार में सैलवरी एमलेज़ नामक एंजाइम होता है जो तकलीफदेह स्टार्च को मैलटोस में बदल देता है। मन लगाकर, ध्यानपूर्वक, पूरे आराम से भोजन करने की आदत डालिये। भोजन के हर कौर को आनंद पूर्वक इतना चबाइये कि ये निगलने की बजाय पानी की तरह गटकने योग्य हो जाये।

इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम से बचाव – Irritabe Bowel Syndrome in Hindi

अपनी लाइफ स्टाइल में कुछ बदलाव करके और कुछ होने रेमेडी और नुस्खों का सहारा लेकर  इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (आईबीएस) के सिम्टम्स को कम या खत्म किया जा सकता है।

रोजाना एक्सरसाइज करें

●      स्ट्रेस को दूर करने के लिए किसी थेरेपी या योगा और एक्सरसाइज का सहारा लेना चाहिए।

●      अपनी डायट में प्रोबायोटिक्स चीजों को जरूर शामिल करना चाहिए।

●      अपनी डायट से तले भुने और मसालेदार पकवान को  बाहर करना चाहिए।

●      डॉक्टर की सलाह पर इरिटेबल बॉवल सिंड्रोम की दवा का सेवन करना चाहिए।

●      इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (आईबीएस) पेशेंट्स को डायट पर खास ख्याल रखने की जरूरत होती है।

●      इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (आईबीएस) के मरीज़ को अपनी डायट में डेयरी, फ्राइड, शुगर को कंट्रोल करने की खास जरूरत होती है।

●      कुछ मरीजो को खान पान में अदरक, पुदीना आर कैमोमाइल को शामिल करने से इसके लक्षण में काफी हद तक आराम मिलता है।

व्यायाम

व्यायाम के फायदों के बारे में शायद ही कोई अंजान हो, व्‍यायाम करने से न केवल आपकी मांसपेशियों को मजबूत करने और बॉडी को टोन करने, वजन कम करने में मदद मिलती है, बल्कि नियमित रूप से मल त्याग के लिए भी व्‍यायाम को फायदेमंद माना जाता है। हेल्‍थ और फिटनेस एक्‍सपर्ट का मानना है कि नियमित रूप से व्यायाम करने से पाचन प्रक्रिया तेज हो सकती है और कब्ज जैसी समस्‍याओं से बचा जा सकता है। हालांकि, कुछ ऐसे व्यायाम भी हैं, जो इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम या आईबीएस के लक्षणों में सुधार के बजाय उन्‍हें और अधिक बिगाड़ सकते हैं। इसलिए आपको इन एक्‍सरसाइज से बचना चाहिए यदि आप इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम के शिकार हैं। आइए हम आपको बताते हैं, ऐसे कौन से व्‍यायाम हैं, जो आपको नहीं करने चाहिए।

इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम से पीड़ित लोगों में व्यक्ति को दस्त, कब्ज और पेट दर्द जैसी समस्‍याओं का अनुभव होता है। इस असहज स्थिति से छुटकारा पाने के लिए, सक्रिय रहने के साथ अपने खानपान को सही व स्वस्थ करना बेहद जरूरी है। हालांकि व्यायाम इइरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम के लक्षणों से राहत पाने के लिए अच्छा है, बशर्ते आप उन्हें सही तरीके से कर रहे हों। लेकिन कुछ व्‍यायाम ऐसे भी हैं, जो आंत के नुकसान के जोखिम को बढ़ा सकती है और इसे रोगजनक हमले के लिए अधिक कमजोर बना सकती है। जिससे कि इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम के लक्षण और अधिक बिगड़ सकते हैं।

दौड़ना

दौड़ना आपकी सेहत और हृदय शक्ति को बढ़ाने के लिए काफी फायदेमंद व्यायाम है। यह आपके पैरों की मांसपेशियों को मजबूत करने के साथ शरीर को टोन करने और वजन घटाने की प्रक्रिया को तेज करने में मदद करता है। इसके अलावा, यह आपके समग्र स्वास्थ्य में सुधार के लिए अच्छा है। लेकिन यदि आप इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम के शिकार हैं, तो यह पेट में ऐंठन को भी जन्म दे सकता है, जिससे दस्त शुरू हो सकते हैं या हालत और अधिक बिगड़ सकती है। जॉगिंग का भी एक समान प्रभाव हो सकता है क्योंकि इसके लिए निरंतर उछाल की आवश्यकता होती है। इसलिए अगर आप इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम के शिकार हैं, तो दौड़ने या उछल-कूद जैसी एक्‍सरसाइज को नजरअंदाज करें।

बॉल गेम्‍स

कई लोग एक्‍सरसाइज के साथ कुछ गेम्‍स को फिट और स्वस्थ रहने के लिए विकल्प चुनते हैं। ऐसे में बॉल गेम्‍स एक फिट रहने का अच्‍छा विकल्‍प है, यह आपके दिल के साथ शरीर की स्‍ट्रेंथ बढ़ाने में मदद करता है और आपको कई स्‍वास्‍थ्‍य लाभ पहुंचाने में मददगार है। लेकिन अगर इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम से पीड़ित लोगों ऐसे खेलों को चुनते हैं, तो यह उनके लिए एक अच्छा विकल्प नहीं है। बॉल गेम खेलते समय तेजी से शरीर का हिलना और उछलना पेट में दर्द व जलन पैदा कर सकता है, जिससे पेट की मांसपेशियों में ऐंठन हो सकती है।

हाई इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग

हाई इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग ऐसा व्यायाम है जो कम समय में अधिकतम परिणाम देता है। यह काफी तेजी के साथ किया जाने वाला व्‍यायाम है, जो कि मांसपेशियों के निर्माण और फैट को जल्दी से बर्न करने में मदद करता है। लेकिन इस तरह के हाई इंटेसिटी एक्‍सरसाइज के कारण, यह कसरत पेट पर बहुत तनाव डाल सकती है, जिससे पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। यदि आप कब्ज से जूझ रहे हैं और आप इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम के रोगी हैं, तो फिर तो आपको इसे करने से पहले जरूर सोचना चाहिए।

क्रॉसफिट और इंटेंस वेट ट्रेनिंग

क्रॉसफिट एक तेजी से होने वाला वर्कआउट है, जिसमें पावरफुल और अचानक मूवमेंट होती है। ऐसे में स्क्वाटिंग और डेड लिफ्टिंग पेट के आसपास बहुत दबाव डालती है। इसके अलावा, एक्‍सरसाइज का यह रूप यानि तेजी से और फूर्तीले व्यायाम इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम के लक्षणों को बदत्‍तर बना सकते हैं।

ऐसे में आप कम तीव्रता वाले व्यायाम, पिलाते, मेडिटेशन आदि को कर सकते हैं, जो आपको फिट और स्वस्थ रहने में मदद करेंगे। अगर आपको स्ट्रेंथ ट्रेनिंग एक्सरसाइज चाहते हैं, तो लो वेट उठाना पसंद करें।

इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम के लक्षण इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम के लिए नुकसानदेह एक्‍सरसाइज इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम का इलाज इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम क्‍या है इरिटेबल बॉएल सिंड्रोम के संकेत हैं।

आयुर्वेद

आयुर्वेद में इस बीमारी को गृहणी दोष कहते हैं। इसमें रोगी को कई तरह के खतरनाक रोग होने की आशंका बनी रहती है।

 कच्चे बेल का चूर्ण, मसाला नमकीन छाछ (भुना जीरा, काला नमक व पुदीना मिली हुई), पीने से फायदा होता है। ब्राह्मी, शंखपुष्पी, अश्वगंधा का इस्तेमाल फायदेमंद  है। मेडिटेशन, शवासन और प्राणायाम करने से काफी राहत मिलती है।

इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम से बचाव – Prevention of Irritable Bowel Syndrome (IBS) in Hindi

  • हर प्रकार के तनाव से बचें, इसके लिए रोजाना  योग और व्यायाम और सुबह शाम ज़रूर सैर करना चाहिए।
  • कैफीन युक्त चीजें जैसे चाय, कॉफी या सॉफ्ट ड्रिंक्स से सख्त परहेज़ ज़रूरी है।
  • खानपान पर खास ख्याल रखना चाहिए।
  • रोजाना 8 -9 गिलास पानी ज़रूर पीना चाहिए ।
  • कब्ज के कारण वाले पदार्थ जैसे शराब-सिगरेट से दूरी बनानी चाहिए।
  • फाइबर युक्त फूड जैसे केला, सेब, गाजर इत्यादि का सेवन रोजाना ज़रूर करें।
  • तला – भुना और मसालेदार भोजन न करें।
  • फूलगोभी, पत्ता गोभी और मिर्च न खाएं।
  • दिमागी तौर पर कोई टेंशन, डिप्रेशन का रूप ले रहा है तो परिवार के सदस्यों और दोस्तों से बात ज़रूर शेयर करना चाहिए।
  • अगर आपको अपनी समस्या को लेकर कोई सवाल हैं, तो अपने डॉक्टर से सलाह जरूर करें।

आयुर्वेदिक उपचार

इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (आईबीएस) यानी

संग्रहणी को श्वेतातिसार रोग। इसमें सुबह बिना दर्द के हल्का और फेनदार पानी के समान दस्त आता है। जैसे-जैसे रोग बढ़ता जाता है वैसे-वैसे सायंकाल भोजन के बाद तुरंत दस्त भी आता है। किन्तु रोगी को कोई कष्ट महसूस नही होता है, इसके बाद पेट फूलना, बदहजमी आदि लक्षण उत्पन्न होते हैं। इससे रोगी दुर्बल होता जाता है।

चिकित्सा :

●      इमली छाल का चूर्ण एक से छह ग्राम तक 20 ग्राम ताजी दही के साथ सुबह-शाम चाटने से लाभ होता है।

●      बेल के कच्चे फल को आग में सेंक कर गुदा निकालकर 10 ग्राम गुदे में थोड़ी सी चीनी मिलाकर सेवन करते रहने से लाभ होता है।

●      2 ग्राम भांग को भूनकर 3 ग्राम शहद में मिलाकर चाटने से शीघ्र लाभ होता है।

●      6 ग्राम खजूर के फल को गाय के दूध से बनी 20 ग्राम दही के साथ सेवन करने से बच्चों की संग्रहणी से लाभ होता है।

●      50 ग्राम मीठे आम के रस में मीठी दही 10 से 20 ग्राम तथा 1 चम्मच अदरक का रस रोज दिन में 2-3 बार लगातार पिलाने से कुछ दिन के बाद चमत्कारिक लाभ होता है।

●      पिप्पली, भांग तथा सोंठ का चूर्ण तथा पुराना गुड़ 6-6 ग्राम एकत्र कर खरल कर 3 ग्राम की मात्रा में दिन में 3-4 बार लेने से संग्रहणी में लाभ हो जाता है।

●      बड़ी इलायची के दाने 10 ग्राम, सौंफ साठ ग्राम, नौसादर 20 ग्राम सभी को तवे पर भूनकर चूर्ण बनाकर सुरक्षित रखें। इसे 1-1 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से लाभ होता है।

इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (आईबीएस) से गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर का खतरा नहीं

इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (आईबीएस) से गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर का खतरा नहीं होता है लेकिन यह बीमारी रोज़ की लाइफ स्टाइल को ज़्यादा इफेक्ट करती है। इस कैंसर रहित बीमारी के मरीजों में इसके लक्षण, घातक और सामान्य दोनों ही तरीकों से नजर आ सकते हैं। एक ओर जहां कुछ रोगियों में लक्षण इतने हल्के होते हैं कि उन्हें पता भी नहीं चल पाता, वहीं दूसरी ओर कुछ मरीजों में इससे बहुत-सी शारीरिक परेशानियों से गुजरना पड़ता है। यह बीमारी घातक नहीं होती और इलाज द्वारा इसे ठीक भी किया जा सकता है। इस बीमारी का इलाज, इस बात पर निर्भर करता है कि आंत का कौन सा हिस्सा इससे इफेक्ट है और रोगी में इसके लक्षण कितने ज्यादा या कम नजर आ रहे हैं। यह परेशानी पुरुषों से ज्यादा महिलाओं में होती है। मध्य आयु की महिलाओं में अल्जाइमर का खतरा बढ़ता है तनाव, डर, घबराहट और बेचैनी से शुरू होता पैनिक अटैक जानलेवा भी हो सकते हैं।

बहुत से लोगों में इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम के संकेत और लक्षण कभी-कभी दिखाई देते हैं। आपको आईबीएस होने की अधिक संभावना है, यदि आप –

युवा हैं

●      इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम आईबीएस 45 वर्ष से कम उम्र के लोगों में उत्पन्न हो सकता है।

महिला हैं

●      पुरुषों की तुलना में महिलाओं में इस इस स्थिति की संभावना लगभग दोगुनी होती है।

मानसिक स्वास्थ्य समस्या

चिंता, अवसाद, व्यक्तित्व विकार और बचपन में हुए यौन शोषण का इतिहास इसका जोखिम कारक हैं। महिलाओं के लिए घरेलू हिंसा भी एक खतरा हो सकता है। इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (आईबीएस) जोखिम पर पारिवारिक इतिहास का प्रभाव जीन और परिवार के परिवेश में साझा किए गए कारकों या दोनों से संबंधित हो सकता है।

इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम की जटिलताए – Complications of Irritable Bowel Syndrome in Hindi

इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (आईबीएस) के लक्षण दस्त और कब्ज है, जिनकी वजह से बवासीर गंभीर रूप से बढ़ सकता है। इसके अलावा अगर आप कुछ खाद्य पदार्थों से बचते हैं, तो आपके शरीर में ज़रूरी पोषक तत्वों की कमी हो जाती है, जिससे कुपोषण हो जाता है। इससे आपके पूरे  जीवन की गुणवत्ता पर प्रभाव पड़ता है और जीवन में जटिलता पैदा हो जाती है। इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम के असर से आप महसूस करते हैं कि आप अपनी जिन्दगी मे बहुत परेशानी उठा रहे हैं और ज़िन्दगी अच्छी तरह से नहीं जी पा रहे हैं, जिससे निराशा या डिप्रेशन पैदा हो सकता है। इसकी संरचना और सक्रिय सामग्री को कई बार तरह से निर्मित किया गया है। जिसमें ज़िंगिबर ऑफ़िसिनेल, एगल मारमेलोस, बकोपा मोननेरी,साइपरस रोटंडस, एकोनिटम हेटेरोफिलम, होल्हेरेना एंटिडिसेंटरिका

निष्कर्ष – Conclusion

शोध के निष्कर्ष बताते हैं कि इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (आईबीएस) रोगियों में विटामिन-डी की कमी सामान्य है। विटामिन-डी की खुराक के सेवन से पेट में दर्द, सूजन, दस्त और कब्ज जैसे लक्षणों को कम करने में मदद मिलती है। शोध में पता चलता है कि विटामिन-डी इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (आईबीएस) के रोगियों में जीवन की गुणवत्ता सुधारने में भी कारगर है।

विटामिन-डी की खुराक का नियमित सेवन दर्दनाक इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (आईबीएस) के लक्षणों को कम करने में मददगार हो सकता है। इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम पेट और आंत के विकार से संबंधित है और इससे पीड़ित शख्स को पेट में सूजन और दर्द समेत कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

संदर्भ – References

पत्रिका [1]

विकिपीडिया [2]

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