एपेंडिसाइटिस के लक्षण, कारण, उपचार और बचाव – Appendicitis Symptoms, Causes, Treatment and Prevention in Hindi

Appendicitis

विषय सूचि

उपक्षेप – Introduction

अपेंडिक्स एक ऐसे मर्ज का नाम है जो बहुत पेचीदा है  मरीज़ और डॉक्टर दोनों के लिए। इसका इलाज बहुत मुश्किल है। इस मर्ज में यह पता करना मुश्किल होता है कि दर्द अपेंडिक्स का है भी या नहीं।

आँत का एक टुकड़ा जिसे मेडिकल लैंग्वेज में एपिन्डिसाइटिस कहते हैं। पेट में कई अंग होते हैं, इन अंगों की अनेक बीमारियों में पेट दर्द, बुखार, उल्टी जैसे लक्षण समान ही होते हैं। साथ ही पेट के अनेक अंगों और दूसरे रोगों के फिजिकल टेस्ट और हिस्ट्री भी मिलते-जुलते होते हैं इसलिए अपेंडिक्स को सुनिश्चित करने और इसके निदान की परेशानी हमेशा बनी रहती है। इसी बीमारी की सही और सटीक जानकारी के  मद्देनजर यह आर्टिकल लिखा गया है। उम्मीद है कि ये आर्टिकल आपको इस अनसुलझी बीमारी के प्रति जागरूक करेगा। इसलिए इस आर्टिकल को पूरा पढ़ें।

अपेंडिसाइटिस क्या है – What is Appendicitis in Hindi

अपेंडिसाइटिस, शरीर में अपेंडिक्स नाम की एक इंटरनल पार्ट में होता है। अपेंडिक्स एक पतली और छोटी सी ट्यूब होती है जिसकी लंबाई करीब 2 से 3 इंच तक होती है। बड़ी आंत में जहां पर मल बनता है वहां पर ये आंत से जुड़ी होती है। अपेंडिक्स में होने वाली एक दर्द भरी सूजन को अपेंडिसाइटिस के नाम से जाना जाता है।

अपेंडिसाइटिस के शुरुआत  पेट के बीच के हिस्से में बार-बार दर्द  से होती है। कुछ ही घंटो में दर्द पेट के दाहिने निचले हिस्से की तरफ होने लगता है, जहां पर अपेंडिक्स होता है और दर्द तकलीफदेह बन जाता है। इसका दर्द खासतौर पर चलने, खांसने या इस जगह को दबाने से और भी ज्यादा गंभीर हो जाता है।

अपेंडिसाइटिस के प्रकार — Types of Appendicitis in Hindi

अपेंडिसाइटिस के दो प्रकार होते हैं –

  • एक्यूट (Acute – तीव्र)
  • क्रोनिक (chronic – स्थायी)

एक्यूट अपेंडिसाइटिस बहुत जल्दी डेवलप हो जाता है जिसमें कुछ घंटो से दिनों का टाइम लग जाता है। क्रोनिक अपेंडिसाइटिस में सूजन होती है जो काफी लंबे समय तक बनी रहती है। अगर कोई अपेंडिसाइटस से ग्रस्त है, तो उसके पेट से अपेंडिक्स को जितना जल्दी हो सके सर्जरी करके निकाल देना चाहिए। अगर किसी व्यक्ति को अपेंडिसाइटिस होने की संभावना है लेकिन उसका निदान करना संभव नहीं है, तो उसे सर्जरी की सलाह दी जाती है। ऐसी सलाह इसलिए दी जाती है क्योंकि अपेंडिक्स के फटने का खतरा लेने से बेहतर है अपेंडिक्स को निकाल देना।

1. एक्यूट अपेंडिसाइटिस (Acute appendicitis)

एक्यूट अपेंडिसाइटिस अपने नाम की तरह होती है जो बहुत तेजी से डेवलप होता है, आमतौर पर यह कुछ ही घंटे या दिनों में डेवलप हो जाता है। इसका पता लगाना आसान होता है, और इसके फौरन इलाज के लिए सर्जरी की जरूरत पड़ती है। यह तब होता है जब अपेंडिक्स में जिवाणु इंफेक्शन, मल या किसी दुसरे तरह की रुकावट के वजह से पूरी तरह से रुकावट आ जाती है। जब अपेंडिक्स में बैक्टीरीया तेजी से पैदा होने लगतें हैं तो इससे सूजन और मवाद  बनने लगता है, जो अपेंडिक्स के बेजान होने का कारण भी बन सकता है।

2. क्रोनिक अपेंडिसाइटिस (Chronic appendicitis)

इसमें सूजन लंबे समय तक रहती है। अपेंडिसाइटिस के कैसे में यह सिर्फ 1.5 फीसदी तक ही दर्ज किया गया है। क्रोनिक अपेंडिसाइटिस से, अपेंडिक्स में थोड़ा-थोड़ा करके रुकावट होने लगती है जो इसके आस-पास के टिशू में सूजन का कारण बन जाती है। अंदरूनी दबाव के कारण सूजन गंभीर होती जाती है। हालांकि अपेंडिक्स के फटने की बजाए, रुकावट समय के साथ दबाव के कारण खुल जाती है। इस प्रकार इसके लक्षण कम या यहां तक कि खत्म भी हो सकते हैं।

क्रोनिक अपेंडिसाइटिस बनाम एक्यूट अपेंडिसाइटिस

क्रोनिक और एक्यूट अपेंडिसाइटिस कई बार उलझन में डाल देते हैं क्योंकि कई केस  में क्रोनिक अपेंडिसाइटिस का निदान तब तक नहीं हो पाता जब तक वह एक्यूट अपेंडिसाइटिस का रूप ना ले लें।

क्रोनिक अपेंडिसाइटिस के लक्षण कम होते हैं जो लंबे समय तक रहते हैं, और कभी गायब हो जाते हैं तो कभी फिर से दिखने लग जाते हैं। कई बार इसका निदान करने के लिए कई हफ्ते, महीने यहां तक की साल भी लग जाते हैं।

जबकि एक्यूट अपेंडिसाइटिस के लक्षण काफी खतरनाक होते हैं, जो 24 से 48 घंटों के अंदर अचानक दिखने लगते हैं। एक्यूट अपेंडिसाइटिस को तत्काल इलाज की जरूरत होती है।

अपेंडिसाइटिस के कारण – Causes of Appendicitis in Hindi

अपेंडिसाइटिस तभी डेवलप होता है जब “सीकम” (एक थैली होती है, जो छोटी आंत और बड़ी आंत के मेल से जुड़ी होती है) में खुलने वाला अपेंडिक्स का रास्ता बंद हो जाता है। यह रुकावट अपेंडिक्स के अंदर एक मोटा बलगम जैसा द्रव बनने के कारण या मल जो सीकम से अपेंडिक्स के अंदर चला जाता है, उसके कारण हो सकती है। यह द्रव या मल कठोर होकर पत्थर की तरह मजबूत बन जाते हैं जो फंसकर छिद्र को बंद कर देते हैं। इस पत्थरनुमा चीज को ‘फेकलिथ’  कहा जाता है।

इसके अलावा कई बार, अपेंडिक्स के लसीका टिशू  में सूजन आ जाती है और वे फैलकर छिद्र को बंद कर देते हैं। अपेंडिक्स में बैक्टीरिया पाए जाते हैं, लेकिन रुकावट होने के बाद वे कई गुना  बढ़ जाते हैं जो अपेंडिक्स की परतों पर अटैक करके इंफेक्शन  फैलाते हैं।

जब बैक्टीरिया का अटैक बढ़ता रहता है तो उस पर शरीर प्रतिक्रिया देता है, और यह अटैक सूजन का रूप  ले लेता है। अगर अपेंडिसाइटिस के लक्षणों की समय पर पहचान नहीं की जाए और अपेंडिक्स की सूजन बढ़ती रहे, तो अपेंडिक्स फट भी सकती है और ऐसा होने के बाद बैक्टीरिया अपेंडिक्स के बाहर भी फैल जाते हैं।

अपेंडिक्स फटने के बाद बैक्टीरिया पूरे पेट में इंफेक्शन फैला सकता है। हालांकि आम तौर पर तो यह अपेंडिक्स के इर्द-गिर्द टिशू में फैलकर अपेंडिक्स के चारों तरफ थोड़ी ही जगह तक सिमित रहता है।

अपेंडिक्स मुख्य कई वजह से हो सकती है, जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं-

अपौष्टिक भोजन करना

अपेंडिक्स के मरीज़ अपौष्टिक भोजन करते हैं। सभी लोगों को अपने खानपान का खास खयाल रखना चाहिए और पेट दर्द को नज़रअदाज़ नहीं करना चाहिए क्योंकि यह गंभीर रूप भी ले सकता है।

शरीर में संक्रमण का होना

अपेंडिक्स की बीमारी कई बार शरीर में इन्फेक्शन होने की वजह से भी हो सकती है।

इसी कारण व्यक्ति को मेडिकल हेल्प लेनी चाहिए और डॉक्टर की सलाह के मुताबिक  काम करना चाहिए।

अपेंडिक्स ग्रंथि में ब्लॉकेज का होना

अपेंडिक्स ग्रंथि में ब्लॉकेज होने पर अपेंडिक्स की बीमारी हो सकती है। ऐसी स्थिति में मेडिकल हेल्प की जरूरत पड़ सकती है।

गहरे जख्म का होना

कई बार अपेंडिक्स चोट लगने की वजह से भी हो सकती है। अक्सर, किसी व्यक्ति को अंदरूनी चोट लग जाती है, जिसका पता उसे लंबे समय तक नहीं चल पाता है। इस स्थिति का नतीजा अपेंडिक्स हो सकता है।

ट्यूमर का होना

इस अपेंडिक्स की संभावना उस व्यक्ति में ज़्यादा रहती है, जो किसी तरह के ट्यूमर से पीड़ित होता हो। ट्यूमर के इलाज से अपेंडिक्स की संभावना को कम करें।

अपेंडिसाइटिस के लक्षण – Symptoms of Appendicitis in Hindi

किसी भी बीमारी की तरह अपेंडिक्स के भी कुछ लक्षण होते हैं, जो अपेंडिक्स की शुरूआत का संकेत देते हैं। अगर किसी व्यक्ति को ये 5 लक्षण नज़र आए , तो उसे फौरन  सर्तक हो जाना चाहिए और उसका इलाज शुरू करा देना चाहिए-

पेट के निचले हिस्से में अचानक से दर्द होना

इस अपेंडिक्स की प्रॉब्लम  में व्यक्ति के पेट के निचले में दर्द होता है। दर्द के अचानक से होने के कारण व्यक्ति इसके प्रति सर्तक नहीं रह पाता है। लेकिन, इस  दर्द को सामान्य दर्द निवारक दवाई के सेवन से कम किया जा सकता है।

कब्ज का होना

यदि किसी व्यक्ति को कब्ज की शिकायत है, तो उसे अपने पेट की जांच फौरन करानी चाहिए क्योंकि यह अपेंडिक्स का लक्षण हो सकता है।

पेट पर सूजन का होना

कई बार अपेंडिक्स होने पर व्यक्ति के पेट पर सूजन हो जाती है। हालांकि, इसे सिकाई से ठीक किया जा सकता है, लेकिन किसी भी कदम को डॉक्टर की सलाह के बाद ही उठाना चाहिए।

भूख न लगना

कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो हर बार यही शिकायत करते हैं कि उन्हें कुछ खाने का मन नहीं लगता है। ऐसे लोगों को अपने हैल्थ की जांच जरूर करानी चाहिए क्योंकि भूख न लगना अपेंडिक्स का कारण बन सकता है।

मूत्र करते समय दर्द होना

अपेंडिक्स का लक्षण मूत्र करते समय दर्द का होना भी है। इसे मूत्र मार्ग इंफेक्शन न समझे क्योंकि ऐसा अपेंडिक्स की वजह से भी हो सकता है। इसके शुरूआती लक्षण अक्सर काफी हल्के दिखते हैं, जिनमें पेट दर्द और भूख कम लगना शामिल हैं। रोगी को पूछे जाने पर दर्द की सटीक जगह बताने में मुश्किल होती है। ज्यादातर लोग दर्द को अपने पेट पर दर्द वाली जगह के चारों तरफ उंगली घुमाते हुए बताने की कोशिश करते हैं। फिर समय के साथ-साथ दर्द पेट के निचले हिस्से में स्थिर हो सकता है, और मरीज शायद दर्द के सटीक स्थान को पहचान पाने में कामयाब हो सकता है।

अगर ये लक्षण पहले ना दिखे तो, अपेंडिसाइटिस का दूसरा लक्षण भूख का कम होना होता है। यह बढ़कर जी मिचलाना, सूजन बढ़कर आंतों तक पहुँच सकती है, और उनमें रुकावट पैदा कर सकती है। ऐसे में भी मतली और उल्टी लगने के लक्षण पैदा हो सकते हैं।

अपेंडिसाइटिस के अन्य लक्षण – Other Symptoms of Appendicitis in Hindi

  • नाभि के ऊपरी हिस्से में हल्का दर्द जो पेट के निचले दाएं हिस्से की ओर जाते हुए तेज़ हो जाता है।
  • भूख ना लगना। 
  • पेट में दर्द शुरू होने के बाद
  • मतली और / या उल्टी होना।
  • पेट में सूजन।
  • 99-102 डिग्री फैहरेनाइट बुखार।
  • पेट के ऊपरी या निचले हिस्से, पीठ, या मलाशय में कहीं भी हल्का या तेज दर्द।
  • मूत्र करने में परेशानी।
  • पेट में ऐंठन।
  • गैस के साथ कब्ज या दस्त की समस्या। 
  • अपेंडिसाइटिस पेशाब को भी प्रभावित करता है।
  • अपेंडिसाइटिस होने का शक मात्र भी है तो उसको जुलाब की गोलियाँ नहीं लेनी चाहिए।
  • अपेंडिसाइटिस से प्रभावित व्यक्ति अगर जुलाब की गोलियाँ ले तो उससे अपेंडिक्स फट सकता है।

अगर पेट में दाहिनी तरफ मीठा मीठा दर्द महसूस हो रहा है तो डॉक्टर से चेकअप करवाएं। अपेंडिसाइटिस बहुत जल्द इमर्जेंसी मेडिकल का रूप बन सकता है।

अपेंडिसाइटिस से बचाव – Prevention of Appendicitis in Hindi

अपेंडिसाइटिस को रोकने के लिए रूटीन हेल्थ चेकअप के अलावा कोई दूसरा नहीं है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इसी तरीके से शरीर के अंदरूनी हिस्सों की जाँच की सकती है और उनकी हालत का पता लगाया जा सकता है।

हालांकि जो ज्यादा मात्रा में फाइबर युक्त आहार लेते हैं, उनमें अपेंडिसाइटिस जैसी बीमारी होने की सम्भावनाएं कम हो जाती हैं।

इन 5 तरीकों को अपनाने से अपेंडिसाइटिस की रोकथाम संभव

हाई  फाइबर फूड – भोजन का हमारे सेहत पर सीधा असर पड़ता है। यह बात अपेंडिक्स के बारे  में सही साबित होती है क्योंकि यह अनहेल्दी फूड की वजह से भी होता है। अगर कोई  हेल्दी फूड  विशेषकर फाइबर युक्त का सेवन करता है तो वह अपेंडिक्स की संभावना को काफी हद तक कम कर सकता है।

व्यायाम करना – अपेंडिक्स के इलाज के लिए भी व्यायाम करना बेहतर ऑप्शन साबित हो सकता है। व्यायाम के जरिए व्मांसपेशियां मजबूत होती हैं और इसके साथ में यह इम्यून पॉवर को भी बढ़ाता है।

 तनाव न लेना – तनाव भी कई सारी बीमारियों का कारण हो सकता है। ऐसा अपेंडिक्स के मामले भी होता है। कई बार ऐसा पाया गया है कि यह बीमारी अधिकांश ऐसे लोगों को होती है, जो अत्याधिक तनाव लेते हैं। इसलिए तनाव नहीं लेना चाहिए, ताकि वे शारीरिक के साथ-साथ दिमागी तौर पर हेल्दी रह सकें।

सप्लीमेंट लेना – अगर किसी व्यक्ति के लिए व्यायाम करना संभव नहीं है तो वह सप्लीमेंट भी ले सकता है। ये सप्लीमेंट उसके शरीर को ज़रूरी एनर्जी  दे सकते हैं, जिससे वह किसी भी बीमारी से जल्दी ठीक हो सकता है। लेकिन, इस बात खयाल सभी को रखना चाहिए कि वे किसी भी सप्लीमेंट का सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें, ताकि इनका, उनकी सेहत पर कोई गलत असर न पड़े।

रूटीन हेल्थ चेकअप कराना – हर व्यक्ति को अपने हेल्थ  की जांच रोज़ाना  समय पर करानी चाहिए ताकि इस बात का पता चल सके कि वह पूरी तरह से सेहतमंद है। पहले के जमाने में इस समस्या को एक लाइलाज बीमारी समझा जाता है और इसी वजह से लोग इसका सही तरीके से इलाज नहीं करा पाते थे, लेकिन अब इसका इलाज ऍपेन्डेक्टमी सर्जरी के जरिए से मुमकिन  है।

अपेंडिसाइटिस का परीक्षण – Diagnosis of Appendicitis in Hindi

अपेंडिसाइटिस के निदान के लिए डॉक्टर ये चरण अपनाते हैं:

1. लक्षणों के बारे में पता करना

मरीजों से उनकी बीमारी के दौरान हो रहे लक्षणों के बारे में पूछा जाता है, कि वे कैसा अहसूस कर रहे हैं, उन्हें कितना दर्द हो रहा है और कितने समय से हो रहा है। इससें जुड़े सवाल पूछे जाते हैं।

2. पहले ली गई दवाइयों के बारे में पता करना

मरीज की मेडिकल हिस्ट्री की जानकारी ली जाती हैं, जिससे अन्य सेहत से जुड़ी परेशानियों की संभावना का अनुमान लगाया जा सके। इस दौरान डॉक्टर कुछ इस तरह की जानकारी मरीज से लेते हैं।

मरीज से पहले कभी किसी अन्य सर्जरी के बारे में पूछना मरीज द्वारा लिए गए किसी दवाई या सप्लिमेंट की जानकारी अगर मरीज शराब या अन्य कोई ड्रग लेता हो, उसकी जानकारी शारीरिक परिक्षण के दौरान डॉक्टर, मरीज के दर्द तक पहुंचने के लिए उसकी दर्द प्रभावित जगह पर हल्का-हल्का दबाव दे सकते हैं। अक्सर जब अपेंडिक्स पर हल्का सा भी दबाव पड़ता है, तो उसमें बहुच दर्द महसूस होने लगता है, जो इस बात का संकेत करते हैं कि पेरिटोनियम  (एक प्रकार की झिल्ली जो पेट के अंगों को कवर करती है) से सटे हुुऐ अंगों में सूजन है।

डॉक्टर अपेंडिक्स के ऊपर हल्का दबाव डालने से आपके शरीर में वाली प्रतिक्रिया को देखेंगे। जैसे, अगर आपको वाकाई अपेंडिक्स की समस्या है तो डॉक्टर का पेट पर दबाव डालने के बाद आपकी स्वाभाविक प्रतिक्रिया होगी दर्द से बचने के लिए पेट की मांसपेशियों को कठोर करना।

मरीज के मलाशय के निचले हिस्से की जांच करने के लिए डॉक्टर एक दस्ताने की मदद से उंगली का प्रयोग कर सकते हैं  (इसको “डिजिटल रेक्टल परिक्षण” कहा जाता है)। प्रसव की उम्र वाली महिलाओं को स्त्रीरोग से जुड़ी  समस्याओं के लिए जांचने के लिए डॉक्टर उनका पेल्विक परिक्षण कर सकते हैं।

3. अपेंडिसाइटिस के निदान के लिए लैब टेस्ट

अपेंडिसाइटिस के निदान और अन्य स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं की पुष्टी करने के लिए डॉक्टर, कुछ लैब टेस्ट करवा सकते हैं जो इस प्रकार हैं:

खून की जांच (Blood test) – इससे डॉक्टर को मरीज की सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या पता चलती है, जो की संक्रमण की संभावना जांचने में मदद करता है।

मूत्र की जांच (Urine test) – मूत्र परिक्षण से डॉक्टर यह जांच करेंगे कि मूत्र मार्ग में संक्रमण या गुर्दों में पथरी ही कहीं दर्द का कारण तो नहीं है।

इमेजिंग टेस्ट (Imaging tests) – मरीज की अपेंडिसाइटिस की पुष्टी करने या दर्द के किसी अन्य कारण का पता लगाने के लिए डॉक्टर पेट का एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड और सी.टी. स्कैन करते हैं। जब निदान की पुष्टी karne ke liye जरूरत पड़ने पर डॉक्टर एमआरआई परिक्षण, या सी.टी. स्कैन जैसे टेस्ट कर सकते हैं। इन इमेजिंग टेस्ट से पेट के दर्द के कुछ स्त्रोत डॉक्टर को दिख सकते हैं जैसे:

  • अपेंडिक्स का फैला हुआ या फटा हुआ होना
  • सूजन
  • अपेंडिक्स में किसी प्रकार की रुकावट
  • फोड़े होना

अपेंडिसाइटिस का इलाज – Treatment of Appendicitis in Hindi

इसका इलाज सर्जरी के जरिए किया जाता है, जिसकी मदद से अपेंडिक्स को शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है। हालांकि कुछ शोध से पता चला है कि एक्यूट अपेंटिसाइटिस का इलाज एंटीबायोटिक्स से करने से कुछ केस में सर्जरी की जरूरत खत्म हो जाती है।

अगर अपेंडिसाइटिस होने का शक हो रहा है, तो रोगी की सुरक्षा के लिए अपेंडिक्स को जल्द ही निकाल देना चाहिए ताकि इसके फटने के आसार को खत्म किया जा सके। 

अगर अपेंडिक्स में कोई फोड़ा पनप जाए तो उससे निजात पाने के लिए दो रास्ते होते हैं – एक तो फोड़े से मवाद या द्रव को बाहर निकालना और दूसरा अपेंडिक्स को शरीर से निकाल देना।

अपेंडिक्स का ऑपरेशन

सर्जरी से पहले मरीज को एंटीबायोटिक दवाईया दी जाती हैं जिससे इंफेक्शन नहीं हो पाता।

अपेंडिक्स का ऑपरेशन करने के दो ऑप्शन होते हैं।

पहला, इसे ओपन सर्जरी की तरह किया जा सकता है, जिससे पेट में एक चीरा दिया जाता है जिसकी लंबाई 2 से चार इंच तक हो जाती है।

 दूसरा ऑप्शन  है लेपरोस्कॉपिक सर्जरी। इस सर्जरी को पेट में कुछ छोटे चीरे लगा कर किया जाता है। लेपरोस्कॉपिक सर्जरी के दौरान एक छोटा वीडियो कैमरा समेत कई स्पेशल सर्जिकल उपकरणों की जरूरत पड़ती है।

लेपरोस्कॉपिक सर्जरी के बाद रोगी जल्दी ठीक हो जाता है। साथ ही इस दौरान दर्द भी कम होता और निशान भी कम बनते हैं। यह बूढ़े और स्थूल (मोटे) लोगों के लिए बेहतर होती है। मगर लेपरोस्कॉपिक सर्जरी हर किसी के लिए फायदेमंद नहीं है, क्योंकि अपेंडिक्स अगर फट गया हो, जिससे इंफेक्शन अपेंडिक्स से बाहर फैल गया हो या अपेंडिक्स में फोड़ा हो, तो उसके लिए ऑपन सर्जरी की जरूरत पड़ती है। इससे मेडिकल अच्छी तरह से पेट की गुहा को साफ कर पाते हैं। एपेंडेक्टॉमी सर्जरी के बाद एक या दो दिन तक मरीज को अस्पताल में रुकना पड़ता है।

ऍपेन्डेक्टमी सर्जरी की कीमत क्या है – Appendectomy Cost in Hindi

अपेंडिक्स का इलाज ऍपेन्डेक्टमी सर्जरी के जारिए बेहतर तरीके से किया जा सकता है। ऐसे में जब कोई डॉक्टर किसी व्यक्ति को इस सर्जरी को कराने की सलाह देते हैं, तब उसके मन में सबसे पहला सवाल इसकी कीमत को लेकर ही आता है।

ऍपेन्डेक्टमी सर्जरी को कराने से पहले किसी भी व्यक्ति के लिए इस सर्जरी की कीमत के लिए फिक्र होना लाज़मी है क्योंकि इसका असर फाइनेंशियल कंडीशन पर है।

हो सकता है कि ऍपेन्डेक्टमी सर्जरी को एक महंगी प्रक्रिया समझते हो और इसी कारण वे इसी समय पर इसे न करा पाएं, लेकिन यदि  उन्हें यह पता हो कि ऍपेन्डेक्टमी सर्जरी एक किफायती प्रक्रिया है, जिसकी कीमत सिर्फ 50 हजार है, तो शायद वे भी अपेंडिक्स की परेशानी से निजात पा सकें।

ऍपेन्डेक्टमी सर्जरी के जोखिम क्या हो सकते हैं – Appendectomy Complications in Hindi

आमतौर पर, ऍपेन्डेक्टमी सर्जरी फायदेमंद प्रॉसेस है, जिसके ज़रिए से अपेंडिक्स का सक्सेसफुल ट्रीटमेंट किया जा सकता है, लेकिन इसके बावजूद किसी भी दूसरे प्रॉसेस बा निजबत  इस सर्जरी के भी जोखिम होते हैं, जिसकी जानकारी ज़रूरी है।

अगर किसी व्यक्ति ने हाल ही में ऍपेन्डेक्टमी सर्जरी को कराया है या फिर भविष्य में ऍपेन्डेक्टमी सर्जरी को कराने की सोच  रहा है तो, उसे खतरों का  सामना करना पड़ सकता है-

ब्लीडिंग- अपेंडिक्स सर्जरी के बाद कुछ हद तक ब्लीडिंग का होना नॉर्मल बात है, लेकिन कई बार यह ज़्यादा हो सकती है, जो खतरनाक हालात पैदा कर सकती है। हालांकि, कुछ सावधानियों को बरत कर कम किया जा सकता है, लेकिन फिर भी सभी लोगों यह कोशिश करनी चाहिए कि उन्हें इस स्थिति से गुजरना न पड़े।

घाव का होना- ऍपेन्डेक्टमी सर्जरी के बाद कुछ लोगों के शरीर में गहरे घाव हो सकते हैं। ऐसे में मेडिकल हेल्प की जरूरत पड़ सकती है।

पेट का संक्रमण का होना- इस सर्जरी के बाद कुछ लोगों के पेट में इंफेक्शन  हो जाता है। हालांकि, इस स्थिति को मेद कल हेल्प के जरिए कम किया जा सकता है।

पेट पर लाल दब्बों का पड़ना- किसी व्यक्ति ने हाल ही अपेंडिक्स सर्जरी को कराया है, तो इस सर्जरी के बाद उसके पेट पर लाल दब्बे हो सकते हैं। ऐसे में डॉक्टर मरीज़ को क्रीम लगाने को देते हैं, जिससे ये दब्बे ठीक हो सकते हैं।

पेट दर्द होना- अपेंडिक्स सर्जरी को कराने के बाद कुछ लोगों को पेट दर्द हो सकता है। इस समस्या को पेट की दवाई के द्वारा ठीक किया जा सकता है।

अपेंडिसाइटिस के घरेलू उपचार – Home Remedies For Appendicitis in Hindi

1. अदरक सूजन को कम करने में काफ़ी फायदेमंद है। अदरक वाली चाय का एक दिन में  कई बार सेवन करें या फिर पेट पर मसाज के लिए अदरक के तेल का इस्तेमाल करें।

2. तुलसी का सेवन अपेंडिक्स में रामबाण इलाज है, रोजाना तीन से चार पत्ते तुलसी के चबा चबा कर खाने से बहुत लाभ मिलता है।

3. पुदीना पेट की परेशानियों को दूर करने का एक अच्छा उपाय है, पेट में गैस और चक्कर आदि में पुदीना बहुत ही कारगर है। पुदीने की चाय से अपेंडिक्स के दर्द में आराम मिलता है।

4. पाचन शक्ति ठीक रखने और कब्ज़ से दूर रहने के लिए ऐलोवेरा का प्रयोग अच्छा उपाय है।

5. पालक का साग आंतों की बीमारियों के इलाज में बहुत कारगर है।

6. दूध को उबाल ले और बाद में ठंडा करके सेवन करने से लाभ होता है।

7. ज्यादा चटपटी और तली हुई चीजों का इस्तेमाल ना करे, पानी जादा पिए

8. खाली पेट 2–3 लहुसन की कलियां खाएं और खाने के साथ भी लहसुन खाने की आदत बनाये।

9. खाना खाने से पहले थोड़ा सेंधा नमक और अदरक टमाटर पर लगाकर खाए।

10. अपेंडिक्स का ट्रीटमेंट घरेलू तरीके से करने में छाछ भी एक महत्वपूर्ण उपाय है, छाछ के गिलास में थोड़ा सा काला नमक मिलाकर पिने से अपेंडिक्स में आराम मिलता है।

अपेंडिक्स (अपेन्डिसाइटिस) के जोखिम और जटिलताएं – Appendicitis Risks & Complications in Hindi

अपेंडिसाइटिस के जोखिम कारक – Risk Factors of Appendicitis in Hindi

उम्र – बच्चों और युवा में अपेंडिसाइटिस होने की ज्यादा चांसेज रहता  है। सबसे ज्यादा जोखिम कारक उनके लिए हैं, जो 10 से 30 साल की उम्र के बीच में हैं, और ऐसा होने के कारण की कोई सही जानकारी  नहीं मिली है।

संक्रमण – अगर किसी व्यक्ति को हाल ही में या कुछ समय पहले उसके जठरांत्र प्रणाली में  इंफेक्शन हुआ है, तो उसके लिए अपेंडिक्स में इंफेक्शन होने के जोखिम बढ़ जाते हैं।

अपेंडिक्स में चोट – अगर किसी वजह से अपेंडिक्स में घाव हो गया है, इससे भी अपेंडिसाइटिस के जोखिम बढ़ जाते हैं क्योंकि ऐसी स्थिति में अपेंडिक्स में सूजन आ जाती है।

फाइबर युक्त आहार में कमी – भोजन में फाइबर की कमी में पाचन से जुड़े कई विकार हो जाते हैं, जो अपेंडिसाइटिस केे जोखिम को बढ़ावा देते हैं। फाइबर में कमी से खासतौर से शरीर में कब्ज होने लगती है, जिससे कुछ मल पदार्थ अपेंडिक्स में चला जाता है जो अपेंडिसाइटिस का कारण बनता है।

अपेंडिसाइटिस की जटिलताएं – Complications of Appendicitis in Hindi

अपेंडिसाइटिस में जटिलता तब होती है जब  इंफेक्शन और सूजन आई हुई अपेंडिक्स फट जाए। ऐसा होने पर अपेंडिक्स में जमा मल पदार्थ पेट की गुहा को दूषित कर देता है।

पेरिटोनियम की सूजन – पेरिटोनियम एक टिशू की परत है जो पेट के अंदरूनी दीवार पर होती है और आपके पेट के सभी अंगों को सहारा देती है और फोड़े हो सकते है।

पेरिटोनाइटिस (peritonitis) – जब अपेंडिक्स फट जाता है तो उसमें से निकलने वाले बैक्टीरिया शरीर के बाकी हिस्सों में फैल कर  इंफेक्शन फैला देते हैं। जब  इंफेक्शन पेरिटोनियम में फैलता है तब पेरिटोनाइटिस की स्थिति पैदा  हो जाती है। पेरिटोनियम, टिशू की एक पतली झिल्ली होती है जो पेट के अंदरूनी हिस्से को ढककर रखती है। अगर पेरिटोनाइटिस का फौरन इलाज ना किया जाए तो यह लंबे समय तक समस्या पैदा कर सकती है और यहां तक की खतरनाक हो सकता है। पेरिटोनाइटिस के इलाज में एंटीबायोटिक्स का उपयोग और सर्जरी के जरिए अपेंडिक्स निकालना शामिल होता है।

फोड़े (abscess) – ये कई बार अपेंडिक्स के फटने के बाद उसके चारों तरफ बनने लग जाते हैं, जो एक दर्दनाक मवाद  से भरे होते हैं। फोड़ा तब होता है जब इंफेक्शन से लड़ने के लिए शरीर प्रयास कर रहा होता है। यह शरीर से अपेंडिक्स को हटाने के लिए सर्जरी के कारण भी हो जाता है। मगर ऐसा 500 केस में से 1 ही पाया जाता है। फोड़े का इलाज कई बार एंटीबायोटिक्स के जरिए  से किया जाता है, मगर ज्यादातर कैसे में फोड़े के अंदर से मवाद को निकालना ही पड़ता है।

अल्ट्रासाउंड और कंप्यूटराइज़्ड टोमोग्राफी   की मदद से, एनेस्थेटिक और एक सुईं के इस्तेमाल  से मवाद को बाहर निकाल दिया जाता है। और अगर सर्जरी के दौरान कोई फोड़ा दिख जाए तो उसको अच्छे से साफ कर दिया जाता है और एंटीबायोटिक दे दी जाती है।

निष्कर्ष – Conclusion

अपेंडिक्स की बीमारी काफी तेज़ी से फैल रही है। इस बीमारी पर किए अध्ययनों के मुताबिक भारत में पिछले कुछ सालों में इस पेट की बीमारी के कुल 130 केस देखने को मिले हैं।

इसके अलावा, यहां पर ध्यान देने वाली बात यह है कि पेट की बीमारी से 31 से 40 उम्र के लोग ग्रस्त हैं। ये आंकड़े सच में काफी चौंकाने वाले हैं, और इनसे इस बात को भी पता चलता है कि लोगों में अपेंडिक्स की जानकारी कितनी कम है। लोगों में ऍपेन्डेक्टमी सर्जरी को लेकर जागरूकता की कमी है, इसी कारण इसके मरीजों की तादात रोज़ाना बढ़ रही है। इन्हीं सब बातों को ध्यान मे रखकर

इस आर्टिकल को लिखा गया है, जिसमें अपेंडिक्स और ऍपेन्डेक्टमी सर्जरी की ज़रूरी जानकारी देने की कोशिश की है। लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करें ताकि लोग इस बीमारी के लिए अलर्ट  रह सकें और अपना इलाज सही तरीके से करा सकें।

संदर्भ – References

Photo of Dr. Swaroop Choudhari
Dr. Swaroop Y Choudhari is an MBBS, MD in General Medicine. The doctor holds an experience of 8 years, and has extensive knowledge in his respective field of medicine.

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